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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Haridwar News ›   Wheat and sugar crisis on 4.44 lakh families

4.44 लाख परिवारों पर गेहूं-चीनी का संकट

Mon, 10 Apr 2017 10:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार Updated Mon, 10 Apr 2017 10:51 PM IST
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केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना और सेंट्रल पूल से आपूर्ति बंद होने से जिले के 4.44 परिवारों पर गेहूं व चीनी का संकट खड़ा हो गया है। हालांकि चीनी की सब्सिडी को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। महीने की 10 तारीख बीतने पर भी राशन मिलने की कोई सूरत नजर नहीं आ रही है। ऐसे में उपभोक्ता राशन डीलर और डीलर विभाग की तरफ टकटकी लगाए हुए हैं। वहीं विभागीय अधिकारी शासन के निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं। 
     
प्रदेश में सबसे बड़ी आबादी वाले जनपद हरिद्वार में 4.44 लाख राशन कार्ड धारक हैं। इनमें दो लाख से अधिक परिवारों को राष्ट्रीय खाद्य योजना के तहत हर महीने प्रति यूनिट दो रुपये किलो की दर से दो किलो गेहूं और तीन रुपये प्रति किलो की दर से तीन किलो चावल दिए जाते हैं। वहीं राज्य खाद्य सुरक्षा योजना के तहत लगभग इतने ही परिवार 10 किलो चावल और पांच किलो गेहूं पाते हैं। चावल नौ रुपये और गेहूं पांच रुपये किलो दिया जाता है। जबकि चीनी आधा किलो प्रति यूनिट 13.5 रुपये की दर से मिलती है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत हर महीने सेंट्रल पूल से राज्यों को गेहूं की आपूर्ति की जाती रही है। दिसंबर में केंद्र सरकार ने गेहूं का संकट जताते हुए चार महीने तक आपूर्ति पर रोक लगा दी थी। अप्रैल से गेहूं मिलने की उम्मीद जताई जा रही थी। लेकिन महीने की 10 तारीख बीतने पर भी गेहूं की आपूर्ति नहीं हो पाई है। ऐसे में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत आने वाले परिवारों को इस महीने भी गेहूं मिलता नजर नहीं आ रहा है।      
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वहीं चीनी को लेकर केंद्र की तरफ से असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सरकार की ओर से े लिखित तौर पर सब्सिडी बंद करने को लेकर कोई आदेश राज्यों को जारी नहीं किए, लेकिन बजट में सब्सिडी का कोई प्रावधान इस बार नहीं रखा। ऐसे में चीनी का संकट राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत राज्य कोटे के अधीन परिवारों के लिए भी बराबर बना हुआ है। गेहूं, चावल व चीनी का कोटा हर महीने की 10 तारीख तक गोदामों में पहुुंच जाता था, पर इस बार अब तक खाद्य सामग्री नहीं पहुंची है। इसकी भनक लगने पर उपभोक्ताओं में खलबली मचनी शुरू हो गई है।       
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गेहूं आपूर्ति राज्य के लिए बड़ी चुनौती      
केंद्र यदि किसी भी राज्य को सेंट्रल पूल से गेहूं नहीं दे पाता है तो राज्य के लिए बड़ी चुनौती खड़ी हो जाएगी। उत्तराखंड में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत करीब 9.5 लाख परिवार आते हैं। इन परिवारों को हर महीने सस्ता गेहूं उपलब्ध कराना राज्य सरकार के बस की बात नहीं है। हालांकि प्रदेश सरकार अन्य राज्यों की तरह केंद्र से संपर्क कर कुछ न कुछ रास्ता निकालने में लगी है, पर राज्य और केंद्र में एक ही दल की सरकार होने से प्रदेश सरकार खुलकर सामना करने की स्थिति में भी नहीं है।       

     
सेंट्रल पूल के गेहूं का कोटा प्रदेश को अभी नहीं मिल पाया है। चीनी को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कोटा मिलने पर ही आवंटित किया जा सकता है। इस बारे में शासन से जो निर्देश मिलेंगे, उसके अनुसार ही कोई कदम उठाया जाएगा।- राहुल शर्मा, जिला पूर्ति अधिकारी हरिद्वार     
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