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कालागढ़ में कई आवासीय और गैरआवासीय भवनों पर चली जेसीबी, किए ध्वस्त

Tue, 26 Jun 2018 10:40 PM IST
Updated Tue, 26 Jun 2018 10:40 PM IST
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कालागढ़ में कई आवासीय और गैरआवासीय भवनों पर चली जेसीबी, किए ध्वस्त
कालागढ़/कोटद्वार। एनजीटी और नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश पर पौड़ी जिला प्रशासन ने कालागढ़ में लगातार दूसरे दिन ध्वस्तीकरण की बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। मंगलवार को पुलिस और प्रशासन ने रामगंगा मार्केट की दुकानें, संडे मार्केट, बस अड्डे का टीन शेड और अभियंता अकादमी के हास्टल ध्वस्त किए। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई बुधवार को भी जारी रहेगी।
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साठ के दशक में अविभाजित उत्तर प्रदेश सरकार ने कालागढ़ में रामगंगा बांध परियोजना के लिए सिंचाई विभाग को जमीन दी थी। वर्ष 2013 में सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी ने परियोजना का निर्माण पूरा होने पर इसके रखरखाव की जरूरत की भूमि और भवनों के अलावा शेष जमीन वन विभाग को वापस करने के आदेश राज्य सरकार को दिए थे। तब से पौड़ी जिला प्रशासन, सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश और वन विभाग समेत सभी संबंधित विभागों के बीच कई दौर की वार्ता के बाद भी न तो अवशेष जमीन लौटाई गई और न ही यहां बने आवासीय और गैरआवासीय भवनों को ध्वस्त किया जा सका। हाल में एनजीटी की कड़ी फटकार के बाद हरकत में आए पौड़ी जिला प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ ध्वस्तीकरण की बड़ी कार्रवाई शुरू की है।
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कोटद्वार के एसडीएम राकेश तिवारी और लैंसडौन के एसडीएम कमलेश मेहता की अगुवाई में दूसरे दिन मंगलवार को रामगंगा मार्केट की दुकानें, संडे मार्केट, बस अड्डे का टीन शेड और अभियंता अकादमी के हास्टल को जेसीबी मशीन से ध्वस्त कर दिया गया। एसडीएम ने बताया कि दो दिवसीय कार्रवाई में 80 आवासीय और गैर आवासीय भवनों के साथ ही केंद्रीय कालोनी के रामगंगा मार्केट की 16 दुकानें ध्वस्त कर दी गई हैं। ध्वस्त आवासों और भवनों की भूमि के साथ ही खाली पड़ी तीन हेक्टेयर भूमि भी वन विभाग को सौंप दी गई है। 27 जून को इस मामले की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंप दी जाएगी। बताया कि 20 सितंबर तक कालागढ़ के उत्तरी क्षेत्र को पूरी तरह से खाली कर वन विभाग को सौंपा जाना है। ध्वस्तीकरण के लिए प्रशासन द्वारा भवनों की बिजली और पानी की आपूर्ति ठप कर दी गई थी, जिससे लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। भीषण गर्मी के बीच कालागढ़ की नई कालोनी और केंद्रीय कालोनी के लोगों ने सड़कों और घरों की छतों पर रात बिताई।
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