{"_id":"596cef4e4f1c1beb6b8b473b","slug":"111500311374-kotdwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"साहित्य सेवा के लिए चक्रधर शर्मा को मिला संतत श्री सम्मान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
साहित्य सेवा के लिए चक्रधर शर्मा को मिला संतत श्री सम्मान
Updated Mon, 17 Jul 2017 10:39 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोटद्वार। धाद महिला सभा कोटद्वार के तत्वावधान में आयोजित समारोह में साहित्यकार स्व. सदानंद जखमोला संतत के कविता और कहानी संग्रह आंसुओं के तट पर का विमोचन किया गया। समारोह में साहित्यकार चक्रधर शर्मा कमलेश को आजीवन साहित्य सेवा के लिए प्रथम संततश्री सम्मान से नवाजा गया।
बीईएल सामुदायिक केंद्र में आयोजित समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार योगेश पांथरी ने दीप प्रज्जवालित कर किया। उन्होंने स्व. सदानंद जखमोला संतत को महान साहित्यकार बताते हुए नई पीढ़ी को उनसे प्रेरणा लेने का आह्वान किया। कहा कि उन्होंने बेहद सीमित संसाधनों के बीच प्रकृति व समाजिक जीवन से जुड़ी उत्कृष्ट रचनाएं दीं। हिमालयी धरोहर अध्ययन केंद्र के निदेशक डा. पद्मेश बुड़ाकोटी ने कहा कि स्व. सदानंद जखमोला संतत ने गढ़वाली, हिंदी और संस्कृत में लेखन कार्य किया। उनकी प्रथम दो रचनाएं गढ़ गुणत्याली और रैबार गढ़वाली में, महाकवि कालिदास संस्कृत में और कण्वाश्रम एक परिचय हिंदी भाषा में हैं। स्व. जखमोला के निधन के चालीस वर्ष बाद उनके परिजनों द्वारा उनकी अप्रकाशित कविता व कहानियों को आंसुओं के तट पर के रूप में प्रकाशित करना उनकी प्रतिबद्ध सोच और रचनाधर्मिता को उजागर करता है। स्व. जखमोला साहित्यकार के साथ ही बहुत बड़े समाज सुधारक थे। वह पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने महाकवि कालिदास का उदाहरण देकर स्पष्ट किया कि यही कण्वाश्रम है। साप्ताहिक सत्यपथ के संपादक पं. ललिता प्रसाद नैथानी के साथ मिलकर उन्होंने कण्वाश्रम को लेकर जो समग्र अभियान चलाया। उसी के बूते सन् 1956 में तत्कालीन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री डा. संपूर्णानंद ने कण्वाश्रम में भरत स्मारक का लोकार्पण किया।
धाद संस्था के संस्थापक लोकेश नवानी ने कहा कि स्व. सदानंद जखमोला सामाजिक सरोकारों से जुड़े थे। उनकी रचनाओं में आम आदमी की पीड़ा और पहाड़ की संवेदनशीलता स्पष्ट दिखाई देती है। विशिष्ट अतिथि डा. बीना वशिष्ठ ने कहा कि स्व. जखमोला की नई कृति आंसुओं के तट पर की कविताएं और कहानियां भावपूर्ण है। इस मौके पर साहित्यकार चक्रधर शर्मा कमलेश को प्रथम संततश्री सम्मान प्रदान किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता धाद के संस्थापक लोकेश नवानी और संचालन माधुरी रावत ने किया। कार्यक्रम में डा. अनिल दीक्षित, ऊषा शर्मा, संगीता उनियाल, अनिल जखमोला, नंदा डबराल, जगदंबा कोटनाला, मोहिनी नौटियाल, निशा कुलश्रेष्ठ, काजोल शर्मा, डा. अनिल दीक्षित, अनुसूया प्रसाद काला, महेशानंद गौड़ आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
बीईएल सामुदायिक केंद्र में आयोजित समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार योगेश पांथरी ने दीप प्रज्जवालित कर किया। उन्होंने स्व. सदानंद जखमोला संतत को महान साहित्यकार बताते हुए नई पीढ़ी को उनसे प्रेरणा लेने का आह्वान किया। कहा कि उन्होंने बेहद सीमित संसाधनों के बीच प्रकृति व समाजिक जीवन से जुड़ी उत्कृष्ट रचनाएं दीं। हिमालयी धरोहर अध्ययन केंद्र के निदेशक डा. पद्मेश बुड़ाकोटी ने कहा कि स्व. सदानंद जखमोला संतत ने गढ़वाली, हिंदी और संस्कृत में लेखन कार्य किया। उनकी प्रथम दो रचनाएं गढ़ गुणत्याली और रैबार गढ़वाली में, महाकवि कालिदास संस्कृत में और कण्वाश्रम एक परिचय हिंदी भाषा में हैं। स्व. जखमोला के निधन के चालीस वर्ष बाद उनके परिजनों द्वारा उनकी अप्रकाशित कविता व कहानियों को आंसुओं के तट पर के रूप में प्रकाशित करना उनकी प्रतिबद्ध सोच और रचनाधर्मिता को उजागर करता है। स्व. जखमोला साहित्यकार के साथ ही बहुत बड़े समाज सुधारक थे। वह पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने महाकवि कालिदास का उदाहरण देकर स्पष्ट किया कि यही कण्वाश्रम है। साप्ताहिक सत्यपथ के संपादक पं. ललिता प्रसाद नैथानी के साथ मिलकर उन्होंने कण्वाश्रम को लेकर जो समग्र अभियान चलाया। उसी के बूते सन् 1956 में तत्कालीन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री डा. संपूर्णानंद ने कण्वाश्रम में भरत स्मारक का लोकार्पण किया।
विज्ञापन
धाद संस्था के संस्थापक लोकेश नवानी ने कहा कि स्व. सदानंद जखमोला सामाजिक सरोकारों से जुड़े थे। उनकी रचनाओं में आम आदमी की पीड़ा और पहाड़ की संवेदनशीलता स्पष्ट दिखाई देती है। विशिष्ट अतिथि डा. बीना वशिष्ठ ने कहा कि स्व. जखमोला की नई कृति आंसुओं के तट पर की कविताएं और कहानियां भावपूर्ण है। इस मौके पर साहित्यकार चक्रधर शर्मा कमलेश को प्रथम संततश्री सम्मान प्रदान किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता धाद के संस्थापक लोकेश नवानी और संचालन माधुरी रावत ने किया। कार्यक्रम में डा. अनिल दीक्षित, ऊषा शर्मा, संगीता उनियाल, अनिल जखमोला, नंदा डबराल, जगदंबा कोटनाला, मोहिनी नौटियाल, निशा कुलश्रेष्ठ, काजोल शर्मा, डा. अनिल दीक्षित, अनुसूया प्रसाद काला, महेशानंद गौड़ आदि मौजूद थे।
विज्ञापन