{"_id":"59a050744f1c1bc9218b458e","slug":"51503678580-kotdwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोटद्वार की आपदा पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोटद्वार की आपदा पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब
Updated Fri, 25 Aug 2017 10:07 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोटद्वार। 3 और 4 अगस्त को कोटद्वार और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों आई आपदा के प्रभावितों को राहत देने में बरती गई लापरवाही को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में दो युवा स्थानीय अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी।
अधिवक्ता अमृतांशु बड़थ्वाल और रोहित डंडरियाल ने जनहित याचिका दाखिल कर कहा था कि तीन और चार अगस्त को कोटद्वार में भारी बारिश के बाद आई बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई, लेकिन स्थानीय प्रशासन एवं राज्य सरकार की ओर से बाढ़ पीड़ितों की सहायता करने में घोर लापरवाही बरती गई।
याचियों ने बताया कि मुख्य न्यायाधीश केएम जोसफ और न्यायाधीश आलोक सिंह ने उनकी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र और राज्य सरकार, स्वास्थ्य, सिंचाई, आपदा प्रबंधन और वन विभाग को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने किसानों और ग्रामीणों की भूमि और आवासों को हुई क्षति का सही आकलन कर राष्ट्रीय नीति के आधार पर मुआवजा देने, प्रभावितों कोे स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने और बेघर हुए लोगों को उचित क्षतिपूर्ति दिलाने की मांग की है।
विज्ञापन
विज्ञापन
अधिवक्ता अमृतांशु बड़थ्वाल और रोहित डंडरियाल ने जनहित याचिका दाखिल कर कहा था कि तीन और चार अगस्त को कोटद्वार में भारी बारिश के बाद आई बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई, लेकिन स्थानीय प्रशासन एवं राज्य सरकार की ओर से बाढ़ पीड़ितों की सहायता करने में घोर लापरवाही बरती गई।
विज्ञापन
याचियों ने बताया कि मुख्य न्यायाधीश केएम जोसफ और न्यायाधीश आलोक सिंह ने उनकी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र और राज्य सरकार, स्वास्थ्य, सिंचाई, आपदा प्रबंधन और वन विभाग को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने किसानों और ग्रामीणों की भूमि और आवासों को हुई क्षति का सही आकलन कर राष्ट्रीय नीति के आधार पर मुआवजा देने, प्रभावितों कोे स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने और बेघर हुए लोगों को उचित क्षतिपूर्ति दिलाने की मांग की है।
विज्ञापन