फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Kotdwar News ›   सी हैरियर 602 युद्ध विमान लैंसडौन को किया समर्पित

सी हैरियर 602 युद्ध विमान लैंसडौन को किया समर्पित

Wed, 02 May 2018 10:52 PM IST
Updated Wed, 02 May 2018 10:52 PM IST
विज्ञापन
सी हैरियर 602 युद्ध विमान लैंसडौन को किया समर्पित
सी हैरियर 602 युद्ध विमान लैंसडौन को समर्पित
विज्ञापन

नौसेना अध्यक्ष एडमिरल सुनील लांबा ने मैनवारिंग गार्डन में स्थापित किया बमवर्षक विमान
उप थलसेनाध्यक्ष ले. जनरल शरतचंद्र भी रहे कार्यक्रम में मौजूद
अमर उजाला ब्यूरो
लैंसडौन। बालकन युद्ध एवं फाकलैंड संघर्ष में अपनी युद्ध क्षमता का कौशल दिखाने वाले सी हैरियर युद्ध बम वर्षक विमान को नौसेना अध्यक्ष एडमिरल सुनील लांबा ने बुधवार को लैंसडौन को समर्पित किया। विधिवत पूजा अर्चना के साथ इस विमान को मैनवारिंग गार्डन में स्थापित कर दिया गया। इस मौके पर नौसेना अध्यक्ष ने कहा कि यह विमान अब लैंसडौन की शान बनकर देश दुनिया के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहेगा।
बुधवार को सैन्य नगरी लैंसडौन के मैनवारिंग गार्डन में आयोजित एक कार्यक्रम में एडमिरल सुनील लांबा ने कहा कि विभिन्न युद्धों में अपनी जांबाजी के करतब दिखाने वाली गढ़वाल रेजीमेंट को इस युद्ध विमान को सौंपते हुए उन्हें गर्व हो रहा है। युद्ध कौशल में गढ़वाली सेना व इस युद्ध बम वर्षक का उल्लेखनीय योगदान रहा है। रणबांकुरों की इस नगरी को यह तोहफा देते हुए वे हर्षित और गर्वित हैं। उन्होंने गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंटल सेंटर को नौसेना की समुद्री सफर स्मारिका भी भेंट की। सूबेदार मेजर त्रिलोक ने यह स्मारिका ग्रहण की।
विज्ञापन

कार्यक्रम में विशेष रुप से मौजूद उप थलसेनाध्यक्ष ले. जनरल शरत चंद्र ने कहा कि दो फरवरी, 1990 को आईएनएस विराट गठबंधन संधि के तहत गढ़वाल रेजीमेंट के साथ एफिलिएट हुआ था। वायुयान वाहक पोत विराट में सी हैरियर विमान का संचालन युद्ध स्थितियों में किया जाता रहा। 6 मार्च 2017 को आईएनएस विराट को सैन्य बेड़े से अलग करने के बाद इस पोत से संचालित हो रहे युद्ध विमान को अलग किया गया। उन्होंने ही एडमिरल लांबा से इस विमान को रेजीमेंट मुख्यालय लैंसडौन में स्थापित करने का अनुरोध किया था, जिसे उन्होंने स्वीकार किया। उन्होंने रेजीमेंट की ओर से उनका आभार जताया। इस मौके पर जीआरआरसी के कमान अधिकारी ब्रिगेडियर इंद्रजीत चटर्जी, डिप्टी कमांडेंट कर्नल शलभ सनवाल, सेंटर एसएम त्रिलोक सिंह सहित नौसेना तथा थल सेना के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

.
क्या है बम वर्षक विमान सी हैरियर
लैंसडौन। दो फरवरी, 1990 में यह युद्ध बम वर्षक विमान सी हैरियर आइएनएस विराट के साथ जुड़ा। तब से इसका संचालन भी विराट के साथ किया जाता रहा। यह नेवी का पहला ऐसा बम वर्षक विमान है, जिसका आसमान, जमीन, समुद्र तीनों जगह दुश्मनों के युद्ध लड़ाकों पर मार करने में प्रयोग किया जाता रहा है। यह रायल नेवी में अप्रैल, 1980 में शामिल हुआ। ब्रिटिश सेना के इस विमान को 16 दिसंबर, 1983 को नेवी की हवाई विंग हंसा आईएनएस में शामिल किया गया। वर्ष 1987 में नौसेना ने सी हैरियर विमान को ब्रिटिश सेना से खरीद लिया। 20 फीट लंबाई के एक सीटर वाले इस विमान का वजन 12 टन था। एडमिरल अरुण प्रसाद इसके पहले पायलट थे। उनके साथ तकनीशियन विमल प्रसाद थे। लैंसडौन में स्थापना के दौरान इसका वजन मात्र पांच टन रखा गया है। इस विमान को गोवा से कोटद्वार लाने में तीन दिन का समय लगा। पहाड़ी रास्ता होने के कारण कोटद्वार से लैंसडौन लाने में चार दिन का समय लग गया। ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed