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आपदाः उत्तराखंड के पुर्निर्माण से केंद्र ने मोड़ा 'मुंह'
अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 12 Oct 2013 11:22 AM IST
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उत्तराखंड की प्रगति के लिए पूरे तीन साल इंतजार के बाद केंद्र ने औद्योगिक प्रोत्साहन पैकेज का जो प्रस्ताव तैयार किया है, वह बेदम है। इसके प्रावधान इतने आकर्षक नहीं हैं कि उद्योग राज्य की ओर रुख करें।
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पैकेज का सबसे बड़ा आकर्षण
राज्य गठन के बाद मिले पैकेज का सबसे बड़ा आकर्षण उद्योगों को इनकम टैक्स और एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) की छूट थी। मौजूदा प्रस्ताव में इसे खत्म करने की बात है।
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इसी छूट ने 2003 से लेकर 2010 तक प्रदेश में उद्योगों के पूंजी निवेश को शून्य से 35 हजार करोड़ रुपए तक पहुंचाया।
उत्पाद शुल्क के अलावा मुनाफे में छूट ने माहौल और बेहतर किया। इससे प्रदेश के उद्यमियों को अन्य कंपनियों की तुलना में अतिरिक्त लाभ मिलता रहा। फार्मा उद्योग इसी छूट के कारण करीब 12 हजार करोड़ रुपए का निवेश कर सका।
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बड़ी कंपनियां उत्तराखंड आईं
इसी तरह टाटा, बजाज, अशोक लीलैंड जैसी बड़ी कंपनियां भी उत्तराखंड आईं। प्रस्ताव में जिन नई छूट की बात की जा रही है, वे तो प्रदेश में विशेष पर्वतीय नीति के रूप में नौ जिलों में पहले से ही लागू है।
इसके तहत पर्वतीय जिलों में 15 प्रतिशत कैपिटल सब्सिडी और उद्योग लगाने पर पांच प्रतिशत ब्याज सब्सिडी है। यही प्रावधान राज्य को दिए जाने वाले पैकेज में बताए जा रहे हैं।
इसके बावजूद उद्योग पहाड़ पर नहीं चढ़ पा रहे हैं और प्रदेश में असमान विकास की खाई बढ़ रही है।
पूरी तरह से उपेक्षित
2003 के पैकेज के तहत अधिकतर उद्योग मैदानी जिलों में लगे और पर्वतीय जिले पूरी तरह से उपेक्षित रह गए। ऐसे मे असमान विकास का शोर उठा और प्रदेश सरकार ने नौ पर्वतीय जिलों के लिए पर्वतीय उद्योग नीति 2008 में लागू की थी।
यह नीति भी उद्योगों को पहाड़ों की ओर मोड़ने में नाकाम रही और केंद्र का ताजा प्रस्ताव भी बहुत उम्मीदें जगाता नहीं दिखता।
राज्य को आपत्ति
केंद्र का प्रस्तावित पैकेज प्रदेश सरकार को भी रास नहीं आ रहा है। सरकार इस मामले में प्रधानमंत्री और केंद्रीय वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा से बात करेगी। सरकार का तर्क है कि उत्तराखंड को जम्मू-कश्मीर और हिमाचल के साथ नहीं रखना चाहिए।
उत्तराखंड ने केदारनाथ की आपदा झेली है और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए पहले जैसे पैकेज की ही जरूरत है। कृषि मंत्री हरक सिंह के मुताबिक प्रदेश को इस समय रोजगार, पूंजी निवेश की खासी जरूरत है।
जब उत्तराखंड का पहला अनुभव शानदार रहा है तो अब एक्साइज और आयकर मे छूट के प्रावधान क्यों नहीं किए जा सकते।
आयकर और उत्पाद शुल्क में छूट दिए बगैर पैकेज का फायदा नहीं। आपदा के बाद पुनर्निर्माण की चुनौती से जूझ रहे राज्य के बारे में केंद्र सरकार को सहानुभूतिपूर्वक सोचना चाहिए।
- पंकज गुप्ता, इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड
एक्साइज और आयकर की छूट प्रदेश में औद्योगिक विकास में सहायक बनी। फिर भी पैकेज घोषित होने के बाद ही सोचा जा सकता है कि प्रदेश को किस तरह से इसका फायदा मिलेगा।
- सुधीर चंद्र नौटियाल, अपर निदेशक उद्योग
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