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तेलीस्रोत में भी खनन का पट्टा आवंटित, गरजने लगी जेसीबी
Updated Fri, 27 Apr 2018 10:56 PM IST
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किशनपुर (कोटद्वार)। सुखरौ और खोह नदी की तर्ज पर अब शासन, प्रशासन ने भाबर के तेलीस्रोत बरसाती नाले में भी चैनलाइजेशन के नाम पर खनन का पट्टा आवंटित कर दिया है। शुक्रवार से इस बरसाती गदेरे में जेसीबी गरजने लगी है। बताया जा रहा है कि यहां का मलबा स्टोन क्रशर में भेजा जाएगा। तेलीस्रोत जैसे बरसाती गदेरे में खनन का पट्टा आवंटित होने से क्षेत्रवासी हैरान हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मौजूदा शासन और प्रशासन सत्तारूढ़ दल के खनन कारोबारियों के दबाव में काम कर रहा है।
कोटद्वार की खोह और सुखरौ नदी में पोकलैंड और जेसीबी मशीनों से हो रहे खनन को लेकर क्षेत्रवासी आंदोलन की राह पर हैं। खोह में कई दिनों तक नोकझोंक के बाद आंदोलन ठंडा पड़ा ही था कि प्रशासन की ओर से भाबर की तेलीस्रोत गदेरे में खनन का पट्टा आवंटित होने से ग्रामीण परेशान हो गए हैं। ग्रामीणों को यह डर सताने लगा है कि तेलीस्रोत गदेरे में जेसीबी से खनन होने के भयंकर परिणाम उन्हें बरसात में झेलने पड़ सकते हैं। पट्टा आवंटन मनीष शर्मा के नाम पर किया गया है। एसडीएम राकेश तिवारी ने बताया कि रिवर ट्रेनिंग नीति के तहत गदेरे के चैनलाइजेशन के लिए पट्टा जारी किया गया है। गदेरे के दोनों किनारों पर पच्चीस फीसदी क्षेत्रफल को छोड़कर मलबा हटाने का कार्य किया जाएगा। गदेरे में खुदाई का मानक केवल एक मीटर गहरा रखा गया है।
ग्रामीण नवीन शर्मा, विनोद नेगी, महेंद्र सिंह, श्याम सिंह, राम सिंह व मुन्नी देवी का कहना है कि खननकारियों की ओर से यदि जरा भी मनमानी और मानकों की अनदेखी की गई तो पूरे क्षेत्र के लोग एकजुट होकर इसका विरोध करेंगे।
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कोटद्वार की खोह और सुखरौ नदी में पोकलैंड और जेसीबी मशीनों से हो रहे खनन को लेकर क्षेत्रवासी आंदोलन की राह पर हैं। खोह में कई दिनों तक नोकझोंक के बाद आंदोलन ठंडा पड़ा ही था कि प्रशासन की ओर से भाबर की तेलीस्रोत गदेरे में खनन का पट्टा आवंटित होने से ग्रामीण परेशान हो गए हैं। ग्रामीणों को यह डर सताने लगा है कि तेलीस्रोत गदेरे में जेसीबी से खनन होने के भयंकर परिणाम उन्हें बरसात में झेलने पड़ सकते हैं। पट्टा आवंटन मनीष शर्मा के नाम पर किया गया है। एसडीएम राकेश तिवारी ने बताया कि रिवर ट्रेनिंग नीति के तहत गदेरे के चैनलाइजेशन के लिए पट्टा जारी किया गया है। गदेरे के दोनों किनारों पर पच्चीस फीसदी क्षेत्रफल को छोड़कर मलबा हटाने का कार्य किया जाएगा। गदेरे में खुदाई का मानक केवल एक मीटर गहरा रखा गया है।
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ग्रामीण नवीन शर्मा, विनोद नेगी, महेंद्र सिंह, श्याम सिंह, राम सिंह व मुन्नी देवी का कहना है कि खननकारियों की ओर से यदि जरा भी मनमानी और मानकों की अनदेखी की गई तो पूरे क्षेत्र के लोग एकजुट होकर इसका विरोध करेंगे।
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