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आंदोलनकारियों के लिए ठोस और स्पष्ट नीति बनाए सरकार
Updated Thu, 02 Nov 2017 10:50 PM IST
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कोटद्वार। उत्तराखंड राज्य निर्माण सेनानी मोर्चा का अपनी दो सूत्री मांगों के समर्थन में धरना-प्रदर्शन जारी रहा। उन्होंने क्रमिक उपवास जारी रखते हुए उनकी मांगें नहीं माने जाने पर आमरण अनशन की चेतावनी दी।
बृहस्पतिवार को आंदोलनकारी राकेश लखेड़ा के नेतृत्व मेें आयोजित धरने में राजकुमार गुप्ता, रामकुमार माहेश्वरी, शीला देवी, सुशीला वर्मा, हृदेश शर्मा और जीके बड़थ्वाल क्रमिक उपवास पर बैठे। इस अवसर पर आयोजित सभा में वक्ताओं ने राजनीतिक दलों पर आंदोलनकारियों की अनदेेखी का आरोप लगाया। कहा कि कांग्रेस शासन काल में उनके आमरण अनशन को मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में स्वास्थ्य मंत्री ने उनकी मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन देकर तुड़वाया था, लेकिन उस पर कार्य नहीं किया। भाजपा सरकार ने भी चुनाव से पहले सत्ता में आते ही उनकी मांगों पर कार्य करने का आश्वासन दिया था, लेकिन सरकार बनते ही वे आंदोलनकारियों को भूल गए। पिछली सरकार के दायित्वधारी भी आंदोलनकारियों के लिए स्पष्ट नीति नहीं बना पाए। अब वही लोग नेतागिरी करने के लिए आंदोलनकारियों की आवाज उठा रहे हैं। इसके कारण आंदोलनकारियों में रोष है। उन्होंने आंदोलनकारियों के लिए ठोस नीति बनाए जाने की मांग की।
इस अवसर पर मोर्चा अध्यक्ष महेंद्र सिंह रावत, गुलाब सिंह रावत, दीपक शर्मा, हरी सिंह रावत, कमल किशोर खंतवाल, गुलाब सिंह, बसंती रावत, रामेश्वरी देवी, मुकेश देवरानी, गंभीर सिंह नेगी, प्रेम सिंह, सूरी देवी, सरस्वती देवी, संजय गौड़, नवीन चमोली, सरस्वती देवी, अर्चना दुदपुड़ी, इंदू गौड़, राजेश्वरी रावत व भागीरथी रावत आदि मौजूद थे।
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बृहस्पतिवार को आंदोलनकारी राकेश लखेड़ा के नेतृत्व मेें आयोजित धरने में राजकुमार गुप्ता, रामकुमार माहेश्वरी, शीला देवी, सुशीला वर्मा, हृदेश शर्मा और जीके बड़थ्वाल क्रमिक उपवास पर बैठे। इस अवसर पर आयोजित सभा में वक्ताओं ने राजनीतिक दलों पर आंदोलनकारियों की अनदेेखी का आरोप लगाया। कहा कि कांग्रेस शासन काल में उनके आमरण अनशन को मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में स्वास्थ्य मंत्री ने उनकी मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन देकर तुड़वाया था, लेकिन उस पर कार्य नहीं किया। भाजपा सरकार ने भी चुनाव से पहले सत्ता में आते ही उनकी मांगों पर कार्य करने का आश्वासन दिया था, लेकिन सरकार बनते ही वे आंदोलनकारियों को भूल गए। पिछली सरकार के दायित्वधारी भी आंदोलनकारियों के लिए स्पष्ट नीति नहीं बना पाए। अब वही लोग नेतागिरी करने के लिए आंदोलनकारियों की आवाज उठा रहे हैं। इसके कारण आंदोलनकारियों में रोष है। उन्होंने आंदोलनकारियों के लिए ठोस नीति बनाए जाने की मांग की।
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इस अवसर पर मोर्चा अध्यक्ष महेंद्र सिंह रावत, गुलाब सिंह रावत, दीपक शर्मा, हरी सिंह रावत, कमल किशोर खंतवाल, गुलाब सिंह, बसंती रावत, रामेश्वरी देवी, मुकेश देवरानी, गंभीर सिंह नेगी, प्रेम सिंह, सूरी देवी, सरस्वती देवी, संजय गौड़, नवीन चमोली, सरस्वती देवी, अर्चना दुदपुड़ी, इंदू गौड़, राजेश्वरी रावत व भागीरथी रावत आदि मौजूद थे।
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