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मलबा पूर्वी नयार नदी में मलबा न डाले एनएच खंड: जल संस्थान
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बैजरो/कोटद्वार। राष्ट्रीय राजमार्ग पंचपुर के पास पुल निर्माण के लिए काटे जा रहे पहाड़ का मलबा पूर्वी नयार नदी में डालने के मामले का उत्तराखंड जल संस्थान बीरोंखाल ने संज्ञान लेते हुए एनएच धुमाकोट के अधिशासी अभियंता को पत्र भेजा है। पत्र में रोड कटिंग का कार्य कर रहे ठेकेदार को निर्देशित कर मलबा नदी में नहीं डालने को कहा गया है। जल संस्थान ने कहा कि इससे बीरोंखाल पंपिंग पेयजल योजना के प्रभावित होने की आशंका जताई है।
राष्ट्रीय राजमार्ग बुआखाल से काशीपुर के मध्य थलीसैंण से बीरोंखाल के बीच सात मोटर पुलों का निर्माण किया जा रहा है। इन पुलों के निर्माण के दौरान संबंधित ठेकेदार द्वारा मलबे को गंगा की सहायक पूर्वी नयार नदी में डाला जा रहा है। इस खबर को अमर उजाला ने चार जून के अंक में पूर्वी नयार नदी में डाल रहे मलबा, प्रवाह बाधित शीर्षक से प्रकाशित किया था। खबर छपने के बाद जल संस्थान बीरोंखाल ने इसका संज्ञान लेते हुए एनएच धुमाकोट के अधिशासी अभियंता को पत्र लिखकर नदी में डाले जा रहे मलबे पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने को कहा। कनिष्ठ अभियंता जल संस्थान सौरभ पांडे ने कहा कि रोड कटिंग का अत्यधिक मलबा डाले जाने से पूर्वी नयार नदी का पानी मटमैला हो गया है। इस नदी में जल संस्थान की बीरोंखाल पेयजल पंपिंग योजना है, जिससे आसपास के कई गांवों को पेयजल आपूर्ति होती है। कहा कि मलबे के कारण ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। साथ ही जल संस्थान के पंप के खराब होने की आशंका जताई है। कहा कि मलबा नदी में डालने से स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र भी प्रभावित हो रहा है। पत्र में निर्माण कार्य करा रहे संबंधित ठेकेदार को निर्देशित कर नदी में मलबा डालने पर रोक लगाने को कहा है।
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राष्ट्रीय राजमार्ग बुआखाल से काशीपुर के मध्य थलीसैंण से बीरोंखाल के बीच सात मोटर पुलों का निर्माण किया जा रहा है। इन पुलों के निर्माण के दौरान संबंधित ठेकेदार द्वारा मलबे को गंगा की सहायक पूर्वी नयार नदी में डाला जा रहा है। इस खबर को अमर उजाला ने चार जून के अंक में पूर्वी नयार नदी में डाल रहे मलबा, प्रवाह बाधित शीर्षक से प्रकाशित किया था। खबर छपने के बाद जल संस्थान बीरोंखाल ने इसका संज्ञान लेते हुए एनएच धुमाकोट के अधिशासी अभियंता को पत्र लिखकर नदी में डाले जा रहे मलबे पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने को कहा। कनिष्ठ अभियंता जल संस्थान सौरभ पांडे ने कहा कि रोड कटिंग का अत्यधिक मलबा डाले जाने से पूर्वी नयार नदी का पानी मटमैला हो गया है। इस नदी में जल संस्थान की बीरोंखाल पेयजल पंपिंग योजना है, जिससे आसपास के कई गांवों को पेयजल आपूर्ति होती है। कहा कि मलबे के कारण ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। साथ ही जल संस्थान के पंप के खराब होने की आशंका जताई है। कहा कि मलबा नदी में डालने से स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र भी प्रभावित हो रहा है। पत्र में निर्माण कार्य करा रहे संबंधित ठेकेदार को निर्देशित कर नदी में मलबा डालने पर रोक लगाने को कहा है।
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