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कोल्हू में सात करोड़ की लागत से बनेगा 100 मीटर लंबा डबल लेन पुल
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कोटद्वार के सनेह क्षेत्र में जहां पर कोल्हू नदी में पुल का निर्माण प्रस्तावित है।
- फोटो : KOTDWAR
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कोटद्वार-कालागढ़ मोटर मार्ग पर सनेह में कोल्हू नदी में पुल निर्माण की उम्मीद जग गई है। लोनिवि दुगड्डा की ओर से पुल निर्माण के लिए द्वितीय चरण की डीपीआर भेजी गई है। इसके बाद फाइनल डीपीआर तैयार कर शासन को भेजी जाएगी। बृहस्पतिवार को लोनिवि और वन विभाग के अधिकारियों ने कोल्हू नदी का संयुक्त निरीक्षण किया।
लोनिवि दुगड्डा की सहायक अभियंता आकृति गुप्ता ने बताया कि निरीक्षण के दौरान यह देखा गया कि पुल निर्माण के लिए चिह्नित स्थान वाइल्ड लाइफ कोरिडोर में तो नहीं है। यदि चिह्नित स्थल वाइल्ड लाइफ कोरिडोर में हुआ, तो पुल निर्माण के लिए वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार की अनुमति लेनी आवश्यक होगी। एप्रोच अधिक होने के कारण पुल निर्माण की लागत करीब सात करोड़ आएगी। संयुक्त निरीक्षण में जेई रोमा भारद्वाज, कोटड़ी के वन क्षेत्राधिकारी आरपी पंत, डिप्टी रेंजर दीपक रावत, सुरेंद्र गुसाईं आदि मौजूद रहे।
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15 हजार आबादी वाले क्षेत्र को मिलेगा लाभ
कोटद्वार। बरसात में कोल्हू नदी के उफान में रहने पर करीब से 15 हजार की आबादी वाले क्षेत्र का संपर्क कोटद्वार से कट जाता है। यहां के ग्रामीणों का मुख्य व्यवसाय खेती और पशुपालन है। क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीण कोटद्वार क्षेत्र में प्रतिदिन दूध बेचने के लिए पहुंचते हैं। गांवों के 200 से अधिक बच्चे भी कोटद्वार के सनेह क्षेत्र की स्कूलों में पढ़ने आते हैं। कोल्हू नदी में पुल न होने के कारण ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को जान जोखिम में डालकर उफनती नदी पार कर कोटद्वार आवाजाही करने को मजबूर होना पड़ता है।
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लोनिवि दुगड्डा की सहायक अभियंता आकृति गुप्ता ने बताया कि निरीक्षण के दौरान यह देखा गया कि पुल निर्माण के लिए चिह्नित स्थान वाइल्ड लाइफ कोरिडोर में तो नहीं है। यदि चिह्नित स्थल वाइल्ड लाइफ कोरिडोर में हुआ, तो पुल निर्माण के लिए वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार की अनुमति लेनी आवश्यक होगी। एप्रोच अधिक होने के कारण पुल निर्माण की लागत करीब सात करोड़ आएगी। संयुक्त निरीक्षण में जेई रोमा भारद्वाज, कोटड़ी के वन क्षेत्राधिकारी आरपी पंत, डिप्टी रेंजर दीपक रावत, सुरेंद्र गुसाईं आदि मौजूद रहे।
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15 हजार आबादी वाले क्षेत्र को मिलेगा लाभ
कोटद्वार। बरसात में कोल्हू नदी के उफान में रहने पर करीब से 15 हजार की आबादी वाले क्षेत्र का संपर्क कोटद्वार से कट जाता है। यहां के ग्रामीणों का मुख्य व्यवसाय खेती और पशुपालन है। क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीण कोटद्वार क्षेत्र में प्रतिदिन दूध बेचने के लिए पहुंचते हैं। गांवों के 200 से अधिक बच्चे भी कोटद्वार के सनेह क्षेत्र की स्कूलों में पढ़ने आते हैं। कोल्हू नदी में पुल न होने के कारण ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को जान जोखिम में डालकर उफनती नदी पार कर कोटद्वार आवाजाही करने को मजबूर होना पड़ता है।
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