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गांव का अस्तित्व मिटा रही प्रदेश सरकार: डा. कपरवाण
Updated Tue, 24 Apr 2018 10:56 PM IST
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कोटद्वार। नगर निगम विरोध संघर्ष समिति की यहां हुई बैठक में समिति सदस्यों ने नगर निगम के विरोध में नई रणनीति पर चर्चा की। कहा कि गांवों के विकास के लिए स्मार्ट विलेज बनाने की जरूरत है, जबकि प्रदेश सरकार भाबर के 73 गांवों को जबरन नगर निगम में शामिल कर उनका अस्तित्व मिटा रही है।
मंगलवार को देवी मंदिर में आयोजित बैठक में समिति के अध्यक्ष डा. शक्तिशैल कपरवाण ने कहा कि लोकतांत्रिक आंदोलन मंच के माध्यम से नगर निगम का विरोध और अन्य मुद्दों को उठाया जाएगा। कहा कि 25 अप्रैल को हाईकोर्ट के निर्णय के बाद ही नगर निगम विरोध आंदोलन की नई रणनीति बनाई जाएगी। कपरवाण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वराज्य योजना का उद्घाटन कर रहे हैं, वहीं उत्तराखंड की भाजपा सरकार जबरन गांवों को नगर निगम में शामिल कर गांवों का अस्तित्व समाप्त करने में लगी है। समिति संयोजक प्रवेंद्र रावत ने कहा कि नगर निगम के विरोध के साथ-साथ कोटद्वार में नियमों के विरुद्ध हो रहे खनन, चिल्लरखाल-लालढांग मोटर मार्ग, मेडिकल कालेज, केंद्रीय विद्यालय निर्माण आदि मुद्दों पर भी जल्द ही आंदोलन करने की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
बैठक में समिति के महामंत्री गोविंद डंडरियाल, हरीश घिल्डियाल, गजेंद्र तिवारी, अनुसूया प्रसाद सेमवाल, राजाराम अंथवाल, विजय कंडारी, जगपाल सिंह बिष्ट, विजय ध्यानी व वीरेंद्र रावत आदि सम्मलित थे।
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मंगलवार को देवी मंदिर में आयोजित बैठक में समिति के अध्यक्ष डा. शक्तिशैल कपरवाण ने कहा कि लोकतांत्रिक आंदोलन मंच के माध्यम से नगर निगम का विरोध और अन्य मुद्दों को उठाया जाएगा। कहा कि 25 अप्रैल को हाईकोर्ट के निर्णय के बाद ही नगर निगम विरोध आंदोलन की नई रणनीति बनाई जाएगी। कपरवाण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वराज्य योजना का उद्घाटन कर रहे हैं, वहीं उत्तराखंड की भाजपा सरकार जबरन गांवों को नगर निगम में शामिल कर गांवों का अस्तित्व समाप्त करने में लगी है। समिति संयोजक प्रवेंद्र रावत ने कहा कि नगर निगम के विरोध के साथ-साथ कोटद्वार में नियमों के विरुद्ध हो रहे खनन, चिल्लरखाल-लालढांग मोटर मार्ग, मेडिकल कालेज, केंद्रीय विद्यालय निर्माण आदि मुद्दों पर भी जल्द ही आंदोलन करने की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
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बैठक में समिति के महामंत्री गोविंद डंडरियाल, हरीश घिल्डियाल, गजेंद्र तिवारी, अनुसूया प्रसाद सेमवाल, राजाराम अंथवाल, विजय कंडारी, जगपाल सिंह बिष्ट, विजय ध्यानी व वीरेंद्र रावत आदि सम्मलित थे।
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