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कुलपति और निदेशक बने हैं अनजान
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Wed, 26 Apr 2017 10:07 PM IST
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ऋषिकुल आयुर्वेदिक परिसर से निलंबित 31 छात्रों में से चार छात्र दो-दो मामलों में निलंबित हैं। इन निलंबित चार छात्रों में से पुलकित और दीदार सिंह भी है, लेकिन विश्वविद्यालय के कुलपति और परिसर निदेशक इनके मुन्नाभाई प्रकरण से अनभिज्ञ हैं। कुलपति और निदेशक की मानें तो दोनों छात्र अनुशासन भंग करने के मामले में निष्कासित थे। खबर है कि अब इन छात्रों के लिए परिसर में अलग से कक्षाएं चलाने के निर्देश हैं। परिसर के प्रोफेसर डा. शोभित कुमार वार्ष्णेंय ने बताया कि 17 और 18 अप्रैल के दिन आए और इन्हें पढ़ाया गया।
ये है विश्वविद्यालय की रिपोर्ट
बीएएमएस-2013 बैच के निलंबित छात्र पुलकित आर्य, दीदार सिंह, रोहित भटनागर और मोहम्मद अकरम को 20 अगस्त-2016 तक विश्वविद्यालय परिसर में अपना पक्ष शपथपत्र के रूप में प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था। साथ ही अपने माता-पिता के साथ मुख्य कुलानुशासक के समक्ष प्रस्तुत होकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश हुआ था। छात्र मोहम्मद अकरम निर्धारित तिथि तक मुख्य कुलानुशासक के समक्ष प्रस्तुत नहीं हुआ और अन्य 3 छात्रों के स्पष्टीकरण से विश्वविद्यालय संतुष्ट नहीं है। भौतिक सत्यापन, अभिलेख सत्यापन के समय जांच के उपरांत इनके अभिलेख सही नहीं पाए गए एवं इनके विरुद्घ भी मुकदमा दर्ज किया गया है। अत: इन्हें तत्काल प्रभाव से विश्वविद्यालय से निष्कासित करने का निर्णय लिया गया था।
पूर्व कुलसचिव ने जांच की मांग की
उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव डा. मृत्युंजय मिश्रा ने आयुष सचिव को ऋषिकुल आयुर्वेदिक परिसर से निलंबित छात्रों को दोबारा से प्रवेश देने में बरती गई अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की है। पूर्व कुलसचिव ने शिकायत करते हुए अवगत कराया है कि उनके कार्यकाल में ऋषिकुल परिसर में यूएपीएमटी में चिटिंग करते हुए प्रवेश लेने वालों के साथ संदिग्ध गतिविधियों में नाम आने पर एक छात्र सहित 31 छात्रों को 22 अगस्त को निलंबित कर दिया था। इनमें से पुलकित आर्य, दीदार सिंह समेत चार छात्र अनुशासनहीनता के भी दोषी थे, लेकिन उनके कुलसचिव पद पर होते हुए 29 मार्च को कुलपति प्रो. सौदान सिंह ने पुलकित आर्य और दीदार सिंह को बिना किसी प्रक्रिया के ऋषिकुल परिसर में प्रवेश कराने के लिए आदेश जारी कर दिए। जिस पर वहां के निदेशक ने तत्काल दोनों छात्रों को पढ़ाने के लिए आदेश जारी कर दिए।
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इसके अलावा 30 मार्च को विश्वविद्यालय के कुलसचिव कार्यालय कक्ष का ताला तोड़कर उसमें अनाधिकृत और जबरन रूप से स्वयं बैठ गए। साथ ही डा. राजेश कुमार को उप कुलसचिव और प्रो. आरबी सती को मुख्य कुलानुशासक बनाकर उन्हें कुलसचिव कार्यालय में बैठाते हुए कंप्यूटर एवं अन्य रिकार्ड को अपने कब्जे में ले लिया। जबकि कुलसचिव के पद से निवृत्त होने के उपरांत उनसे चार्ज लिया जाना चाहिए था, जो नहीं किया गया। पूर्व कुलसचिव ने आशंका जताई है कि कुलसचिव के रूप में लिए गए निर्णयों में हेराफेरी कर तथ्यों को छुपाया जा सकता है। उन्होंने बताया है कि उक्त प्रकरण के बाद 30 मार्च की शाम को स्वयं शासन द्वारा नियुक्त कुलसचिव प्रो. अरुण कुमार त्रिपाठी को चार्ज दिया।
कुलपति के आदेश पर प्रवेश कराए गए दोनों छात्रों पर अनुशासन भंग करने के आरोप थे। इंट्रेंस प्रकरण क्या है, उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। पूरे प्रकरण की जांच निष्पक्ष होनी चाहिए। किसी के साथ गलत नहीं होना चाहिए। दोनों छात्रों के लिए अलग से कोई कक्षाएं संचालित करने को आदेश नहीं दिया है। सामान्य तरीके से ही कक्षाओं में शामिल होने के निर्देश है। - प्रो. सुनील जोशी, निदेशक, ऋषिकुल आयुर्वेदिक परिसर।
