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विश्व में स्थितरता को यूक्रेन संकट का शीघ्र हो समाधान
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एसएमजेएन कॉलेज में आयोजित गोष्ठी में संबोधित करते कॉलेज के प्राचार्य डा. सुनील कुमार बत्रा ।
- फोटो : HARIDWAR
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यूक्रेन संकट पर एसएमजेएन (पीजी) कॉलेज में आंतरिक गुणवत्ता प्रकोष्ठ की ओर से हुई गोष्ठी में
वक्ताओं ने विश्व में स्थिरता के लिए शीघ्र समाधान होने की बात कही।
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुनील कुमार बत्रा ने कहा कि यूक्रेन संकट का शीघ्र समाधान नहीं होने से भारत के मूलभूत राष्ट्रीय हितों को प्रभावित हो सकते हैं। शीघ्र ही इसका समाधान किया जाना आवश्यक है। डॉ. बत्रा ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि अपने राष्ट्रहितों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक तैयारियों को अंजाम दें। उन्होंने कहा कि रूस दुनिया में कच्चे तेल और गैस का प्रमुख निर्यातक है। यदि पश्चिमी देश रूसी निर्यात पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाते हैं तो इससे ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि हो सकती है। रूस-यूक्रेन संकट के कारण न केवल ईंधन की कीमतें बढ़ेंगी। बल्कि इसका असर दूसरे कई अन्य उत्पादों पर भी पड़ेगा।
अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. संजय माहेश्वरी ने कहा कि ऐतिहासिक अन्याय को पुन: आधार बनाकर रूस की ओर से यूक्रेन पर आक्रमण किया गया है और यह स्थिति अत्यंत विचारणीय है। उन्होंने कहा कि यह युद्ध स्थानीय से अंतरराष्ट्रीय न बने इसके लिए प्रयास किया जाना चाहिए। राजनीति विज्ञान के विभाग अध्यक्ष विनय थपलियाल ने कहा कि रूसी लोगों के राष्ट्रीय चरित्र के बारे में कहा जाता है कि वे राष्ट्रीय अपमान आसानी से भूलते नहीं और 1991 के बाद नाटो के पूर्व में प्रसार को रोकने का जो आश्वासन अमेरिका की ओर से दिया गया था उसके उल्लंघन होने के कारण पुतिन ने इस प्रकार की प्रतिक्रिया दी है। समाजशास्त्र विभाग के अध्यक्ष डॉ. जगदीश चंद्र आर्य ने कहा कि छात्र-छात्राओं के यूक्रेन में फंसे होने के कारण भारत के राष्ट्रीय हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इस मौके पर वैभव बत्रा, दिव्यांश शर्मा, डॉ. मन मोहन गुप्ता, डॉ. सुषमा नयाल, डॉ. अमिता श्रीवास्तव, रिंकल गोयल, डॉ. सरोज शर्मा, डॉ. आशा शर्मा, डॉ. विनीता चौहान, डॉ. मोना शर्मा, डा. रेनू सिंह, अंतिमा त्यागी, मोहन चंद्र पांडेय आदि शिक्षक मौजूद रहे।
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वक्ताओं ने विश्व में स्थिरता के लिए शीघ्र समाधान होने की बात कही।
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुनील कुमार बत्रा ने कहा कि यूक्रेन संकट का शीघ्र समाधान नहीं होने से भारत के मूलभूत राष्ट्रीय हितों को प्रभावित हो सकते हैं। शीघ्र ही इसका समाधान किया जाना आवश्यक है। डॉ. बत्रा ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि अपने राष्ट्रहितों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक तैयारियों को अंजाम दें। उन्होंने कहा कि रूस दुनिया में कच्चे तेल और गैस का प्रमुख निर्यातक है। यदि पश्चिमी देश रूसी निर्यात पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाते हैं तो इससे ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि हो सकती है। रूस-यूक्रेन संकट के कारण न केवल ईंधन की कीमतें बढ़ेंगी। बल्कि इसका असर दूसरे कई अन्य उत्पादों पर भी पड़ेगा।
अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. संजय माहेश्वरी ने कहा कि ऐतिहासिक अन्याय को पुन: आधार बनाकर रूस की ओर से यूक्रेन पर आक्रमण किया गया है और यह स्थिति अत्यंत विचारणीय है। उन्होंने कहा कि यह युद्ध स्थानीय से अंतरराष्ट्रीय न बने इसके लिए प्रयास किया जाना चाहिए। राजनीति विज्ञान के विभाग अध्यक्ष विनय थपलियाल ने कहा कि रूसी लोगों के राष्ट्रीय चरित्र के बारे में कहा जाता है कि वे राष्ट्रीय अपमान आसानी से भूलते नहीं और 1991 के बाद नाटो के पूर्व में प्रसार को रोकने का जो आश्वासन अमेरिका की ओर से दिया गया था उसके उल्लंघन होने के कारण पुतिन ने इस प्रकार की प्रतिक्रिया दी है। समाजशास्त्र विभाग के अध्यक्ष डॉ. जगदीश चंद्र आर्य ने कहा कि छात्र-छात्राओं के यूक्रेन में फंसे होने के कारण भारत के राष्ट्रीय हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इस मौके पर वैभव बत्रा, दिव्यांश शर्मा, डॉ. मन मोहन गुप्ता, डॉ. सुषमा नयाल, डॉ. अमिता श्रीवास्तव, रिंकल गोयल, डॉ. सरोज शर्मा, डॉ. आशा शर्मा, डॉ. विनीता चौहान, डॉ. मोना शर्मा, डा. रेनू सिंह, अंतिमा त्यागी, मोहन चंद्र पांडेय आदि शिक्षक मौजूद रहे।
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