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अपडेट खबर-कोटद्वार का लाल शहीद-HARIDWAR
Updated Tue, 07 Aug 2018 11:04 PM IST
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कोटद्वार। 36वीं राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात कोटद्वार के शिवपुर गांव निवासी राइफलमैन मनदीप सिंह रावत (28) आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए। सोमवार रात को मनदीप और उनके साथी जवानों ने जम्मू-कश्मीर के बांदीपुरा गरेज सेक्टर में दो आतंकवादियों को मार गिराया था। तभी दुश्मनों की ओर से हुई जवाबी फायरिंग में मनदीप शहीद हो गए। शहीद का पार्थिव शरीर आज बुधवार को कोटद्वार पहुंचने की संभावना है।
सेना के अधिकारियों की ओर से मनदीप के परिजनों को मंगलवार सुबह मनदीप के शहीद होने की सूचना दी गई। अधिकारियों ने बताया कि सोमवार रात को जम्मू कश्मीर के बांदीपुरा के गुरेज सेक्टर में आतंकवादियों के घुसने की सूचना मिली थी। सेना ने रात को ही सर्च ऑपरेशन चलाया, जिसमें आतंकवादियों ने जवानों को करीब पाते ही गोलियों की बौछार शुरू कर दी। सेना के जवान दो आतंकवादियों को मार चुके थे, तभी गोली लगने से मनदीप शहीद हो गए।
मनदीप के मौसा सुरेंद्र सिंह ने बताया कि मनदीप के पिता बूथी सिंह पूर्व सैनिक हैं और माता सूमा देवी गृहणी है। मनदीप में बचपन से ही सेना में भर्ती होने की ललक थी। 12वीं कक्षा पास करने के बाद वर्ष 2012 में वह गढ़वाल राइफल में भर्ती हो गए। उनकी पहली तैनाती 15वीं गढ़वाल राइफल्स में हुई। फौज में बेहतर प्रदर्शन होने के कारण उन्हें कोटद्वार के कौड़िया कैंप में पीटी प्रशिक्षक पद पर नियुक्ति दी गई। छह माह पहले ही उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर में 36वीं राष्ट्रीय राइफल्स में की गई थी। मनदीप के छोटे भाई सुदीप रावत भी जम्मू-कश्मीर राइफल्स में जम्मू में तैनात हैं।
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साइड स्टोरी--------------------------
शहादत से पहले मां को आया था मनदीप का फोन
पूछी थी सबकी खैर खबर, कहा था जल्द छुट्टी आएंगे घर
अमर उजाला ब्यूरो
कोटद्वार।
कोटद्वार के शिवपुर निवासी बूथी सिंह और मां सूमा देवी को क्या पता था कि मंगलवार को उनके लिए एक बुरी खबर आने वाली है। सोमवार शाम ही उनकी अपने बड़े बेटे मनदीप से फोन पर बात हुई थी। मां को सकुशल होने की सूचना देते हुए उन्होंने जल्द छुट्टी लेकर आने की बात कही। आमतौर पर मनदीप हफ्ते में दो या तीन बार घर पर फोन कर परिजनों से बात करते थे, लेकिन सोमवार को उन्होंने दो बार सुबह और शाम फोन कर सबकी खैर खबर लेने के साथ ही अपनी कुशलक्षेम भी बताई।
मंगलवार सुबह सेना के अधिकारियों की ओर से 36वीं राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात राइफलमैन मनदीप सिंह रावत की शहादत की खबर से उनके घर में कोहराम मच गया। पूर्व सैनिक पिता बूथी सिंह और मां सूमा देवी की आंखों के सामने अंधेरा छा गया। वह बिलखकर रोने लगे। मनदीप दो महीने पहले ही छुट्टी काटकर जम्मू-कश्मीर अपनी बटालियन में लौटे थे। शहीद मनदीप के मौसा सुरेंद्र सिंह बताते हैं कि घर वाले मनदीप की जल्द ही शादी करना चाहते थे। वे उसके लिए लड़की देख रहे थे, लेकिन शहीद की शहादत की खबर ने परिवार की सारी खुशियां छीन ली।
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सेना के अधिकारियों की ओर से मनदीप के परिजनों को मंगलवार सुबह मनदीप के शहीद होने की सूचना दी गई। अधिकारियों ने बताया कि सोमवार रात को जम्मू कश्मीर के बांदीपुरा के गुरेज सेक्टर में आतंकवादियों के घुसने की सूचना मिली थी। सेना ने रात को ही सर्च ऑपरेशन चलाया, जिसमें आतंकवादियों ने जवानों को करीब पाते ही गोलियों की बौछार शुरू कर दी। सेना के जवान दो आतंकवादियों को मार चुके थे, तभी गोली लगने से मनदीप शहीद हो गए।
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मनदीप के मौसा सुरेंद्र सिंह ने बताया कि मनदीप के पिता बूथी सिंह पूर्व सैनिक हैं और माता सूमा देवी गृहणी है। मनदीप में बचपन से ही सेना में भर्ती होने की ललक थी। 12वीं कक्षा पास करने के बाद वर्ष 2012 में वह गढ़वाल राइफल में भर्ती हो गए। उनकी पहली तैनाती 15वीं गढ़वाल राइफल्स में हुई। फौज में बेहतर प्रदर्शन होने के कारण उन्हें कोटद्वार के कौड़िया कैंप में पीटी प्रशिक्षक पद पर नियुक्ति दी गई। छह माह पहले ही उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर में 36वीं राष्ट्रीय राइफल्स में की गई थी। मनदीप के छोटे भाई सुदीप रावत भी जम्मू-कश्मीर राइफल्स में जम्मू में तैनात हैं।
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शहादत से पहले मां को आया था मनदीप का फोन
पूछी थी सबकी खैर खबर, कहा था जल्द छुट्टी आएंगे घर
अमर उजाला ब्यूरो
कोटद्वार।
कोटद्वार के शिवपुर निवासी बूथी सिंह और मां सूमा देवी को क्या पता था कि मंगलवार को उनके लिए एक बुरी खबर आने वाली है। सोमवार शाम ही उनकी अपने बड़े बेटे मनदीप से फोन पर बात हुई थी। मां को सकुशल होने की सूचना देते हुए उन्होंने जल्द छुट्टी लेकर आने की बात कही। आमतौर पर मनदीप हफ्ते में दो या तीन बार घर पर फोन कर परिजनों से बात करते थे, लेकिन सोमवार को उन्होंने दो बार सुबह और शाम फोन कर सबकी खैर खबर लेने के साथ ही अपनी कुशलक्षेम भी बताई।
मंगलवार सुबह सेना के अधिकारियों की ओर से 36वीं राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात राइफलमैन मनदीप सिंह रावत की शहादत की खबर से उनके घर में कोहराम मच गया। पूर्व सैनिक पिता बूथी सिंह और मां सूमा देवी की आंखों के सामने अंधेरा छा गया। वह बिलखकर रोने लगे। मनदीप दो महीने पहले ही छुट्टी काटकर जम्मू-कश्मीर अपनी बटालियन में लौटे थे। शहीद मनदीप के मौसा सुरेंद्र सिंह बताते हैं कि घर वाले मनदीप की जल्द ही शादी करना चाहते थे। वे उसके लिए लड़की देख रहे थे, लेकिन शहीद की शहादत की खबर ने परिवार की सारी खुशियां छीन ली।