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चुनावी घोषणा पत्र में नहीं थी नगर निगम बनाने की बात: डा. शक्तिशैल
Updated Fri, 27 Oct 2017 10:34 PM IST
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कोटद्वार। नगर निगम के विरोध में संघर्ष समिति की यहां व्यापार मंडल सभागार में बैठक हुई। इसके बाद पत्रकार वार्ता में अध्यक्ष डॉ. शक्तिशैल कपरवाण ने कहा कि कोटद्वार को नगर निगम बनाने की बात भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र में कहीं भी नहीं थी। प्रदेश सरकार ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए जबरन ग्रामीण क्षेत्र की जनता पर नगर निगम थोप दिया है। अब समिति शनिवार से ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंपर्क अभियान चलाएगी और इसके बाद विशाल महारैली का आयोजन किया जाएगा।
डॉ. कपरवाण ने कहा कि नगर निगम के विरोध में समिति प्रदेश सरकार के खिलाफ लोकतांत्रिक और न्यायिक लड़ाई लड़ेगी। सरकार जबरन ग्रामीण क्षेत्र की जनता पर नगर निगम थोपती है तो सरकार के विरुद्ध हाईकोर्ट में याचिका दायर की जाएगी। प्रधान संघ भी अलग से हाईकोर्ट में याचिका दायर करेगा। कहा कि शीघ्र ही ग्रामीणों के सहयोग से उग्र आंदोलन कर सरकार के अहंकार पर चोट की जाएगी। कहा कि चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वादों से ध्यान भटकाने के लिए सरकार ने नगर निगम का शिगूफा छेड़ा है। कहा कि कोटद्वार-भाबर में 80 प्रतिशत कृषि भूमि है, जबकि ऋषिकेश में एक इंच भी कृषि भूमि नहीं है। ऋषिकेश और कोटद्वार के हालात एकदम अलग हैं। कोटद्वार को नगर निगम बनाने के प्रस्ताव पर जल्दबाजी की गई है। कहा कि 17 वर्षों में उत्तराखंड में भाजपा और कांग्रेस ने शासन किया है, दोनों ने प्रदेश को बारी-बारी से जमकर लूटा है।
उन्होंने कहा कि आंदोलन को व्यापक बनाने के लिए नगर निगम विरोध संघर्ष समिति का गठन कर दिया गया है। आंदोलन के लिए रणनीति तैयार की जा रही है। इस मौके पर संघर्ष समिति के उपाध्यक्ष प्रवेंद्र रावत, राजाराम अण्थ्वाल, कोषाध्यक्ष कृष्णा बहुगुणा, मीडिया प्रभारी विजय ध्यानी, प्रवक्ता चंद्रेश लखेड़ा, संयुक्त सचिव संजय पंथवाल, संगठन मंत्री वीरेंद्र थलेड़ी, युवा प्रकोष्ठ संगठन मंत्री सूरज प्रसाद कांती, विजयेश्वरी झिंकवाण, नंदन सिंह रावत आदि मौजूद थे।
डॉ. कपरवाण ने कहा कि नगर निगम के विरोध में समिति प्रदेश सरकार के खिलाफ लोकतांत्रिक और न्यायिक लड़ाई लड़ेगी। सरकार जबरन ग्रामीण क्षेत्र की जनता पर नगर निगम थोपती है तो सरकार के विरुद्ध हाईकोर्ट में याचिका दायर की जाएगी। प्रधान संघ भी अलग से हाईकोर्ट में याचिका दायर करेगा। कहा कि शीघ्र ही ग्रामीणों के सहयोग से उग्र आंदोलन कर सरकार के अहंकार पर चोट की जाएगी। कहा कि चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वादों से ध्यान भटकाने के लिए सरकार ने नगर निगम का शिगूफा छेड़ा है। कहा कि कोटद्वार-भाबर में 80 प्रतिशत कृषि भूमि है, जबकि ऋषिकेश में एक इंच भी कृषि भूमि नहीं है। ऋषिकेश और कोटद्वार के हालात एकदम अलग हैं। कोटद्वार को नगर निगम बनाने के प्रस्ताव पर जल्दबाजी की गई है। कहा कि 17 वर्षों में उत्तराखंड में भाजपा और कांग्रेस ने शासन किया है, दोनों ने प्रदेश को बारी-बारी से जमकर लूटा है।
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उन्होंने कहा कि आंदोलन को व्यापक बनाने के लिए नगर निगम विरोध संघर्ष समिति का गठन कर दिया गया है। आंदोलन के लिए रणनीति तैयार की जा रही है। इस मौके पर संघर्ष समिति के उपाध्यक्ष प्रवेंद्र रावत, राजाराम अण्थ्वाल, कोषाध्यक्ष कृष्णा बहुगुणा, मीडिया प्रभारी विजय ध्यानी, प्रवक्ता चंद्रेश लखेड़ा, संयुक्त सचिव संजय पंथवाल, संगठन मंत्री वीरेंद्र थलेड़ी, युवा प्रकोष्ठ संगठन मंत्री सूरज प्रसाद कांती, विजयेश्वरी झिंकवाण, नंदन सिंह रावत आदि मौजूद थे।
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