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बरसाती नाला खोलने को मवाकोट के ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन
Updated Mon, 27 Aug 2018 11:29 PM IST
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कोटद्वार। बीते शनिवार की सुबह आई आपदा के तीन दिन बाद भी नगर निगम और तहसील प्रशासन की ओर से गांव की सुध न लेने से भड़के मवाकोट के ग्रामीणों ने यहां तहसील में प्रदर्शन किया। आक्रोशित ग्रामीणों ने मवाकोट क्षेत्र में पुराना हरिद्वार मार्ग पर बरसाती नाले को खोलने और जगदेव मंदिर की सुरक्षा दीवार बनाने की मांग की। ग्रामीणों ने प्रदर्शन के बाद उपजिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है।
सोमवार को भाबर क्षेत्र के मवाकोट के ग्रामीण तहसील पहुंचे। यहां उन्होंने मवाकोट और कोठला क्षेत्र में मलबे से पटे निकासी नालों को खोलने की मांग के लिए प्रदर्शन किया। लोगों ने कहा कि मवाकोट गेंद मेले के समीप मवाकोट-कण्वाश्रम मार्ग पर बने कॉजवे से होकर कोठला गांव में सिंचाई विभाग की नहर में निकासी की जाती थी, जो गत वर्ष तीन और चार अगस्त को आई आपदा के बाद से मलबे से पटा है। ग्रामीणों का आरोप है कि निकासी नहीं खोले जाने से शनिवार को आई आपदा के दौरान गेंद मेला मैदान और जल संस्थान के ट्यूबवेल और ओवर हैडटैंक के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है। साथ ही बाढ़ का पानी गांव में घुसने से ग्रामीणों के आवासीय भवनों और काश्तकारी भूमि पर खतरा बन गया है। ग्रामीणों की सारी फसल बर्बाद हो गई है। लोगों का कहना है कि इस संबंध में स्थानीय विभागों के अधिकारियों के साथ ही मुख्यमंत्री तक लिखित शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ज्ञापन सौंपने वालों में गेंद मेला एवं क्षेत्रीय विकास समिति मवाकोट के उपाध्यक्ष भवानी दत्त लखेड़ा, शशिकांत जोशी, राजेश नेगी, इंद्रमणि जोशी, सोहन सिंह, मना देवी, गौरव, सुशीला रावत, रोजी नेगी, दमयंती देवी, देवेंद्र सिंह, दीपू डबराल, नीरज नैथानी, रविंद्र, बालम नेगी, कमला देवी, कलावती देवी, सुलोचना देवी, भारत सिंह, बिशन सिंह रावत व सुशील कुमार आदि शामिल रहे।
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सोमवार को भाबर क्षेत्र के मवाकोट के ग्रामीण तहसील पहुंचे। यहां उन्होंने मवाकोट और कोठला क्षेत्र में मलबे से पटे निकासी नालों को खोलने की मांग के लिए प्रदर्शन किया। लोगों ने कहा कि मवाकोट गेंद मेले के समीप मवाकोट-कण्वाश्रम मार्ग पर बने कॉजवे से होकर कोठला गांव में सिंचाई विभाग की नहर में निकासी की जाती थी, जो गत वर्ष तीन और चार अगस्त को आई आपदा के बाद से मलबे से पटा है। ग्रामीणों का आरोप है कि निकासी नहीं खोले जाने से शनिवार को आई आपदा के दौरान गेंद मेला मैदान और जल संस्थान के ट्यूबवेल और ओवर हैडटैंक के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है। साथ ही बाढ़ का पानी गांव में घुसने से ग्रामीणों के आवासीय भवनों और काश्तकारी भूमि पर खतरा बन गया है। ग्रामीणों की सारी फसल बर्बाद हो गई है। लोगों का कहना है कि इस संबंध में स्थानीय विभागों के अधिकारियों के साथ ही मुख्यमंत्री तक लिखित शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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ज्ञापन सौंपने वालों में गेंद मेला एवं क्षेत्रीय विकास समिति मवाकोट के उपाध्यक्ष भवानी दत्त लखेड़ा, शशिकांत जोशी, राजेश नेगी, इंद्रमणि जोशी, सोहन सिंह, मना देवी, गौरव, सुशीला रावत, रोजी नेगी, दमयंती देवी, देवेंद्र सिंह, दीपू डबराल, नीरज नैथानी, रविंद्र, बालम नेगी, कमला देवी, कलावती देवी, सुलोचना देवी, भारत सिंह, बिशन सिंह रावत व सुशील कुमार आदि शामिल रहे।
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