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साधन सहकारी सचिवों की हड़ताल किसानों पर पड़ रही भारी
Updated Thu, 08 Mar 2018 10:36 PM IST
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कोटद्वार। साधन सहकारी समितियों के सचिवों और कर्मचारियों की हड़ताल कोटद्वार और भाबर क्षेत्र में काश्तकारों पर भारी पड़ने लगी है। सहकारी समितियों के कार्यालय, खाद, बीज के गोदाम और मिनी बैंकों में ताले पड़ने से काश्तकार परेशान हैं। किसानों को न तो खाद, बीज ही मिल पा रहा है, न ही ऋण की सुविधा। ऐसे में उन्हें निजी संस्थाओं और रसूखदारों से महंगे ब्याज पर पैसा लेना पड़ रहा है। उत्तराखंड आंदोलनकारी राष्ट्रीय मोर्चा ने किसानों की बढ़ती दिक्कतों की ओर सरकार का ध्यान दिलाते हुए अविलंब हड़ताल खुलवाने की मांग की है।
तीन सप्ताह से आंदोलन की राह पकड़े साधन सहकारी समितियों के सचिवों और कर्मचारियों की हड़ताल से पौड़ी जिले के भाबर क्षेत्र में काश्तकार परेशान हो गए हैं। आंदोलनकारी मोर्चा के प्रवक्ता विजय ध्यानी ने बताया कि पौड़ी जिले में 132 साधन सहकारी समितियां हैं, लेकिन गत 19 फरवरी से साधन समितियों के सचिवों की हड़ताल से यहां ताले लटके हुए हैं। किसानों को हर रोज मिनी बैंकों से वास्ता पड़ता है, न जमा हो पा रहा है, न ही ऋण मिल पा रहा है।
भाबर के किसान कुबेर सिंह जलाल, राजन जलाल, दान सिंह अधिकारी, महेंद्र सिंह, विजय प्रकाश, केशर सिंह नेगी, विमल प्रसाद व बीरेंद्र केष्टवाल का कहना है कि सरकार को हड़ताल समाप्त कर समितियों का कामकाज जल्द शुरू करवाना चाहिए।
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तीन सप्ताह से आंदोलन की राह पकड़े साधन सहकारी समितियों के सचिवों और कर्मचारियों की हड़ताल से पौड़ी जिले के भाबर क्षेत्र में काश्तकार परेशान हो गए हैं। आंदोलनकारी मोर्चा के प्रवक्ता विजय ध्यानी ने बताया कि पौड़ी जिले में 132 साधन सहकारी समितियां हैं, लेकिन गत 19 फरवरी से साधन समितियों के सचिवों की हड़ताल से यहां ताले लटके हुए हैं। किसानों को हर रोज मिनी बैंकों से वास्ता पड़ता है, न जमा हो पा रहा है, न ही ऋण मिल पा रहा है।
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भाबर के किसान कुबेर सिंह जलाल, राजन जलाल, दान सिंह अधिकारी, महेंद्र सिंह, विजय प्रकाश, केशर सिंह नेगी, विमल प्रसाद व बीरेंद्र केष्टवाल का कहना है कि सरकार को हड़ताल समाप्त कर समितियों का कामकाज जल्द शुरू करवाना चाहिए।
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