{"_id":"e79b35ae-e885-11e2-8462-d4ae52bc57c2","slug":"train-accident-in-haridwar","type":"story","status":"publish","title_hn":"ट्रेन हादसे में बाल-बाल बचे दो पोटर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ट्रेन हादसे में बाल-बाल बचे दो पोटर
हरिद्वार/मुनीश रियाल
Updated Tue, 09 Jul 2013 07:34 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरिद्वार प्लेटफार्म पर गंगा नगर एक्सप्रेस में शंटिंग के दौरान हुए हादसे में तकरीबन 15 यात्री घायल हो गए। इसके अलावा हादसे में दो पोटर भी बाल-बाल बचे हैं। दोनों पोटरों के ट्रैक पर उतरने ही वाले थे कि इंजन बोगी से भिड़ गया।
विज्ञापन
शंटिंग के वक्त पोर्टरों का काम इंजन और बोगी के वैक्यूम प्रेशर पाइप और कनेक्टिंग हुक को जोड़ने का होता है। पोटर शंटिंग के वक्त ट्रैक पर मौजूद होते हैं।
विज्ञापन
बोगी से सटकर खड़े रहकर इंजन के जुड़ने का इंतजार करते रहते हैं, जैसे ही इंजन बोगी से जुड़ता है, तुरंत कनेक्टिंग हुक लगाते हैं और फिर वैक्यूम प्रेशर पाइप को जोड़ देते हैं।
विज्ञापन
मंगलवार को गंगानगर एक्सप्रेस का इंजन शंटिंग के वक्त दो पोटर प्लेटफार्म नंबर एक पर खड़े थे। दोनों इंजन के करीब आने का इंतजार कर रहे थे, इंजन के करीब आते ही उन्हें ट्रैक पर उतरना था। लेकिन जैसे वह ट्रैक पर उतरने को जाते, तभी इंजन तेजी से आया और बोगी से भीड़ गया।
हादसे के वक्त दोनों पोटर बेहद घबरा गए और इस बात की कल्पना करने लगे अगर वह ट्रैक पर होते तो उनका क्या हाल होता।
तो शंटिंग पायलट की लापरवाही से हुआ हादसा
रेलवे विभाग के सूत्रों की मानें तो प्रथम दृष्टता हादसा शंटिंग पायलट की लापरवाही से हादसा हुआ। जिस तेज गति से इंजन बोगियों से टकराया उसमें लापरवाही साफ झलक रही है। बोगी के सामने होते हुए भी शंटिंग पाइयट ने इंजन की गति को कम नहीं की। जबकि इंजन को शंटिंग करते वक्त कदम कदम की दूरी पर इंजन को रूक रूक कर चलाया जाता है।
शंटिंग मास्टर भी जांच के दायरे में है। शंटिंग मास्टर की ओर से शंटिंग पायटल को लगातार ग्रीन सिग्नल दिया जाता रहा। हालांकि मामले में जांच चल रही है। इंजन में तकनीकी गड़बड़ भी हादसे की वजह हो सकती है।
दुख दूर करने आए थे, दर्द लेकर लौटे
गंगा में स्नान कर दुख दूर करने आए यात्री हादसे के बाद दर्द लेकर लौटे। हादसे का शिकार हुए ज्यादातर यात्री सोमवती अमावस्या पर हरिद्वार में स्नान करने के लिए आये थे। जिस समय इंजन ने बोगी पर टक्कर मारी यात्री झटक कर इधर-उधर गिरे।
जो यात्री ऊपर वाली बर्थ में चले गए थे वह धड़ाम से नीचे गिरे। कुछ यात्री ट्रेन में चढ़ रहे थे, उन्हें भी झटके गिरा दिया। कई यात्रियों का सामान भी क्षतिग्रस्त हो गया।
यात्रियों की मुंह जुवानी
'अपने भाई के पास बिजनौर गया था। आज अपने घर बीकानेर जा रहा था। इंजन की टक्कर लगी के वक्त जोर से झटका लगा। मेरा सिर जोर से डिब्बे पर टकराया। जिससे चोटिल हो गया।'
मांगेलाल, बीकानेर राजस्थान
' देश के सभी शहरों में ट्रेन से यात्रा की। लेकिन ऐसा हादसा कभी नहीं हुआ। मैं ट्रेन में चढ़ रहा था एकदम नीचे गिर कर बेहोश हो गया। मेरे सिर पर चोट आयी हैं। बहुत दर्द हो रहा है।'
बाबू माधोर, गंगानगर
'जैसे ही इंजन की टक्कर बोगी पर लगी मेरा सिर एकदम सामने की सीट से टकरा गया, चोट लगी खून बहने लगा। अफरा-तफरी मची तो सब बाहर को दौड़े। ऊपर वाले का शुक्र है बच गए।'
नेतराम, भटिंडा पंजाब
'सोमवती अमावस्या पर स्नान करने के बहाने पहली बार हरिद्वार आया था। सोमवार को स्नान करने के बाद पूरे दिन हरिद्वार के विभिन्न मंदिरों में जाकर पूजा अर्चना की। आज जाते वक्त हादसा हो गया।'
रामसुंदर, गंगानगर राजस्थान