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देश के लिए दौड़ना था, पासपोर्ट के लिए काट रही चक्कर
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कोटद्वार। गांव की सड़क पर दौड़ का अभ्यास कर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने वाली मेरूड़ा निवासी अंकिता ध्यानी का लक्ष्य विदेशी धरती पर देश का नाम रोशन करने का है, लेकिन सरकारी सिस्टम की सुस्त कार्यप्रणाली उसके सपनों को साकार करने के बजाय उन पर पानी फेर रही है। अंकिता का चयन आगामी 15 से 17 मार्च तक हांगकांग में आयोजित होने वाले एशियन एथलेटिक चैंपियनशिप के लिए हुआ है। हांगकांग जाने के लिए उसे पासपोर्ट की जरूरत है, जिसके लिए वह सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रही है, लेकिन उसे पासपोर्ट नहीं मिल पा रहा है।
रिखणीखाल ब्लॉक की सीमा से सटे जहरीखाल ब्लॉक के मेरूड़ा गांव में शिक्षा के नाम पर महज एक प्राथमिक स्कूल मौजूद है। खेलने के नाम पर स्कूल का छोटा सा ऐसा खेल मैदान है, जहां बीच में विद्युत पोल है। इन विषम परिस्थितियों के बीच स्वयं की पहचान बनाने का मंसूबा लेकर मेरूड़ा निवासी महिमानंद ध्यानी व लक्ष्मी देवी की पुत्री अंकिता अपने प्रयासों में जुट गई। वक्त के साथ अंकिता की मेहनत रंग लाने लगी और मात्र 16 वर्ष की आयु में आज अंकिता राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने में कामयाब हुई है। वर्तमान में रुद्रप्रयाग जनपद के अगस्त्यमुनि स्थित बालिका छात्रावास में 12वीं कक्षा में अध्ययनरत अंकिता अपनी कोच महेशी आर्य के दिशा-निर्देशन में लंबी दौड़ के गुर सीख देश-विदेश में प्रदेश का नाम रोशन करने की तैयारियों में जुटी हुई है। अंकिता के पिता आंशिक दिव्यांग हैं और मां गांव के विद्यालय में भोजन माता। विपरीत परिस्थितियों में भी अपने हौसले बुलंद रखते वह नए मुकाम की ओर अग्रसर है।
दो दिन पहले ही मुझे हांगकांग में आयोजित एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए आमंत्रण की सूचना मिली है। अब पासपोर्ट बनाने के लिए चक्कर काट रही हूं।
-अंकिता ध्यानी, नेशनल एथलेटिक्स चैंपियन
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रिखणीखाल ब्लॉक की सीमा से सटे जहरीखाल ब्लॉक के मेरूड़ा गांव में शिक्षा के नाम पर महज एक प्राथमिक स्कूल मौजूद है। खेलने के नाम पर स्कूल का छोटा सा ऐसा खेल मैदान है, जहां बीच में विद्युत पोल है। इन विषम परिस्थितियों के बीच स्वयं की पहचान बनाने का मंसूबा लेकर मेरूड़ा निवासी महिमानंद ध्यानी व लक्ष्मी देवी की पुत्री अंकिता अपने प्रयासों में जुट गई। वक्त के साथ अंकिता की मेहनत रंग लाने लगी और मात्र 16 वर्ष की आयु में आज अंकिता राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने में कामयाब हुई है। वर्तमान में रुद्रप्रयाग जनपद के अगस्त्यमुनि स्थित बालिका छात्रावास में 12वीं कक्षा में अध्ययनरत अंकिता अपनी कोच महेशी आर्य के दिशा-निर्देशन में लंबी दौड़ के गुर सीख देश-विदेश में प्रदेश का नाम रोशन करने की तैयारियों में जुटी हुई है। अंकिता के पिता आंशिक दिव्यांग हैं और मां गांव के विद्यालय में भोजन माता। विपरीत परिस्थितियों में भी अपने हौसले बुलंद रखते वह नए मुकाम की ओर अग्रसर है।
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दो दिन पहले ही मुझे हांगकांग में आयोजित एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए आमंत्रण की सूचना मिली है। अब पासपोर्ट बनाने के लिए चक्कर काट रही हूं।
-अंकिता ध्यानी, नेशनल एथलेटिक्स चैंपियन