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जेट्रोफा का बायो फ्यूल किसने पी लिया!
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 23 Mar 2016 09:48 AM IST
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जेट्रोफा
- फोटो : demo
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करोड़ों की जेट्रोफा परियोजना का बायो फ्यूल कौन पी गया है? यह पता नहीं चल रहा है। इस परियोजना से संबंधित अभिलेख भी नहीं मिल रहे हैं। जिस कंपनी से इस परियोजना का करार हुआ था, वह कंपनी लापता है।
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जंगलों से जेट्रोफा के पौधे भी गायब हैं। मामले की जांच कर रहा सतर्कता अधिष्ठान बार-बार अभिलेख उपलब्ध कराने के लिए शासन को पत्र लिख रहा है, लेकिन कागजात उपलब्ध नहीं कराए गए। शासन स्तर से भी मामले में किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है।
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जेट्रोफा से बायो फ्यूल बनाने की परियोजना वर्ष 2003 में एनडी तिवारी की सरकार में बनाई गई थी। इसके लिए उत्तरांचल बायो फ्यूल बोर्ड बना था और इसका करार उत्तरांचल बायो फ्यूल कंपनी से हुआ था।
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22 करोड़ रुपये से शुरू हुई थी योजना
इस कंपनी को बायो फ्यूल की प्रोसेसिंग, मार्केटिंग आदि करनी थी। उत्तराखंड वन विकास निगम इस कंपनी का पार्टनर था। यह योजना करीब 22 करोड़ रुपये से शुरू की थी।
जेट्रोफा के पौधे मंगाकर वन प्रभागीय अधिकारियों को बांटे जाने थे। बोर्ड का अध्यक्ष प्रमुख वन संरक्षक उत्तराखंड और सदस्य सचिव वन निगम को महाप्रबंधक को बनाया गया था।
जेट्रोफा परियोजना कुछ सालों के बाद घपले का शिकार हो गई। करार करने वाली कंपनी लापता हो गई और करोड़ों का चूना लगने बाद परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई। मामले में शासन स्तर से किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई।
अधिकारियों के बांटे गए पौधों का नहीं कोई पता
वन प्रभागीय अधिकारियों को जेट्रोफा के जो पौधे बांटे गए थे, उनका भी पता नहीं है। अपनी जान बचाने के लिए अधिकारियों ने सतर्कता अधिष्ठान को जांच सौंप दी थी।
अधिष्ठान कई बार शासन को पत्र भेजकर अभिलेख मांग रहा है, लेकिन कागजात नहीं मिल रहे हैं। बोर्ड के सदस्य सचिव वन निगम के महाप्रबंधक वीके गांगटे का कहना है कि कंपनी का पता नहीं है। मामले की जांच चल रही है।