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ना बास घुघुती चैत की खुद लगीं च मां मैत की...
Updated Sun, 15 Apr 2018 10:48 PM IST
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यमकेश्वर। त्रिवेणी मेला वशिष्ट आश्रम विकास समिति की ओर से पहली बार आयोजित बैसाखी महोत्सव में सुमित्रा रावत के सुरों का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोला। संस्कृति विभाग उत्तराखंड की ओर से महोत्सव में पहुंची आशुकला समिति की संस्थापक सुमित्रा रावत ने एक से बढ़कर एक गढ़वाली लोक गीतों की प्रस्तुति देकर समारोह में समा बांधा।
यमकेश्वर ब्लाक के भंवासी में आयोजित बैसाखी महोत्सव का क्षेत्रीय विधायक ऋतु खंडूड़ी ने शुुुुभारंभ किया। उन्होंने मेलों को गढ़वाल की धरोहर बताया। कहा कि मेले आपसी मेलजोल और सद्भाव की भावना विकसित करते हैं, जो कि वर्तमान की टीवी और मोबाइल संस्कृति के चलते दूर होती जा रही है। उन्होंने गढ़वाल की लोक संस्कृति को पूरे देश में पहुंचाने के लिए सुमित्रा रावत का आभार जताया।
इसके बाद सुमित्रा रावत की टीम ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत गढ़ वंदना दैंणा होयां खोली कू गणेशा.. से की। उनकी टीम ने सुमित्रा के गीत धार में उरख्याली चौ डांडा बथाऊं चा.. गीत पर थड़िया चौंफुला और मोहना तीले धारू बोला, भागुली तीले धारू बोला गीत पर छपेली लोकनृत्य से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। सुमित्रा रावत के गीत ना बास घुघती चैत की, खुद लगीं च मां मैत की... ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर किया। इसके बाद साथी गायक योगेंद्र गडोई ने घुट-घुट बडूली चा, मैता कु रैबार अयूं चा.. और अनिल शर्मा ने तू छैं बांद जौनसार की.. सुनाकर कार्यक्रम में समा बांधा। देर शाम तक दर्शक एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों पर झूमते रहे।
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इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष अरुण नेगी, संरक्षक संगीता बिष्ट, मुकेश कुमार, धीरज नेेगी, मातवर सिंह बिष्ट, प्रधान बसु देवी, अजीत देवलाल, विजय लखेड़ा व अमित सजवाण आदि मौजूद थे।
-फोटो
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यमकेश्वर ब्लाक के भंवासी में आयोजित बैसाखी महोत्सव का क्षेत्रीय विधायक ऋतु खंडूड़ी ने शुुुुभारंभ किया। उन्होंने मेलों को गढ़वाल की धरोहर बताया। कहा कि मेले आपसी मेलजोल और सद्भाव की भावना विकसित करते हैं, जो कि वर्तमान की टीवी और मोबाइल संस्कृति के चलते दूर होती जा रही है। उन्होंने गढ़वाल की लोक संस्कृति को पूरे देश में पहुंचाने के लिए सुमित्रा रावत का आभार जताया।
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इसके बाद सुमित्रा रावत की टीम ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत गढ़ वंदना दैंणा होयां खोली कू गणेशा.. से की। उनकी टीम ने सुमित्रा के गीत धार में उरख्याली चौ डांडा बथाऊं चा.. गीत पर थड़िया चौंफुला और मोहना तीले धारू बोला, भागुली तीले धारू बोला गीत पर छपेली लोकनृत्य से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। सुमित्रा रावत के गीत ना बास घुघती चैत की, खुद लगीं च मां मैत की... ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर किया। इसके बाद साथी गायक योगेंद्र गडोई ने घुट-घुट बडूली चा, मैता कु रैबार अयूं चा.. और अनिल शर्मा ने तू छैं बांद जौनसार की.. सुनाकर कार्यक्रम में समा बांधा। देर शाम तक दर्शक एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों पर झूमते रहे।
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इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष अरुण नेगी, संरक्षक संगीता बिष्ट, मुकेश कुमार, धीरज नेेगी, मातवर सिंह बिष्ट, प्रधान बसु देवी, अजीत देवलाल, विजय लखेड़ा व अमित सजवाण आदि मौजूद थे।
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