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एसडीएम पौड़ी मीटिंग में, तहसीलदार और नायब तहसीलदार हैं नहीं
Updated Mon, 18 Jun 2018 10:48 PM IST
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कोटद्वार। तीन दिन की छुट्टी के बाद सोमवार को अपने काम के सिलसिले में तहसील पहुंचे लोगों को एसडीएम दफ्तर में भी ताला लटका होने से बैरंग लौटना पड़ा। एसडीएम पौड़ी में जिलास्तरीय आपदा प्रबंधन की बैठक में शामिल होने गए थे। एक भी अधिकारी के नहीं मिलने से लोगों में शासन और प्रशासन के प्रति नाराजगी दिखी।
सोमवार को उपजिलाधिकारी राकेश चंद्र तिवारी के पौड़ी में आपदा प्रबंधन की बैठक में जाने से कोटद्वार तहसील अधिकारी विहीन रही, जिससे जरूरी प्रमाणपत्र बनवाने और भू-राजस्व से संबंधित अन्य कार्यों के लिए पहुंचे लोगों के चेहरों पर मायूसी दिखी। कोटद्वार तहसील में डेढ़ साल से नायब तहसीलदार के दोनों पद रिक्त चल रहे हैं। विगत 31 मई को तहसीलदार सीएस रावत के सेवानिवृत्त होने के बाद से यह पद भी खाली पड़ा है। एसडीएम राकेश चंद्र तिवारी का भी यहां से बागेश्वर तबादला हो रखा है। उन्हें प्रतिस्थानी के आने का इंतजार है।
सोमवार को तीन दिन की छुट्टी के जब लोग तहसील मुख्यालय पहुंचे तो वहां उन्हें ताले लटके मिले। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष किशन सिंह पंवार, पूर्व अध्यक्ष अजय पंत, प्रमोद राणा, अशोक पुंडीर का कहना है कि कोटद्वार तहसील को 18 दिन से एसडीएम चला रहे हैं। नौबत यह आ गई कि तहसीलदार का कार्यभार कानूनगो के पास आ गया है। नायब तहसीलदार के पद पहले से ही खाली है। मानपुर निवासी सतेश्वरी देवी, सिताबपुर निवासी राम सिंह, श्यामा प्रसाद, धर्म सिंह नेगी ने बताया कि वे अपने कार्य से उपजिलाधिकारी के पास आए थे, लेकिन उनके पौड़ी मीटिंग में जाने के कारण वे नहीं मिले। बिशनपुर निवासी पूर्व सैनिक एसएस रावत ने कहा कि कोटद्वार तहसील जनपद की सबसे बड़ी तहसील है, लेकिन यहां अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी के चलते लोगों के राजस्व संबंधित कार्य नहीं हो पा रहे हैं।
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सोमवार को उपजिलाधिकारी राकेश चंद्र तिवारी के पौड़ी में आपदा प्रबंधन की बैठक में जाने से कोटद्वार तहसील अधिकारी विहीन रही, जिससे जरूरी प्रमाणपत्र बनवाने और भू-राजस्व से संबंधित अन्य कार्यों के लिए पहुंचे लोगों के चेहरों पर मायूसी दिखी। कोटद्वार तहसील में डेढ़ साल से नायब तहसीलदार के दोनों पद रिक्त चल रहे हैं। विगत 31 मई को तहसीलदार सीएस रावत के सेवानिवृत्त होने के बाद से यह पद भी खाली पड़ा है। एसडीएम राकेश चंद्र तिवारी का भी यहां से बागेश्वर तबादला हो रखा है। उन्हें प्रतिस्थानी के आने का इंतजार है।
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सोमवार को तीन दिन की छुट्टी के जब लोग तहसील मुख्यालय पहुंचे तो वहां उन्हें ताले लटके मिले। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष किशन सिंह पंवार, पूर्व अध्यक्ष अजय पंत, प्रमोद राणा, अशोक पुंडीर का कहना है कि कोटद्वार तहसील को 18 दिन से एसडीएम चला रहे हैं। नौबत यह आ गई कि तहसीलदार का कार्यभार कानूनगो के पास आ गया है। नायब तहसीलदार के पद पहले से ही खाली है। मानपुर निवासी सतेश्वरी देवी, सिताबपुर निवासी राम सिंह, श्यामा प्रसाद, धर्म सिंह नेगी ने बताया कि वे अपने कार्य से उपजिलाधिकारी के पास आए थे, लेकिन उनके पौड़ी मीटिंग में जाने के कारण वे नहीं मिले। बिशनपुर निवासी पूर्व सैनिक एसएस रावत ने कहा कि कोटद्वार तहसील जनपद की सबसे बड़ी तहसील है, लेकिन यहां अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी के चलते लोगों के राजस्व संबंधित कार्य नहीं हो पा रहे हैं।
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