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घराट-मुंडला मार्ग निर्माण का 11 साल से कर रहे इंतजार
Updated Wed, 13 Sep 2017 10:40 PM IST
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कोटद्वार। उत्तराखंड राज्य निर्माण के 17 साल बाद भी घाड़ क्षेत्र के दस गांवों को यातायात सुविधा नहीं मिल सकी है। क्षेत्र की जनता की मांग पर वर्ष 2005 में एनडी तिवारी सरकार ने लालपुर स्थित घराट से मुंडला के लिए दस किमी सड़क स्वीकृत की थी, लेकिन सड़क जटिल वन कानूनों के पेच में फंस गई। हाल यह है कि इन गांवों के लोगों को कई किमी के फेर में कोटद्वार-रामड़ी-पुलिंडा मार्ग से आवाजाही करनी पड़ रही है, जिसमें उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है।
पुराने हरिद्वार मार्ग पर स्थित लालपुर घराट से इन गांवों की पैदल दूरी मात्र छह किमी पड़ती है। लोग आज भी इसी पैदल मार्ग का उपयोग रोजमर्रा के कामों के लिए करते हैं। पैदल न चल पाने वाले लोगों को रामणी-पुलिंडा मार्ग की 21 किमी की दूरी तय करके कोटद्वार पहुंचना पड़ता है। उपजाऊ भूमि होने के कारण इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर साग-सब्जी, फल और खाद्यान्न उत्पादन होता है, लेकिन सीधी सड़क सुविधा न होने के कारण ग्रामीणों को अपने उत्पाद कोटद्वार बाजार तक पहुंचाने में दिक्कत होती है। सड़क व मूलभूत सुविधाओं के अभाव में बढ़ते पलायन के कारण इस इलाके के खेत बंजर व गांव वीरान होते जा रहे है।
स्व. सरोजनी देवी लोक विकास समिति के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह नेगी, उपाध्यक्ष सुरमान सिंह, प्रचार मंत्री गजे सिंह का कहना है कि वर्ष 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने घराट-मुंडला मोटर मार्ग दस किमी निर्माण के लिए करीब 1.40 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे। उक्त धनराशि लोनिवि दुगड्डा के पास पड़ी है। वर्ष 2009 में लोनिवि राजस्व विभाग व वन विभाग द्वारा 8.10 हेक्टेयर वन भूमि का संयुक्त सर्वे भी किया गया, लेकिन इसके बाद आगे बात नहीं बढ़ी। सरकार द्वारा स्वीकृत सड़क की फाइल धूल फांक रही है।
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कोट
उक्त सड़क वन्यजीव बहुल क्षेत्र से प्रस्तावित की गई है। उक्त इलाका ऐलीफेंट कॉरीडोर होने के कारण उत्तराखंड वाइल्ड लाइफ बोर्ड की मंजूरी पर अटका है। मंजूरी मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-मयंक शेखर झा, डीएफओ लैंसडौन वन प्रभाग कोटद्वार
पुराने हरिद्वार मार्ग पर स्थित लालपुर घराट से इन गांवों की पैदल दूरी मात्र छह किमी पड़ती है। लोग आज भी इसी पैदल मार्ग का उपयोग रोजमर्रा के कामों के लिए करते हैं। पैदल न चल पाने वाले लोगों को रामणी-पुलिंडा मार्ग की 21 किमी की दूरी तय करके कोटद्वार पहुंचना पड़ता है। उपजाऊ भूमि होने के कारण इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर साग-सब्जी, फल और खाद्यान्न उत्पादन होता है, लेकिन सीधी सड़क सुविधा न होने के कारण ग्रामीणों को अपने उत्पाद कोटद्वार बाजार तक पहुंचाने में दिक्कत होती है। सड़क व मूलभूत सुविधाओं के अभाव में बढ़ते पलायन के कारण इस इलाके के खेत बंजर व गांव वीरान होते जा रहे है।
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स्व. सरोजनी देवी लोक विकास समिति के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह नेगी, उपाध्यक्ष सुरमान सिंह, प्रचार मंत्री गजे सिंह का कहना है कि वर्ष 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने घराट-मुंडला मोटर मार्ग दस किमी निर्माण के लिए करीब 1.40 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे। उक्त धनराशि लोनिवि दुगड्डा के पास पड़ी है। वर्ष 2009 में लोनिवि राजस्व विभाग व वन विभाग द्वारा 8.10 हेक्टेयर वन भूमि का संयुक्त सर्वे भी किया गया, लेकिन इसके बाद आगे बात नहीं बढ़ी। सरकार द्वारा स्वीकृत सड़क की फाइल धूल फांक रही है।
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उक्त सड़क वन्यजीव बहुल क्षेत्र से प्रस्तावित की गई है। उक्त इलाका ऐलीफेंट कॉरीडोर होने के कारण उत्तराखंड वाइल्ड लाइफ बोर्ड की मंजूरी पर अटका है। मंजूरी मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-मयंक शेखर झा, डीएफओ लैंसडौन वन प्रभाग कोटद्वार