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..तो इस बार पेयजल किल्लत से जूझेगी एक लाख की आबादी
Updated Sun, 18 Feb 2018 10:29 PM IST
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कोटद्वार। पेयजल निगम की सुस्त कार्यप्रणाली के चलते इस वर्ष गर्मियों में भी कोटद्वार शहर, निकटवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों और भाबर के 135000 (एक लाख पैंतीस हजार) की आबादी को पेयजल किल्लत से जूझना पड़ सकता है। विभाग की सुस्ती का आलम यह है कि सरकार द्वारा कोटद्वार नगर निगम क्षेत्र में पेयजल किल्लत को दूर करने के लिए बनाई गई सात योजनाओं पर पिछले दो सालों से कछुआ गति से काम चल रहा है। इस गर्मी मेें भी योजनाओं के जलसंस्थान को हस्तांतरित होने के कहीं आसार नजर नहीं आ रहे हैं। इसके कारण पेयजल उपभोक्ताओं का पेयजल किल्लत से जूझना तय है।
कोटद्वार शहरी क्षेत्र और निकटवर्ती 35 ग्राम पंचायतों के 73 गांवों में गर्मियों में पानी की किल्लत को दूर करने के लिए दो वर्ष पूर्व सरकार ने एक साल के अंदर दो ट्यूबवेल और पांच ओवर हेड टैंकों का निर्माण पूरा करने की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था पेयजल निगम को सौंपी थी, लेकिन करीब डेढ़ से दो साल बीत जाने के बाद भी अभी तक एक भी काम पूरा नहीं हो पाया है। क्षेत्र में पूर्व में संचालित ट्यूबवेलों का वाटर लेवल डाउन होता जा रहा है। इसके कारण जिला प्रशासन पेयजल निगम के अधिकारियों को लगातार नई पेयजल योजनाओं पर कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दे रहा है, लेकिन निगम के अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं, जिसका खामियाजा लाखों पेयजल उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है।
इन योजनाओं पर पूरा होना है काम
- राजकीय इंटर कालेज में ट्यूबवेल का निर्माण।
- गाड़ीघाट खोह नदी के किनारे ट्यूबवेल का निर्माण।
- शिवपुर गांव में ओवर हेड टैंक का निर्माण।
- काशीरामपुर मल्ला में ओवर हेड टैंक का निर्माण।
- पदमपुर के श्यामलाल बगीचा में ओवर हेड टैंक का निर्माण।
- नंदपुर भाबर में ओवर हेड टैंक का निर्माण।
- उत्तरी झंडीचौड़ में ओवर हेड टैंक का निर्माण।
क्या कहते हैं अधिकारी
यह बात सही है कि कोटद्वार और निकटवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों के लिए पेयजल योजनाओं को जलसंस्थान को हस्तांतरित नहीं किया जा सका है। इसमें बजट की समस्या समाने आ रही है। शासन से उन्हें पूरा बजट प्राप्त नहीं हुआ है। बजट मिलते ही सभी योजनाओं को पूरा कर जलसंस्थान के सुपुर्द कर दिया जाएगा।
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-बाबूराम, अधिशासी अभियंता पेयजल निगम
- फोटो
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कोटद्वार शहरी क्षेत्र और निकटवर्ती 35 ग्राम पंचायतों के 73 गांवों में गर्मियों में पानी की किल्लत को दूर करने के लिए दो वर्ष पूर्व सरकार ने एक साल के अंदर दो ट्यूबवेल और पांच ओवर हेड टैंकों का निर्माण पूरा करने की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था पेयजल निगम को सौंपी थी, लेकिन करीब डेढ़ से दो साल बीत जाने के बाद भी अभी तक एक भी काम पूरा नहीं हो पाया है। क्षेत्र में पूर्व में संचालित ट्यूबवेलों का वाटर लेवल डाउन होता जा रहा है। इसके कारण जिला प्रशासन पेयजल निगम के अधिकारियों को लगातार नई पेयजल योजनाओं पर कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दे रहा है, लेकिन निगम के अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं, जिसका खामियाजा लाखों पेयजल उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है।
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इन योजनाओं पर पूरा होना है काम
- राजकीय इंटर कालेज में ट्यूबवेल का निर्माण।
- गाड़ीघाट खोह नदी के किनारे ट्यूबवेल का निर्माण।
- शिवपुर गांव में ओवर हेड टैंक का निर्माण।
- काशीरामपुर मल्ला में ओवर हेड टैंक का निर्माण।
- पदमपुर के श्यामलाल बगीचा में ओवर हेड टैंक का निर्माण।
- नंदपुर भाबर में ओवर हेड टैंक का निर्माण।
- उत्तरी झंडीचौड़ में ओवर हेड टैंक का निर्माण।
क्या कहते हैं अधिकारी
यह बात सही है कि कोटद्वार और निकटवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों के लिए पेयजल योजनाओं को जलसंस्थान को हस्तांतरित नहीं किया जा सका है। इसमें बजट की समस्या समाने आ रही है। शासन से उन्हें पूरा बजट प्राप्त नहीं हुआ है। बजट मिलते ही सभी योजनाओं को पूरा कर जलसंस्थान के सुपुर्द कर दिया जाएगा।
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-बाबूराम, अधिशासी अभियंता पेयजल निगम
- फोटो