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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम ने डाला कण्वाश्रम में डेरा
Updated Fri, 19 Jan 2018 10:29 PM IST
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कण्वाश्रम (कोटद्वार)। महर्षि कण्व ऋषि की तपस्थली और चक्रवर्ती सम्राट भरत की जन्म स्थली कण्वाश्रम को राष्ट्रीय धरोहर बनाने की दिशा में पुरातत्व विभाग ने कवायद शुरू कर दी है। कण्वाश्रम विकास समिति की पहल पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की टीम ने शुक्रवार को कण्वाश्रम में डेरा डाल दिया है। टीम कण्वाश्रम का नक्शा और साइट प्लान तैयार महानिदेशक को भेजेगी।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण देहरादून मंडल की अधीक्षण पुरातत्वविद् लिली धस्माना की अगुवाई में पुरातत्वविदों की एक टीम ने कण्वाश्रम का दौरा किया। टीम ने वर्ष 2012 में निकली दर्जनों मूर्तियों के बारे में जानकारी हासिल करने के साथ ही कण्वाश्रम की प्राचीनता को दर्शाने वाले भरत स्मारक का भी निरीक्षण किया। टीम के साथ मौके पर गए कण्वाश्रम विकास समिति के अध्यक्ष कमांडर बीएस रावत (रिटायर्ड) ने उन्हें छह साल पहले बाढ़ के दौरान और खुदाई में मिली मूर्तियों की जानकारी दी। बताया कि फरवरी 2016 में भी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधिकारियों ने कण्वाश्रम का दौराकर जरूरी जानकारी हासिल की थी। तब यहां मिली मूर्तियों को प्रथम दृष्ट्या नौंवी से ग्यारहवीं शताब्दी का बताया गया था। इन मूर्तियों में अधिकतर देव प्रतिमाएं और मंदिरों के स्तंभ थे। वर्ष 2012 में पुरातत्व विभाग के तत्कालीन अधिकारियों के साथ ही गढ़वाल विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग की टीम ने भी क्षेत्र का निरीक्षण किया था, लेकिन इसके आगे बात नहीं बढ़ सकी।
अधीक्षण पुरातत्वविद् लिली धस्माना ने बताया कि पूरे क्षेत्र की पहचान कर साइट प्लान बनाने के लिए वन विभाग से मदद मांगी गई है। विभाग की एक टीम कण्वाश्रम में पहुंच गई है, जो क्षेत्र का साइट प्लान तैयार करने के लिए सर्वे और उत्खनन कार्य करेगी। टीम ने मृग विहार और इससे सटे उस जंगल का भी मुआयना किया, जहां तब देव प्रतिमाएं और मंदिर स्तंभ निकले थे। समिति के अध्यक्ष बीएस रावत ने बताया कि कई महत्वपूर्ण मूर्तियां वन विभाग ने गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार भेजी हैं। टीम में पुरातत्वविद् राजीव पांडे, मानचित्रकार वाईएस नयाल, कमलेश पांगती और एचसी थपलियाल शामिल हैं। पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने कोटद्वार में लैंसडौन वन प्रभाग के सहायक प्रभागीय वनाधिकारी जीसी वेदवाल से भी मुलाकात की।
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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण देहरादून मंडल की अधीक्षण पुरातत्वविद् लिली धस्माना की अगुवाई में पुरातत्वविदों की एक टीम ने कण्वाश्रम का दौरा किया। टीम ने वर्ष 2012 में निकली दर्जनों मूर्तियों के बारे में जानकारी हासिल करने के साथ ही कण्वाश्रम की प्राचीनता को दर्शाने वाले भरत स्मारक का भी निरीक्षण किया। टीम के साथ मौके पर गए कण्वाश्रम विकास समिति के अध्यक्ष कमांडर बीएस रावत (रिटायर्ड) ने उन्हें छह साल पहले बाढ़ के दौरान और खुदाई में मिली मूर्तियों की जानकारी दी। बताया कि फरवरी 2016 में भी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधिकारियों ने कण्वाश्रम का दौराकर जरूरी जानकारी हासिल की थी। तब यहां मिली मूर्तियों को प्रथम दृष्ट्या नौंवी से ग्यारहवीं शताब्दी का बताया गया था। इन मूर्तियों में अधिकतर देव प्रतिमाएं और मंदिरों के स्तंभ थे। वर्ष 2012 में पुरातत्व विभाग के तत्कालीन अधिकारियों के साथ ही गढ़वाल विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग की टीम ने भी क्षेत्र का निरीक्षण किया था, लेकिन इसके आगे बात नहीं बढ़ सकी।
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अधीक्षण पुरातत्वविद् लिली धस्माना ने बताया कि पूरे क्षेत्र की पहचान कर साइट प्लान बनाने के लिए वन विभाग से मदद मांगी गई है। विभाग की एक टीम कण्वाश्रम में पहुंच गई है, जो क्षेत्र का साइट प्लान तैयार करने के लिए सर्वे और उत्खनन कार्य करेगी। टीम ने मृग विहार और इससे सटे उस जंगल का भी मुआयना किया, जहां तब देव प्रतिमाएं और मंदिर स्तंभ निकले थे। समिति के अध्यक्ष बीएस रावत ने बताया कि कई महत्वपूर्ण मूर्तियां वन विभाग ने गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार भेजी हैं। टीम में पुरातत्वविद् राजीव पांडे, मानचित्रकार वाईएस नयाल, कमलेश पांगती और एचसी थपलियाल शामिल हैं। पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने कोटद्वार में लैंसडौन वन प्रभाग के सहायक प्रभागीय वनाधिकारी जीसी वेदवाल से भी मुलाकात की।
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