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इन अस्पतालों में ताला ही लगा दो ‘सरकार’
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Fri, 23 Dec 2016 10:44 PM IST
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पहले से ही डाक्टरों की कमी से जूझ रहे जिला अस्पताल के तीन और चिकित्सकों को तबादला हो गया है। अस्पताल के लिए स्वीकृत 20 पदों के मुकाबले अब आधे से कम आठ चिकित्सक ही तैनात हैं। इन आठ डाक्टरों के भरोसे ही ओपीडी, इमरजेंसी, वीआईपी ड्यूटी और पोस्टमार्टम व्यवस्था होगी। ऐसे में जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों का मर्ज और बढ़ने वाला है।
हरिद्वार जिला अस्पताल पर शहर के अलावा बाहदाराबाद और लक्सर ब्लाक के कई गांवों के स्वास्थ्य का जिम्मा है। इन ब्लाकों में प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति ठीक नहीं है। ऐसे में यहां के मरीज भी हरिद्वार जिला अस्पताल का रुख करते हैं। पंचपुरी के तीनों अस्पतालों में मरीजों का इलाज कराना मुश्किल हो गया है। भारी भरकम इमारतों और आधुनिक सुविधाओं का लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। जिला अस्पताल के तीन डाक्टरों के तबादला आदेश शासन से हो जाने पर दो को रिलीव कर दिया गया। इनके स्थान पर कोई डाक्टर यहां के लिए नहीं भेजा गया है। मेला अस्पताल से भी प्रमुख डाक्टर का भी तबादला कर रिलीव करने के लिए शासन की ओर से दवाब है।
जिला अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. जेएस चुफाल का तबादला बागेश्वर के लिए कर दिया गया। इनसे पहले दो सप्ताह पूर्व अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट डा. एसके द्विवेेदी रुद्रप्रयाग चले गए। अब अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग एवं अन्य संक्रमित बीमारियों के विशेषज्ञ डा. संदीप निगम का महिला अस्पताल के लिए तबादला कर दिया। अब इन तीन डाक्टरों के तबादले के बाद केवल आठ डाक्टर है, लेकिन इनके भरोसे ओपीडी, इमरजेंसी, वीआईपी, पोस्टमार्टम, अन्य सरकारी कार्यक्रम आदि चलाना मुश्किल है। सीएमएस डा. आरती ढौंढियाल का कहना है कि उच्च अधिकारियों को स्थिति से लिखित में अवगत कराया है, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में अस्पताल की इलाज व्यवस्था चरमरा जाएगी।
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एक डाक्टर पर तीन प्रभार
जिला एवं मेला अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में जांच के आधुनिक उपकरण हैं, लेकिन इन उपकरणों का लाभ मरीजों तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त पैथोलॉजिस्ट नहीं हैं। मेला अस्पताल के में तो पैथोलॉजिस्ट डा. एसएन खान नियुक्त है, लेकिन ब्लडबैंक का चार्ज भी उनके पास हैं। डा. एसएन खान दोनों कार्यभार जैसे तैसे संभाल रहे थे, लेकिन पिछले आठ महीने से जिला अस्पताल की लैब का कार्यभार भी इन्हीं पर है। दो अस्पताल के लैब और ब्लड बैंक एक विशेषज्ञ को चलाना मुश्किल हो रहा है।
महिला अस्पताल का भी यही हाल
महिला अस्पताल मात्र तीन डाक्टरों के भरोसे है। जिनमें एक बाल रोग विशेषज्ञ तो दूसरी डाक्टर सीएमएस है। मात्र एक स्त्री रोग विशेषज्ञ के बलबूते अस्पताल चल रहा है। महिला अस्पताल में प्रतिदिन 300 तक ओपीडी और 10 से 12 गर्भवतियों की डिलीवरी होती है। सीएमएस डा. भवानी पाल का कहना है कि जैसे तैसे व्यवस्था चलाई जा रही है।
मेला अस्पताल से भी एक डाक्टर का तबादला
