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लोगों ने की जैविक उत्पादों की खरीददारी
Updated Mon, 10 Dec 2018 10:16 PM IST
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कोटद्वार। भूमि संरक्षण वन प्रभाग लैंसडौन की जायका परियोजना के तहत जैविक कृषि को बढ़ावा देने के लिए कोटद्वार सिमलचौड़ के हॉट बाजार में जैविक उत्पादों का स्टाल लगाया गया। इसमें लोगों ने जैविक उत्पादों की खूब खरीदारी की।
जायका परियोजना के मार्केटिंग स्पेशलिस्ट नवीन प्रताप सिंह ने बताया कि जायका परियोजना के अंतर्गत दो पंजीकृत स्वायत्त सहकारिताओं कण्वघाटी (जायका) स्वायत्त सहकारिता, एवं मालन एकता (जायका) स्वायत्त सहकारिता पौखाल के अंतर्गत ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित स्वयं सहायता समूहों के परंपरागत जैविक उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए कोटद्वार सिमलचौड़ के हाट बाजार में जैविक उत्पादों के स्टाल लगाए गए। स्टाल में विभिन्न गांवों से एकत्रित ग्रेडिंग व पैकेजिंग युक्त जैविक उत्पाद शामिल रहे। लोगों ने जैविक उत्पादों उड़द, गहथ, भट्ट, मंडुआ, जख्या, चौलाई, भांग बीज, मशरूम व हर्बल धूप की खूब खरीदारी की। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम का क्रियान्वयन हिमोत्थान संस्था और जायका परियोजना की ओर से किया जा रहा है। कहा कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों से उत्पादित परंपरागत जैविक उत्पादों को बाजार से जोड़कर ग्रामीणों के लिए आजीविका जुटाना है, जिससे स्वयं सहायता समूह के सदस्यों की आजीविका में सुधार लाया जा सके। इस अवसर ग्रामीण आजीविका मिशन के बीएमएस शैलेश रावत, बीर सिंह, मीनाक्षी बिष्ट व कुसुमलता देवी आदि मौजूद रहे।
-फोटो
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जायका परियोजना के मार्केटिंग स्पेशलिस्ट नवीन प्रताप सिंह ने बताया कि जायका परियोजना के अंतर्गत दो पंजीकृत स्वायत्त सहकारिताओं कण्वघाटी (जायका) स्वायत्त सहकारिता, एवं मालन एकता (जायका) स्वायत्त सहकारिता पौखाल के अंतर्गत ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित स्वयं सहायता समूहों के परंपरागत जैविक उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए कोटद्वार सिमलचौड़ के हाट बाजार में जैविक उत्पादों के स्टाल लगाए गए। स्टाल में विभिन्न गांवों से एकत्रित ग्रेडिंग व पैकेजिंग युक्त जैविक उत्पाद शामिल रहे। लोगों ने जैविक उत्पादों उड़द, गहथ, भट्ट, मंडुआ, जख्या, चौलाई, भांग बीज, मशरूम व हर्बल धूप की खूब खरीदारी की। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम का क्रियान्वयन हिमोत्थान संस्था और जायका परियोजना की ओर से किया जा रहा है। कहा कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों से उत्पादित परंपरागत जैविक उत्पादों को बाजार से जोड़कर ग्रामीणों के लिए आजीविका जुटाना है, जिससे स्वयं सहायता समूह के सदस्यों की आजीविका में सुधार लाया जा सके। इस अवसर ग्रामीण आजीविका मिशन के बीएमएस शैलेश रावत, बीर सिंह, मीनाक्षी बिष्ट व कुसुमलता देवी आदि मौजूद रहे।
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