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लोक संस्कृतिक के संवाहक ने ली आखिरी सांस
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पौड़ी। राठ क्षेत्र के प्रसिद्घ लोक बांसुरी वादक सिताब सिंह चौधरी का निधन हो गया है। मंगलवार को चौधरी ने अपने गांव में 65 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। वे विगत 40 वर्षों से पहाड़ के हर तीज त्यौहार, पूजा-पाठ, मेलों, जागरण व सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बांसुरी के सुर बिखेर दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया करते थे। उनके निधन से पूरे राठ क्षेत्र में शोक की लहर है।
राठ क्षेत्र के पाठों गांव निवासी सिताब सिंह चौधरी बालपन से ही बांसुरी बजाते थे। उन्होंने किसी से प्रशिक्षण नहीं लिया। उन्हें बांसुरी वादक के साथ पण्डवाण गायन के लिए भी जाना जाता है। चौथान पट्टी के अलावा श्रीकोट, चुपडाकोट और गैरसैंण में भी विभिन्न कार्यक्रमों में प्रस्तुतियां दी। पट्टी के रिक्साल गांव की प्रसिद्ध डाली (पांडव नृत्य) उनके बिना अधूरी मानी जाती थी। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली चौथान विकास समिति के प्रचार सचिव बच्चे सिंह रावत ने बताया कि चौधरी में मुरली बजाने और पण्डवाण गायन की कला कूट-कूट कर भरी थी। उन्होंने कहा कि इस महान लोक कलाकार को आज तक राज्य सरकार की ओर कोई पहचान व सम्मान नहीं मिला।
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राठ क्षेत्र के पाठों गांव निवासी सिताब सिंह चौधरी बालपन से ही बांसुरी बजाते थे। उन्होंने किसी से प्रशिक्षण नहीं लिया। उन्हें बांसुरी वादक के साथ पण्डवाण गायन के लिए भी जाना जाता है। चौथान पट्टी के अलावा श्रीकोट, चुपडाकोट और गैरसैंण में भी विभिन्न कार्यक्रमों में प्रस्तुतियां दी। पट्टी के रिक्साल गांव की प्रसिद्ध डाली (पांडव नृत्य) उनके बिना अधूरी मानी जाती थी। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली चौथान विकास समिति के प्रचार सचिव बच्चे सिंह रावत ने बताया कि चौधरी में मुरली बजाने और पण्डवाण गायन की कला कूट-कूट कर भरी थी। उन्होंने कहा कि इस महान लोक कलाकार को आज तक राज्य सरकार की ओर कोई पहचान व सम्मान नहीं मिला।
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