{"_id":"5a315d794f1c1b0d698c1c72","slug":"191513184633-kotdwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बैंक अधिकारी गरिमा का किसान की माली हालत देख पसीजा दिल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बैंक अधिकारी गरिमा का किसान की माली हालत देख पसीजा दिल
Updated Wed, 13 Dec 2017 10:33 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोटद्वार। देश में एक ओर बैंक के कर्ज के बोझ तले दबे गरीब किसान कर्जा नहीं चुकाने और बैंक कर्मचारियों के बार-बार तकादा करने पर आत्महत्या जैसा कदम उठा रहे हैं। ऐसे में बैंक आफ इंडिया की महिला अधिकारी गरिमा ने बैंक का कर्जदार एक गरीब किसान का ऋण अपने खाते से जमा कर मिसाल कायम की है।
भाबर क्षेत्र के मोटाढांक तल्ला निवासी किसान स्वयंबर दत्त जखमोला ने वर्ष 2012 में खेती के लिए बैंक ऑफ इंडिया की कोटद्वार शाखा से 10 हजार रुपये का ऋण लिया था। उसे यह ऋण नवंबर 2017 तक चुकाना था। किसान ने किसी प्रकार चार हजार रुपये तो बैंक का कर्जा चुका दिया, लेकिन, आर्थिक स्थित खराब होने के कारण वह आगे की किस्त जमा नहीं करा पाया। नवंबर तक बैंक ने उसकी किस्तों का इंतजार किया। दिसंबर शुरू होते ही बैंक में ऋण जमा नहीं करने वालों की सूची में स्वयंबर दत्त का नाम भी आ गया। बैंक ने बकाया जमा करने के लिए किसान को नोटिस भेजा, लेकिन वह बकाया जामा करने के लिए बैंक नहीं पहुंचा।
शाखा प्रबंधक के निर्देश पर बैंक अधिकारी गरिमा जुयाल बैंक का पैसा वसूलने के लिए मोटाढांक तल्ला स्थित किसान के घर पहुंची, लेकिन किसान की माली हालत देखकर उसका दिल पसीज गया। किसान अत्यंत गरीबी की हालत में जीवन यापन कर रहा था। किसान स्वयंबर दत्त जखमोला ने बैंक अधिकारी को अपनी व्यथा बताई। इस पर बैंक अधिकारी गरिमा उससे बिना सवाल किए बैंक लौट आई और शाखा प्रबंधक के समक्ष किसान के पैसे अपने एकाउंट से जमा करने का आग्रह करने लगी। शाखा प्रबंधक एसएस रावत ने बताया कि अधिकारी गरिमा जुयाल ने अपने खाते से किसान के ऋण खाते में छह हजार रुपये जमा कर किसान का ऋण खाता बंद कर दिया।
विज्ञापन
-फोटो
विज्ञापन
भाबर क्षेत्र के मोटाढांक तल्ला निवासी किसान स्वयंबर दत्त जखमोला ने वर्ष 2012 में खेती के लिए बैंक ऑफ इंडिया की कोटद्वार शाखा से 10 हजार रुपये का ऋण लिया था। उसे यह ऋण नवंबर 2017 तक चुकाना था। किसान ने किसी प्रकार चार हजार रुपये तो बैंक का कर्जा चुका दिया, लेकिन, आर्थिक स्थित खराब होने के कारण वह आगे की किस्त जमा नहीं करा पाया। नवंबर तक बैंक ने उसकी किस्तों का इंतजार किया। दिसंबर शुरू होते ही बैंक में ऋण जमा नहीं करने वालों की सूची में स्वयंबर दत्त का नाम भी आ गया। बैंक ने बकाया जमा करने के लिए किसान को नोटिस भेजा, लेकिन वह बकाया जामा करने के लिए बैंक नहीं पहुंचा।
विज्ञापन
शाखा प्रबंधक के निर्देश पर बैंक अधिकारी गरिमा जुयाल बैंक का पैसा वसूलने के लिए मोटाढांक तल्ला स्थित किसान के घर पहुंची, लेकिन किसान की माली हालत देखकर उसका दिल पसीज गया। किसान अत्यंत गरीबी की हालत में जीवन यापन कर रहा था। किसान स्वयंबर दत्त जखमोला ने बैंक अधिकारी को अपनी व्यथा बताई। इस पर बैंक अधिकारी गरिमा उससे बिना सवाल किए बैंक लौट आई और शाखा प्रबंधक के समक्ष किसान के पैसे अपने एकाउंट से जमा करने का आग्रह करने लगी। शाखा प्रबंधक एसएस रावत ने बताया कि अधिकारी गरिमा जुयाल ने अपने खाते से किसान के ऋण खाते में छह हजार रुपये जमा कर किसान का ऋण खाता बंद कर दिया।
विज्ञापन
-फोटो