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सुशील रघुवंशी हत्याकांड के खुलासे की मांग को लेकर तहसील में धरना-प्रदर्शन
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कोटद्वार। वकील सुशील कुमार रघुवंशी हत्याकांड का खुलासा करने की मांग को लेकर बार एसोसिएशन और अन्य संगठनों का कोटद्वार तहसील में 243वें दिन भी धरना-प्रदर्शन जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि करीब डेढ़ साल पहले दिन-दहाड़े हुई वकील की हत्या का खुलासा न होना राज्य की कानून और व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है।
कोटद्वार बार एसोसिएशन के अध्यक्ष किशन सिंह पंवार, पूर्व अध्यक्ष ध्यान सिंह नेगी, उत्तराखंड विकास पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मुजीब नैथानी और समाजसेवी आशीष किमोठी ने कहा कि मृतक वकील सुशील रघुवंशी की पत्नी रेखा रघुवंशी को अपने पति के हत्यारों की गिरफ्तारी के लिए तहसील में धरना देना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि हत्याकांड के दिन ही पुलिस की ओर से लापरवाही बरती गई। डेढ़ साल बाद भी हत्याकांड का खुलासा न होना कोटद्वार ही नहीं, पूरे प्रदेश की लचर कानून व्यवस्था को दर्शाता है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि परिजन सुशील रघुवंशी हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराने की मांग कर रहे हैं, लेकिन इस ओर सरकार ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने घटना के दिन घायलावस्था में सुशील रघुवंशी के बयान दर्ज किए थे, लेकिन जांच में वह डायरी सामने नहीं आई है। कहा कि शासन द्वारा गठित एसआईटी की जांच भी हत्यारोपियों तक नहीं पहुंच पा रही है। शुक्रवार को धरने में बैठने वालों में सुदीप बौंठियाल, आलोक रावत, भरत सिंह नेगी, राजेंद्र, आशुतोष देवरानी, हुकुम सिंह और मनोज सिंह आदि शामिल रहे।
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कोटद्वार बार एसोसिएशन के अध्यक्ष किशन सिंह पंवार, पूर्व अध्यक्ष ध्यान सिंह नेगी, उत्तराखंड विकास पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मुजीब नैथानी और समाजसेवी आशीष किमोठी ने कहा कि मृतक वकील सुशील रघुवंशी की पत्नी रेखा रघुवंशी को अपने पति के हत्यारों की गिरफ्तारी के लिए तहसील में धरना देना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि हत्याकांड के दिन ही पुलिस की ओर से लापरवाही बरती गई। डेढ़ साल बाद भी हत्याकांड का खुलासा न होना कोटद्वार ही नहीं, पूरे प्रदेश की लचर कानून व्यवस्था को दर्शाता है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि परिजन सुशील रघुवंशी हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराने की मांग कर रहे हैं, लेकिन इस ओर सरकार ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने घटना के दिन घायलावस्था में सुशील रघुवंशी के बयान दर्ज किए थे, लेकिन जांच में वह डायरी सामने नहीं आई है। कहा कि शासन द्वारा गठित एसआईटी की जांच भी हत्यारोपियों तक नहीं पहुंच पा रही है। शुक्रवार को धरने में बैठने वालों में सुदीप बौंठियाल, आलोक रावत, भरत सिंह नेगी, राजेंद्र, आशुतोष देवरानी, हुकुम सिंह और मनोज सिंह आदि शामिल रहे।
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