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एक-दूसरे ने योग और पाठ्यक्रम में मांगी मदद
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Sat, 12 Nov 2016 10:11 PM IST
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अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन के मंच से शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण की जमकर तारीफ की। उन्होंने यह मांग भी रखी कि बाबा रामदेव स्कूलों की छुट्टियों के दौरान बच्चों को योग कराएं। नैथानी ने कहा कि वह खुद भी बचपन से रोजाना योग करते हैं। इससे शरीर और मन स्वस्थ्य रहता है। मंत्री प्रसाद के बाद अपने संबोधन में आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि हम बच्चों को योग कराने के साथ ही शिक्षकों को ट्रेनिंग भी देंगे। मगर योग की किताबों को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए।
राज्यपाल डा.केके पाल ने कहा कि जैसे बाजार में उर्दू के साथ हिंदी अनुवाद वाली किताबें उपलब्ध है, वैसे ही संस्कृत का भी अनुवाद होना चाहिए। उन्होंने नोबेल पुरस्कार से सम्मानित रविंद्र नाथ टैगोर का उदाहरण देते हुए कहा कि गीतांजलि का अंग्रेजी में अनुवाद होने पर ही उन्हें नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया। महामहिम ने अपने संस्मरण में कहा कि छात्र जीवन में मिर्जा गालिब जैसे उर्दू शायरों की किताबें मिलती थी, जिनमें एक तरफ उर्दू और दूसरी तरफ हिंदी अनुवाद होता था। आसानी से पढ़ने और समझ आने से और पढ़ने की जिज्ञासा होती थी। ऐसे ही संस्कृत किताबों का अनुवाद करते हुए प्रचार प्रसार किया जा सकता है।
सम्मेलन में संस्कृत विद्वानों और संस्कृत छात्रों के अलावा विदेश से आए संस्कृत प्रेमी भी मौजूद रहे। लिहाजा उनकी सुविधा के लिए समारोह का संचालन संस्कृत के साथ- साथ अंग्रेजी में भी किया गया। मंच पर पहले डा. अरविंद नारायण मिश्र संस्कृत में वक्ताओं को आंमत्रित करते और उनके बाद डा. श्वेता अवस्थी उसे अंग्रेजी में दोहराती। जिससे हिंदी व संस्कृत न जानने वालों को कार्यक्रम की भरपूर जानकारी मिलती रही।
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सम्मेलन में इनका रहा सहयोग
सम्मेलन में विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी तंजीम अली, प्रो. दिनेश चमोला, प्रो. मोहन चंद्र बलोदी, डा. सुशील उपाध्याय, डा. राकेश कुमार सिंह, डा. रामरतन खंडेलवाल, डा. रतन कौशिक, डा. धीरज शुक्ला, मनोज गहतोड़ी, आशुतोष दूबे, डा. उमेश शुक्ला, डा. लक्ष्मी नारायण जोशी, डा. मनोज किशोर पंत आदि ने सहयोग दिया।
1650 रजिस्ट्रेशन, पहले दिन पढ़े 350 शोध पत्र
सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के 1650 शोध छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराए। पहले दिन 350 से ज्यादा छात्रों ने बोद्ध दर्शन, न्याय दर्शन, अरबी, उर्दू, संस्कृत, वेद आदि विषयों पर शोध पत्र पढ़े। सांस्कृतिक संध्या में लोक गायक शिवचरण नौडियाल आदि ने प्रस्तुति दी।
राज्यपाल डा.केके पाल ने कहा कि जैसे बाजार में उर्दू के साथ हिंदी अनुवाद वाली किताबें उपलब्ध है, वैसे ही संस्कृत का भी अनुवाद होना चाहिए। उन्होंने नोबेल पुरस्कार से सम्मानित रविंद्र नाथ टैगोर का उदाहरण देते हुए कहा कि गीतांजलि का अंग्रेजी में अनुवाद होने पर ही उन्हें नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया। महामहिम ने अपने संस्मरण में कहा कि छात्र जीवन में मिर्जा गालिब जैसे उर्दू शायरों की किताबें मिलती थी, जिनमें एक तरफ उर्दू और दूसरी तरफ हिंदी अनुवाद होता था। आसानी से पढ़ने और समझ आने से और पढ़ने की जिज्ञासा होती थी। ऐसे ही संस्कृत किताबों का अनुवाद करते हुए प्रचार प्रसार किया जा सकता है।
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सम्मेलन में संस्कृत विद्वानों और संस्कृत छात्रों के अलावा विदेश से आए संस्कृत प्रेमी भी मौजूद रहे। लिहाजा उनकी सुविधा के लिए समारोह का संचालन संस्कृत के साथ- साथ अंग्रेजी में भी किया गया। मंच पर पहले डा. अरविंद नारायण मिश्र संस्कृत में वक्ताओं को आंमत्रित करते और उनके बाद डा. श्वेता अवस्थी उसे अंग्रेजी में दोहराती। जिससे हिंदी व संस्कृत न जानने वालों को कार्यक्रम की भरपूर जानकारी मिलती रही।
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सम्मेलन में इनका रहा सहयोग
सम्मेलन में विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी तंजीम अली, प्रो. दिनेश चमोला, प्रो. मोहन चंद्र बलोदी, डा. सुशील उपाध्याय, डा. राकेश कुमार सिंह, डा. रामरतन खंडेलवाल, डा. रतन कौशिक, डा. धीरज शुक्ला, मनोज गहतोड़ी, आशुतोष दूबे, डा. उमेश शुक्ला, डा. लक्ष्मी नारायण जोशी, डा. मनोज किशोर पंत आदि ने सहयोग दिया।
1650 रजिस्ट्रेशन, पहले दिन पढ़े 350 शोध पत्र
सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के 1650 शोध छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराए। पहले दिन 350 से ज्यादा छात्रों ने बोद्ध दर्शन, न्याय दर्शन, अरबी, उर्दू, संस्कृत, वेद आदि विषयों पर शोध पत्र पढ़े। सांस्कृतिक संध्या में लोक गायक शिवचरण नौडियाल आदि ने प्रस्तुति दी।