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राष्ट्रीय राजमार्ग पर भू-धंसाव दे रहा दुर्घटना को न्योता
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दुगड्डा। राष्ट्रीय राजमार्ग में चलने वाले वाहनों के लिए खतरा बना हुआ है। आमसौड़ के पास भू-धंसाव के चलते मार्ग पर वाहन खतरे में आवागमन कर रहे हैं, लेकिन संबंधित विभाग खतरे को लेकर लापरवाह बना हुआ है।
इन दिनों कांवड़ के चलते शासन ने बदरीनाथ-केदारनाथ यात्रा के लिए रूट वाया कोटद्वार कर दिया है। इसके कारण मार्ग पर वाहनों का दबाव बढ़ गया है। ऐसे में मार्ग पर घंसाव के कारण अनजान वाहन इसकी चपेट में आ सकते हैं। आमसौड़ के निकट खोह नदी के भू कटाव से राष्ट्रीय राजमार्ग का करीब 100 मीटर हिस्सा एक दशक से दरक रहा है। वर्तमान में मार्ग संकरा होने व भारी वाहनों के दबाव से मार्ग में दरार पड़ गई है, जिससे दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग में कोटद्वार दुगड्डा सतपुली के बीच अनेक स्थान डेंजर जोन हैं, जो कि मानसून काल में मूसलाधार बारिश से क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।
एनएच खंड के सहायक अभियंता आरके असवाल ने बताया कि एनएच में आमसौड़ के निकट भू-धंसाव से मार्ग संकरा हो गया है। इसके लिए पूर्व में स्वीकृत बजट से कार्य करने की वन विभाग ने अनुमति नहीं दी थी। नदी में निर्माण कार्य करने के लिए केवल मानव द्वारा कार्य करने की अनुमति मिली थी, जो कि संभव नहीं था। उक्त स्थान पर निर्माण कार्य के लिए वन मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा गया है।
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इन दिनों कांवड़ के चलते शासन ने बदरीनाथ-केदारनाथ यात्रा के लिए रूट वाया कोटद्वार कर दिया है। इसके कारण मार्ग पर वाहनों का दबाव बढ़ गया है। ऐसे में मार्ग पर घंसाव के कारण अनजान वाहन इसकी चपेट में आ सकते हैं। आमसौड़ के निकट खोह नदी के भू कटाव से राष्ट्रीय राजमार्ग का करीब 100 मीटर हिस्सा एक दशक से दरक रहा है। वर्तमान में मार्ग संकरा होने व भारी वाहनों के दबाव से मार्ग में दरार पड़ गई है, जिससे दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग में कोटद्वार दुगड्डा सतपुली के बीच अनेक स्थान डेंजर जोन हैं, जो कि मानसून काल में मूसलाधार बारिश से क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।
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एनएच खंड के सहायक अभियंता आरके असवाल ने बताया कि एनएच में आमसौड़ के निकट भू-धंसाव से मार्ग संकरा हो गया है। इसके लिए पूर्व में स्वीकृत बजट से कार्य करने की वन विभाग ने अनुमति नहीं दी थी। नदी में निर्माण कार्य करने के लिए केवल मानव द्वारा कार्य करने की अनुमति मिली थी, जो कि संभव नहीं था। उक्त स्थान पर निर्माण कार्य के लिए वन मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा गया है।
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