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एक सैलाब आया...और सैकड़ों अनाथ हो गए
मनमीत रावत
Updated Sat, 29 Jun 2013 06:23 PM IST
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आपदा ने सैकड़ों बच्चों को उनके मां-बाप से जुदा कर दिया। अब कई ऐसे बच्चे सामने आ रहे हैं जिनकी मासूम निगाहें अपने मम्मी-पापा को तलाश रही हैं। पर यह तलाश पूरी नहीं हो पा रही।
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उत्तराखंड आपदा की विशेष कवरेज
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कुछ बच्चों को महिला कांस्टेबलों की गोद मिली तो मुस्कराने लगे लेकिन ज्यादातर बच्चे सुबक रहे हैं। प्रकृति ने तो इन मासूम बच्चों को बख्श दिया, लेकिन अब नियति इन मासूम बच्चों का कैसा इम्तिहान लेगी इससे ये बच्चे खुद ही अनजान हैं।
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केवल मासूम बच गए
रुद्रप्रयाग के केदारनाथ, गौरीकुंड, जानकीचट्टी, रामबाड़ा जैसे कई जगहों में आई आपदा में कई ऐसे परिवार खत्म हुए जिनमें एक से पांच साल के मासूम बच्चे बच गए। इन मासूम बच्चों को प्रशासन गौचर तक ले आया। उसके बाद उन्हें ऋषिकेश लाया जा रहा है। इनमें से कुछ बच्चे तो इतने छोटे हैं किबोल भी नहीं पा रहे हैं।
मां-बाप से बिछड़े अभी तक 100 से ज्यादा दून और ऋषिकेश लाए गए हैं। किसी को महिला पुलिस कांस्टेबल रही हैं तो किसी को संस्था से जुड़े लोग। कुछ अस्पतालों में भर्ती हैं। एसएसपी केवल खुराना बताते हैं कि ऐसे सभी बच्चों का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। इनके भविष्य का फैसला प्रशासन करेगा।
अनाथ बच्चों की सूची मुहैया कराई गई
उत्तराखंड राज्य बाल आयोग के अध्यक्ष अजय सेतिया ने बताया कि इस बारे में गंभीरता से सोचा जा रहा है। बाल आयोग को 57 अनाथ बच्चों की सूची मुहैया कराई गई है। इन बच्चों की वर्तमान स्थिति के बारे में रुद्रप्रयाग, चमोली और पिथौरागढ़ के जिलाधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है।
कुछ बच्चों को बालमजदूरी के लिए तस्करी की भी शिकायतें मिली हैं जिस पर संबंधित जिलों की पुलिस को अलर्ट किया गया है।
छह माह तक किसी भी बच्चे को गोद नहीं लेने दिया जाएगा। बच्चों का देख रेख सरकार की जिम्मेदारी है। हो सकता है कि छह माह में कई मासूमों के अभिभावक मिले जाएं। इसके बाद जिला प्रशासन तय करेगा कि इन बच्चों का क्या किया जाए।
- विजय बहुगुणा, मुख्यमंत्री