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वीरांगना तीलू रौतेली के भावपूर्ण मंचन से भाव विभोर हुए लोग
Updated Sun, 19 Aug 2018 10:28 PM IST
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सतपुली। वीरबाला तीलू रौतेली की जयंती के उपलक्ष्य में ऋतुराज अनुराग चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से तीलू रौतेली के जीवन पर आधारित गढ़वाली नाटक का भावपूर्ण मंचन किया गया। नाटक के मंचन ने लोगों को भाव विभोर कर दिया।
तीलू रौतेली के पैतृक गांव गुराड़ में आयोजित नाटक का वीरांगना के वंशज लेफ्टिनेंट जनरल जगमोहन सिंह रावत (सेनि) और पूर्व विधायक शैलेंद्र रावत ने शुभारंभ किया। नाट्य प्रस्तुति में वर्ष 1661 में गढ़वाल क्षेत्र के ग्राम गुराड़ में भूपू रौत और मैणा देवी के घर जन्मी वीरबाला तीलू रौतेली के अदम्य साहस, बलिदान और त्याग का जीवंत अभिनय किया गया। नाट्य प्रस्तुति में कत्यूर आक्रमणकारी राजा धामशाही के हमले में तीलू के पिता भूप सिंह रावत और दोनों भाई भक्तू और पथ्वा व मंगेतर भवानी सिंह शहीद हो जाते हैं। इसके बाद तीलू ने 15 वर्ष की किशोरावस्था में कत्यूर आक्रमणकारियों से बदला लेने के लिए तीलू की सहेलियों देवकी और बेलू के साथ गुरु शिबू पोखरियाल के नेतृत्व में अपनी सेना तैयार करती है। उसके बाद रणभूमि में सात साल तक लड़ते हुए कई गढ़ों को जीतकर आक्रमणकारियों के हौसले पस्त कर देती है। 1683 में 22 वर्ष की अवस्था में कलिंकाखाल गढ़ पर विजय प्राप्त करने के बाद वापस लौट रही तीलू की नयार नदी में नहाते समय धोखे से कत्यूर रामू रजवाड़ हत्या कर देता है। इस मौके पर आयोजन समिति के सदस्य उदयपाल सिंह रावत, रंजना रावत, अर्चना रावत, अनिल बिष्ट, संजय रावत व सुनील रावत आदि मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन गणेश खुगशाल ने किया।
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तीलू रौतेली के पैतृक गांव गुराड़ में आयोजित नाटक का वीरांगना के वंशज लेफ्टिनेंट जनरल जगमोहन सिंह रावत (सेनि) और पूर्व विधायक शैलेंद्र रावत ने शुभारंभ किया। नाट्य प्रस्तुति में वर्ष 1661 में गढ़वाल क्षेत्र के ग्राम गुराड़ में भूपू रौत और मैणा देवी के घर जन्मी वीरबाला तीलू रौतेली के अदम्य साहस, बलिदान और त्याग का जीवंत अभिनय किया गया। नाट्य प्रस्तुति में कत्यूर आक्रमणकारी राजा धामशाही के हमले में तीलू के पिता भूप सिंह रावत और दोनों भाई भक्तू और पथ्वा व मंगेतर भवानी सिंह शहीद हो जाते हैं। इसके बाद तीलू ने 15 वर्ष की किशोरावस्था में कत्यूर आक्रमणकारियों से बदला लेने के लिए तीलू की सहेलियों देवकी और बेलू के साथ गुरु शिबू पोखरियाल के नेतृत्व में अपनी सेना तैयार करती है। उसके बाद रणभूमि में सात साल तक लड़ते हुए कई गढ़ों को जीतकर आक्रमणकारियों के हौसले पस्त कर देती है। 1683 में 22 वर्ष की अवस्था में कलिंकाखाल गढ़ पर विजय प्राप्त करने के बाद वापस लौट रही तीलू की नयार नदी में नहाते समय धोखे से कत्यूर रामू रजवाड़ हत्या कर देता है। इस मौके पर आयोजन समिति के सदस्य उदयपाल सिंह रावत, रंजना रावत, अर्चना रावत, अनिल बिष्ट, संजय रावत व सुनील रावत आदि मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन गणेश खुगशाल ने किया।
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