निलंबित चल रहे छात्रों ने उन्हें अनुशासनात्मक कार्रवाई में निलंबित होने के प्रकरण के बारे में बताया। यूएपीएमटी में क्या चीटिंग इन छात्रों ने किया, इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। ऋषिकुल परिसर प्रशासन उन्हें समस्त डाक्यूमेंट के साक्ष्य उपलब्ध कराए तो अग्रिम कार्रवाई कराएंगे।
-प्रो. सौदान सिंह, कुलपति, उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय।
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ये है विश्वविद्यालय की रिपोर्ट
बीएएमएस-2013 बैच के निलंबित छात्र पुलकित आर्य, दीदार सिंह, रोहित भटनागर और मोहम्मद अकरम को 20 अगस्त-2016 तक विश्वविद्यालय परिसर में अपना पक्ष शपथपत्र के रूप में प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था। साथ ही अपने माता-पिता के साथ मुख्य कुलानुशासक के समक्ष प्रस्तुत होकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश हुआ था। छात्र मोहम्मद अकरम निर्धारित तिथि तक मुख्य कुलानुशासक के समक्ष प्रस्तुत नहीं हुआ और अन्य 3 छात्रों के स्पष्टीकरण से विश्वविद्यालय संतुष्ट नहीं है। भौतिक सत्यापन, अभिलेख सत्यापन के समय जांच के उपरांत इनके अभिलेख सही नहीं पाए गए एवं इनके विरुद्घ भी मुकदमा दर्ज किया गया है। अत: इन्हें तत्काल प्रभाव से विश्वविद्यालय से निष्कासित करने का निर्णय लिया गया था।
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पूर्व कुलसचिव ने जांच की मांग की
उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव डा. मृत्युंजय मिश्रा ने आयुष सचिव को ऋषिकुल आयुर्वेदिक परिसर से निलंबित छात्रों को दोबारा से प्रवेश देने में बरती गई अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की है। पूर्व कुलसचिव ने शिकायत करते हुए अवगत कराया है कि उनके कार्यकाल में ऋषिकुल परिसर में यूएपीएमटी में चिटिंग करते हुए प्रवेश लेने वालों के साथ संदिग्ध गतिविधियों में नाम आने पर एक छात्र सहित 31 छात्रों को 22 अगस्त को निलंबित कर दिया था। इनमें से पुलकित आर्य, दीदार सिंह समेत चार छात्र अनुशासनहीनता के भी दोषी थे, लेकिन उनके कुलसचिव पद पर होते हुए 29 मार्च को कुलपति प्रो. सौदान सिंह ने पुलकित आर्य और दीदार सिंह को बिना किसी प्रक्रिया के ऋषिकुल परिसर में प्रवेश कराने के लिए आदेश जारी कर दिए। जिस पर वहां के निदेशक ने तत्काल दोनों छात्रों को पढ़ाने के लिए आदेश जारी कर दिए।
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इसके अलावा 30 मार्च को विश्वविद्यालय के कुलसचिव कार्यालय कक्ष का ताला तोड़कर उसमें अनाधिकृत और जबरन रूप से स्वयं बैठ गए। साथ ही डा. राजेश कुमार को उप कुलसचिव और प्रो. आरबी सती को मुख्य कुलानुशासक बनाकर उन्हें कुलसचिव कार्यालय में बैठाते हुए कंप्यूटर एवं अन्य रिकार्ड को अपने कब्जे में ले लिया। जबकि कुलसचिव के पद से निवृत्त होने के उपरांत उनसे चार्ज लिया जाना चाहिए था, जो नहीं किया गया। पूर्व कुलसचिव ने आशंका जताई है कि कुलसचिव के रूप में लिए गए निर्णयों में हेराफेरी कर तथ्यों को छुपाया जा सकता है। उन्होंने बताया है कि उक्त प्रकरण के बाद 30 मार्च की शाम को स्वयं शासन द्वारा नियुक्त कुलसचिव प्रो. अरुण कुमार त्रिपाठी को चार्ज दिया।
कुलपति के आदेश पर प्रवेश कराए गए दोनों छात्रों पर अनुशासन भंग करने के आरोप थे। इंट्रेंस प्रकरण क्या है, उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। पूरे प्रकरण की जांच निष्पक्ष होनी चाहिए। किसी के साथ गलत नहीं होना चाहिए। दोनों छात्रों के लिए अलग से कोई कक्षाएं संचालित करने को आदेश नहीं दिया है। सामान्य तरीके से ही कक्षाओं में शामिल होने के निर्देश है। - प्रो. सुनील जोशी, निदेशक, ऋषिकुल आयुर्वेदिक परिसर।
निलंबित चल रहे छात्रों ने उन्हें अनुशासनात्मक कार्रवाई में निलंबित होने के प्रकरण के बारे में बताया। यूएपीएमटी में क्या चीटिंग इन छात्रों ने किया, इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। ऋषिकुल परिसर प्रशासन उन्हें समस्त डाक्यूमेंट के साक्ष्य उपलब्ध कराए तो अग्रिम कार्रवाई कराएंगे।
-प्रो. सौदान सिंह, कुलपति, उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय।