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नो वर्क नो पे का फैसला लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन
Updated Thu, 29 Nov 2018 09:51 PM IST
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कोटद्वार। राजकीय शिक्षक संघ के पदाधिकारियों की यहां हुई बैठक में कैबिनेट के नो वर्क नो पे संबंधी फैसले पर गहरी नाराजगी जताई गई। वक्ताओं ने कैबिनेट के इस फैसले को लोकतांत्रिक मूल्यों और अधिकारों का हनन बताया। कहा कि सरकार को अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के साथ ही शिक्षक कर्मचारियों की जायज मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार करना चाहिए।
बुधवार देर शाम यहां जीआईसी कोटद्वार में आयोजित बैठक में वक्ताओं ने सरकार के नो वर्क नो पे के निर्णय को अव्यावहारिक और गलत बताया। उन्होंने कहा कि संविधान और सेवा नियमावली में शिक्षकों और कर्मचारियों को अपनी बात रखने का अधिकार प्रदत्त है, लेकिन सरकार नो वर्क नो पे लागू कर उनसे उनका अधिकार छीनने की कोशिश कर रही है। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक कर्मचारी संगठन हड़ताल जैसा कठोर कदम खुशी से नहीं, बल्कि मजबूरी में उठाते हैं। कहा कि राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों और प्रधानाचार्यों के पद रिक्त होने से शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट आ रही है। प्रतिवर्ष रिक्त पड़े पदों को पदोन्नति से भरा जाना चाहिए। स्थानांतरण प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखते हुए वर्षों से दुर्गम में सेवाएं दे रहे शिक्षकों को सुगम में आने का मौका प्रदान किया जाना चाहिए।
बैठक में जिला महामंत्री मनमोहन सिंह रावत, अव्वल सिंह रावत, आशीष खर्कवाल, डबल सिंह रावत, राजेंद्र कुमार भंडारी, पंकज ध्यानी, रवींद्र रावत, रतन बिष्ट, कुलदीप नेगी, परितोष रावत, बिजेंद्र बिष्ट, सुमनलता रावत व बलवीर सिंह नेगी आदि ने विचार रखे।
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बुधवार देर शाम यहां जीआईसी कोटद्वार में आयोजित बैठक में वक्ताओं ने सरकार के नो वर्क नो पे के निर्णय को अव्यावहारिक और गलत बताया। उन्होंने कहा कि संविधान और सेवा नियमावली में शिक्षकों और कर्मचारियों को अपनी बात रखने का अधिकार प्रदत्त है, लेकिन सरकार नो वर्क नो पे लागू कर उनसे उनका अधिकार छीनने की कोशिश कर रही है। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक कर्मचारी संगठन हड़ताल जैसा कठोर कदम खुशी से नहीं, बल्कि मजबूरी में उठाते हैं। कहा कि राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों और प्रधानाचार्यों के पद रिक्त होने से शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट आ रही है। प्रतिवर्ष रिक्त पड़े पदों को पदोन्नति से भरा जाना चाहिए। स्थानांतरण प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखते हुए वर्षों से दुर्गम में सेवाएं दे रहे शिक्षकों को सुगम में आने का मौका प्रदान किया जाना चाहिए।
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बैठक में जिला महामंत्री मनमोहन सिंह रावत, अव्वल सिंह रावत, आशीष खर्कवाल, डबल सिंह रावत, राजेंद्र कुमार भंडारी, पंकज ध्यानी, रवींद्र रावत, रतन बिष्ट, कुलदीप नेगी, परितोष रावत, बिजेंद्र बिष्ट, सुमनलता रावत व बलवीर सिंह नेगी आदि ने विचार रखे।
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