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सुखरो और खोह नदी में रिवर ट्रेनिंग और चैनलाइजेशन का कार्य शुरू
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कोटद्वार। बाढ़ से कोटद्वार भाबर की आबादी को बचाने के लिए जिला प्रशासन ने खोह और सुखरो में रिवर ट्रेनिंग और चैनलाइजेशन का कार्य शुरू करा दिया है। खोह में चार और सुखरो नदी में एक पट्टा खुली बोली के माध्यम से आवंटित कर दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि चैनलाइजेशन का कार्य मशीनों के बिना संभव नहीं है, जिसके कारण नदी में जमा रिवर बैड मैटेरियल (आरबीएम) हटाने के लिए मशीनों के उपयोग की अनुमति प्रदान की गई है। अधिकारियों का मानना है कि चैनलाइजेशन से बाढ़ का खतरा काफी हद तक टल जाएगा।
दो साल से आपदा से जूझ रहे कोटद्वार भाबर में शासन और प्रशासन ने वर्ष 2018 में खोह और सुखरो नदियों में रिवर ट्रेनिंग और चैनलाइजेशन के नाम पर पट्टे जारी किए थे। करीब एक माह चले चैनलाइजेशन के काम के लिए जेसीबी और पोकलेन नदियों में उतारने का भारी विरोध हुआ था। जिसके चलते शासन को हस्तक्षेप कर मशीनों का उपयोग बंद करना पड़ा। मशीनों के उपयोग पर पाबंदी लगते ही पट्टे धारकों ने चैनलाइजेशन का कार्य बंद कर दिया था। तब पट्टे धारकों ने प्रशासन से कहा था कि नदियों में रिवर ट्रेनिंग और चैनलाइजेशन का काम मशीनों के उपयोग के बिना संभव नहीं है। सुखरो नदी में जहां मंगलवार से आरबीएम हटाने का काम शुरू कर दिया गया है, वहीं खोह नदी में पट्टेधारकों ने बुधवार से पोकलेन और जेसीबी मशीनें उतार दी है। प्रशासन की ओर से चैनलाइजेशन के कार्य के लिए 30 जून तक की अवधि दी गई है। गत एक जून को उच्चतम बोली के आधार पर आवंटित पट्टों पर कार्य चार दिन बाद शुरू हो सका। चार दिन पट्टेधारकों को टेंडर की रकम कोषागार में जमा कराने और नदी तक रास्ता बनाने में ही लग गया।
कहां कितने पट्टे आवंटित
1. खोह नदी में सिद्धबली पुल से नीचे 200 मीटर छोड़कर ग्रास्टनगंज निर्माणाधीन पुल से 200 मीटर ऊपर तक खसरा संख्या-46 क्षेत्रफल लगभग 400 मीटर लंबाई, 50 मीटर चौड़ाई और डेढ़ मीटर गहराई।
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2. खोह नदी में उत्तर प्रदेश की सीमा स्थित गूलर पुल से दो सौ मीटर छोड़कर ऊपर की ओर खसरा नंबर 9 क, क्षेत्रफल 280 मी. लंबाई, 30 मी. चौड़ाई और डेढ़ मीटर गहराई।
3. खोह नदी में ही गाड़ीघाट पुल से ऊपर और ग्रास्टनगंज निर्माणाधीन पुल से 200 मीटर नीचे की ओर, खसरा नंबर 25, क्षेत्रफल 300 मी. लंबाई-50 मीटर, गहराई डेढ़ मीटर ।
4. खोह नदी में गाड़ीघाट पुल से नीचे गूलर पुल तक, पुलों से दोनों ओर 200 मीटर का क्षेत्र छोड़कर, खसरा नंबर- 97 क, लंबाई-400 मीटर, चौड़ाई 60 मीटर और गहराई डेढ़ मीटर।
5. सुखरो नदी में सिमलचौड़ और बलभद्रपुर में 4.08 हेक्टेयर, खसरा नंबर 103, लंबाई-680 मीटर, चौड़ाई-60 मीटर और गहराई डेढ़ मीटर।
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दो साल से आपदा से जूझ रहे कोटद्वार भाबर में शासन और प्रशासन ने वर्ष 2018 में खोह और सुखरो नदियों में रिवर ट्रेनिंग और चैनलाइजेशन के नाम पर पट्टे जारी किए थे। करीब एक माह चले चैनलाइजेशन के काम के लिए जेसीबी और पोकलेन नदियों में उतारने का भारी विरोध हुआ था। जिसके चलते शासन को हस्तक्षेप कर मशीनों का उपयोग बंद करना पड़ा। मशीनों के उपयोग पर पाबंदी लगते ही पट्टे धारकों ने चैनलाइजेशन का कार्य बंद कर दिया था। तब पट्टे धारकों ने प्रशासन से कहा था कि नदियों में रिवर ट्रेनिंग और चैनलाइजेशन का काम मशीनों के उपयोग के बिना संभव नहीं है। सुखरो नदी में जहां मंगलवार से आरबीएम हटाने का काम शुरू कर दिया गया है, वहीं खोह नदी में पट्टेधारकों ने बुधवार से पोकलेन और जेसीबी मशीनें उतार दी है। प्रशासन की ओर से चैनलाइजेशन के कार्य के लिए 30 जून तक की अवधि दी गई है। गत एक जून को उच्चतम बोली के आधार पर आवंटित पट्टों पर कार्य चार दिन बाद शुरू हो सका। चार दिन पट्टेधारकों को टेंडर की रकम कोषागार में जमा कराने और नदी तक रास्ता बनाने में ही लग गया।
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कहां कितने पट्टे आवंटित
1. खोह नदी में सिद्धबली पुल से नीचे 200 मीटर छोड़कर ग्रास्टनगंज निर्माणाधीन पुल से 200 मीटर ऊपर तक खसरा संख्या-46 क्षेत्रफल लगभग 400 मीटर लंबाई, 50 मीटर चौड़ाई और डेढ़ मीटर गहराई।
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2. खोह नदी में उत्तर प्रदेश की सीमा स्थित गूलर पुल से दो सौ मीटर छोड़कर ऊपर की ओर खसरा नंबर 9 क, क्षेत्रफल 280 मी. लंबाई, 30 मी. चौड़ाई और डेढ़ मीटर गहराई।
3. खोह नदी में ही गाड़ीघाट पुल से ऊपर और ग्रास्टनगंज निर्माणाधीन पुल से 200 मीटर नीचे की ओर, खसरा नंबर 25, क्षेत्रफल 300 मी. लंबाई-50 मीटर, गहराई डेढ़ मीटर ।
4. खोह नदी में गाड़ीघाट पुल से नीचे गूलर पुल तक, पुलों से दोनों ओर 200 मीटर का क्षेत्र छोड़कर, खसरा नंबर- 97 क, लंबाई-400 मीटर, चौड़ाई 60 मीटर और गहराई डेढ़ मीटर।
5. सुखरो नदी में सिमलचौड़ और बलभद्रपुर में 4.08 हेक्टेयर, खसरा नंबर 103, लंबाई-680 मीटर, चौड़ाई-60 मीटर और गहराई डेढ़ मीटर।