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इलेक्ट्रिक फेंसिंग क्षतिग्रस्त, आबादी में धमक रहे हाथी
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कोटद्वार। लैंसडौन वन प्रभाग के कोटद्वार रेंज की सीमा से सटे भाबर क्षेत्र के सत्तीचौड़ में हाथी को आबादी क्षेत्र में आने से रोकने के लिए लगाई गई इलेक्ट्रिक फेंसिंग लाइन दम तोड़ रही है। इससे हाथी खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। हाथी के भय से भाबर क्षेत्र के सत्तीचौड़ में लोग शाम ढलते ही घरों में दुबक रहे हैं।
लैंसडौन वन प्रभाग की कोटद्वार, कोटड़ीढांग और दुगड्डा रेंज के सनेह पट्टी के कुंभीचौड़, लालपानी, रामपुर, सनेह, नौड़ी, बगनाला, सुखरो पट्टी के शिवपुर, लालपुर, ध्रुवपुर व भाबर क्षेत्र के सिगड्डी, सत्तीचौड़, कोठला, उदयरामपुर नयाबाद आदि क्षेत्रों में हाथी ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया था। आए दिन हाथी गांव में धमककर किसानों की मेहनत से उगाई खेती को चट कर रहे थे। कई बार हाथियों के हमलों से लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। लोग बार-बार सरकार से हाथियों से सुरक्षा के लिए गुहार लगा रहे थे। इसी के चलते वर्ष 2005 में इन क्षेत्रों में उरेड़ा की ओर से इलेक्ट्रिक फेंसिंग लाइन लगाई गई, लेकिन संरक्षण के अभाव में कुछ सालों में इलेक्ट्रिक फेंसिंग लाइन क्षतिग्रस्त हो गई। इसके बाद कुछ क्षेत्रों में हाथी सुरक्षा दीवार बनाई गई, जबकि सनेह क्षेत्र में अप्रैल 2018 में 1,89,500 रुपये की धनराशि से जंगल से आबादी में घुसने के हाथी के रास्तों पर इलेक्ट्रिक फेंसिंग लगाई गई, लेकिन भाबर क्षेत्र के सत्तीचौड़ में अभी तक क्षतिग्रस्त फेंसिंग लाइन को ठीक नहीं किया गया है, जिससे ग्वालगढ़ के जंगल से हाथी गांव में पहुंचकर लोगों की तैयार फसलों को चौपट कर रहे हैं। ग्रामीण भरोसानंद, गोविंद प्रसाद व ललिता प्रसाद आदि ने कहा कि शाम ढलने के बाद हाथी खेतों में पहुंच रहे हैं। हाथी के भय के चलते वे दोपहर बाद पुराना हरिद्वार मार्ग से आवाजाही नहीं करते हैं। ग्रामीण कई बार इलेक्ट्रिक फेंसिंग को ठीक करने की मांग कर चुके हैं, लेकिन बावजूद इसके अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उधर, लैंसडौन वन प्रभाग के डीएफओ वैभव कुमार सिंह ने कहा कि इलेक्ट्रिक फेंसिंग की मरम्मत के लिए शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजे गए। नए वित्तीय वर्ष में शासन से बजट आवंटित किया जाएगा। बजट मिलने के बाद क्षतिग्रस्त इलेक्ट्रिक फेंसिंग को ठीक कराया जाएगा।
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लैंसडौन वन प्रभाग की कोटद्वार, कोटड़ीढांग और दुगड्डा रेंज के सनेह पट्टी के कुंभीचौड़, लालपानी, रामपुर, सनेह, नौड़ी, बगनाला, सुखरो पट्टी के शिवपुर, लालपुर, ध्रुवपुर व भाबर क्षेत्र के सिगड्डी, सत्तीचौड़, कोठला, उदयरामपुर नयाबाद आदि क्षेत्रों में हाथी ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया था। आए दिन हाथी गांव में धमककर किसानों की मेहनत से उगाई खेती को चट कर रहे थे। कई बार हाथियों के हमलों से लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। लोग बार-बार सरकार से हाथियों से सुरक्षा के लिए गुहार लगा रहे थे। इसी के चलते वर्ष 2005 में इन क्षेत्रों में उरेड़ा की ओर से इलेक्ट्रिक फेंसिंग लाइन लगाई गई, लेकिन संरक्षण के अभाव में कुछ सालों में इलेक्ट्रिक फेंसिंग लाइन क्षतिग्रस्त हो गई। इसके बाद कुछ क्षेत्रों में हाथी सुरक्षा दीवार बनाई गई, जबकि सनेह क्षेत्र में अप्रैल 2018 में 1,89,500 रुपये की धनराशि से जंगल से आबादी में घुसने के हाथी के रास्तों पर इलेक्ट्रिक फेंसिंग लगाई गई, लेकिन भाबर क्षेत्र के सत्तीचौड़ में अभी तक क्षतिग्रस्त फेंसिंग लाइन को ठीक नहीं किया गया है, जिससे ग्वालगढ़ के जंगल से हाथी गांव में पहुंचकर लोगों की तैयार फसलों को चौपट कर रहे हैं। ग्रामीण भरोसानंद, गोविंद प्रसाद व ललिता प्रसाद आदि ने कहा कि शाम ढलने के बाद हाथी खेतों में पहुंच रहे हैं। हाथी के भय के चलते वे दोपहर बाद पुराना हरिद्वार मार्ग से आवाजाही नहीं करते हैं। ग्रामीण कई बार इलेक्ट्रिक फेंसिंग को ठीक करने की मांग कर चुके हैं, लेकिन बावजूद इसके अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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उधर, लैंसडौन वन प्रभाग के डीएफओ वैभव कुमार सिंह ने कहा कि इलेक्ट्रिक फेंसिंग की मरम्मत के लिए शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजे गए। नए वित्तीय वर्ष में शासन से बजट आवंटित किया जाएगा। बजट मिलने के बाद क्षतिग्रस्त इलेक्ट्रिक फेंसिंग को ठीक कराया जाएगा।
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