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श्रम विभाग में हुई मनमानी नियुक्तियां निरस्त करने की मांग
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political
- फोटो : amarujala
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कोटद्वार। कोटद्वार के नजीबाबाद रोड निवासी दिव्यांग ठाकुर सिंह समेत कई लोगों ने उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड पर नियमों को ताक पर रखकर नियुक्तियां करने का आरोप लगाते हुए सीएम को ज्ञापन भेजा है। उन्होंने बोर्ड के कार्यालयों और श्रम विभाग में की गई सभी नियुक्तियों को निरस्त कर नियुक्ति प्रक्रिया के लिए विज्ञप्ति प्रकाशित करने की मांग की है।
ठाकुर सिंह ने एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री और हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन भेजा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय कोटद्वार, श्रीनगर समेत अन्य कार्यालयों में नियमों को ताक में रखकर नियुक्तियां की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित मंत्री, बोर्ड के सदस्य और सहायक श्रम आयुक्त ने गत एक से 12 दिसंबर के मध्य छह लोगों को कार्यालय में काम पर रखा। इनमें से एक पुरुष और एक महिला को नियुक्ति दे दी गई, लेकिन अन्य चार लोगों को नियुक्ति नहीं दी गई। मनमानी का आलम यह है कि एक 56 वर्ष के व्यक्ति को भी बोर्ड के कार्यालय में नियुक्ति का झांसा देकर काम लिया जा रहा है। उन्होंने सहायक श्रम आयुक्त से सूचना अधिकार अधिनियम के तहत सूचना मांगी, लेकिन 40 दिन बाद भी उन्हें सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। उन्होंने कहा कि नियमों को ताक पर मनमाने ढंग से हो रही नियुक्तियां बेरोजगारों के साथ अन्याय है। उन्होंने ये नियुक्तियां रद्द कर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने और एक दिसंबर 2017 से कार्यालय में काम कर रहे चार लोगों को उनके एक साल का वेतन देने की मांग की है।
बोर्ड ने पीआरडी से डाटा एंट्री आपरेटर समेत कुछ पदों के लिए नाम मांगे थे, लेकिन अभी तक विभाग की ओर से किसी को भी नियुक्ति पत्र जारी नहीं किए गए हैं।
-केके गुप्ता, सहायक श्रम आयुक्त कोटद्वार
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ठाकुर सिंह ने एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री और हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन भेजा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय कोटद्वार, श्रीनगर समेत अन्य कार्यालयों में नियमों को ताक में रखकर नियुक्तियां की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित मंत्री, बोर्ड के सदस्य और सहायक श्रम आयुक्त ने गत एक से 12 दिसंबर के मध्य छह लोगों को कार्यालय में काम पर रखा। इनमें से एक पुरुष और एक महिला को नियुक्ति दे दी गई, लेकिन अन्य चार लोगों को नियुक्ति नहीं दी गई। मनमानी का आलम यह है कि एक 56 वर्ष के व्यक्ति को भी बोर्ड के कार्यालय में नियुक्ति का झांसा देकर काम लिया जा रहा है। उन्होंने सहायक श्रम आयुक्त से सूचना अधिकार अधिनियम के तहत सूचना मांगी, लेकिन 40 दिन बाद भी उन्हें सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। उन्होंने कहा कि नियमों को ताक पर मनमाने ढंग से हो रही नियुक्तियां बेरोजगारों के साथ अन्याय है। उन्होंने ये नियुक्तियां रद्द कर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने और एक दिसंबर 2017 से कार्यालय में काम कर रहे चार लोगों को उनके एक साल का वेतन देने की मांग की है।
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बोर्ड ने पीआरडी से डाटा एंट्री आपरेटर समेत कुछ पदों के लिए नाम मांगे थे, लेकिन अभी तक विभाग की ओर से किसी को भी नियुक्ति पत्र जारी नहीं किए गए हैं।
-केके गुप्ता, सहायक श्रम आयुक्त कोटद्वार