100 बेड का मेला अस्पताल। आधुनिक सुविधाओं से लैस। आलीशान इमारत, लेकिन किसी भी सुविधा का लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। डाक्टर की कमी के चलते मरीजों ने भी आना कम कर दिया। अब अस्पताल में केवल दो डाक्टर स्थायी बचे है। जिनमें से हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. मनोज द्विवेदी का तबादला नैनीताल कर दिया है, हालांकि उन्हें अभी रिलीव नहीं किया गया है। इनके अलावा त्वचा रोग विशेषज्ञ एवं अधीक्षक डा. एचके सिंह हैं। उनके सहयोग में दो संविदा के डाक्टर है, लेकिन इन दोनों डाक्टरों से जिला अस्पताल में इमरजेंसी में ड्यूटी ली जा रही है। अधीक्षक डा. एचके सिंह का कहना है कि डा. मनोज द्विवेदी को रिलीव करने से पूर्व स्वास्थ्य महानिदेशक को स्थिति से अवगत कराया है।
हरिद्वार जिला अस्पताल पर शहर के अलावा बाहदाराबाद और लक्सर ब्लाक के कई गांवों के स्वास्थ्य का जिम्मा है। इन ब्लाकों में प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति ठीक नहीं है। ऐसे में यहां के मरीज भी हरिद्वार जिला अस्पताल का रुख करते हैं। पंचपुरी के तीनों अस्पतालों में मरीजों का इलाज कराना मुश्किल हो गया है। भारी भरकम इमारतों और आधुनिक सुविधाओं का लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। जिला अस्पताल के तीन डाक्टरों के तबादला आदेश शासन से हो जाने पर दो को रिलीव कर दिया गया। इनके स्थान पर कोई डाक्टर यहां के लिए नहीं भेजा गया है। मेला अस्पताल से भी प्रमुख डाक्टर का भी तबादला कर रिलीव करने के लिए शासन की ओर से दवाब है।
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जिला अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. जेएस चुफाल का तबादला बागेश्वर के लिए कर दिया गया। इनसे पहले दो सप्ताह पूर्व अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट डा. एसके द्विवेेदी रुद्रप्रयाग चले गए। अब अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग एवं अन्य संक्रमित बीमारियों के विशेषज्ञ डा. संदीप निगम का महिला अस्पताल के लिए तबादला कर दिया। अब इन तीन डाक्टरों के तबादले के बाद केवल आठ डाक्टर है, लेकिन इनके भरोसे ओपीडी, इमरजेंसी, वीआईपी, पोस्टमार्टम, अन्य सरकारी कार्यक्रम आदि चलाना मुश्किल है। सीएमएस डा. आरती ढौंढियाल का कहना है कि उच्च अधिकारियों को स्थिति से लिखित में अवगत कराया है, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में अस्पताल की इलाज व्यवस्था चरमरा जाएगी।
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एक डाक्टर पर तीन प्रभार
जिला एवं मेला अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में जांच के आधुनिक उपकरण हैं, लेकिन इन उपकरणों का लाभ मरीजों तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त पैथोलॉजिस्ट नहीं हैं। मेला अस्पताल के में तो पैथोलॉजिस्ट डा. एसएन खान नियुक्त है, लेकिन ब्लडबैंक का चार्ज भी उनके पास हैं। डा. एसएन खान दोनों कार्यभार जैसे तैसे संभाल रहे थे, लेकिन पिछले आठ महीने से जिला अस्पताल की लैब का कार्यभार भी इन्हीं पर है। दो अस्पताल के लैब और ब्लड बैंक एक विशेषज्ञ को चलाना मुश्किल हो रहा है।
महिला अस्पताल का भी यही हाल
महिला अस्पताल मात्र तीन डाक्टरों के भरोसे है। जिनमें एक बाल रोग विशेषज्ञ तो दूसरी डाक्टर सीएमएस है। मात्र एक स्त्री रोग विशेषज्ञ के बलबूते अस्पताल चल रहा है। महिला अस्पताल में प्रतिदिन 300 तक ओपीडी और 10 से 12 गर्भवतियों की डिलीवरी होती है। सीएमएस डा. भवानी पाल का कहना है कि जैसे तैसे व्यवस्था चलाई जा रही है।
मेला अस्पताल से भी एक डाक्टर का तबादला
100 बेड का मेला अस्पताल। आधुनिक सुविधाओं से लैस। आलीशान इमारत, लेकिन किसी भी सुविधा का लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। डाक्टर की कमी के चलते मरीजों ने भी आना कम कर दिया। अब अस्पताल में केवल दो डाक्टर स्थायी बचे है। जिनमें से हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. मनोज द्विवेदी का तबादला नैनीताल कर दिया है, हालांकि उन्हें अभी रिलीव नहीं किया गया है। इनके अलावा त्वचा रोग विशेषज्ञ एवं अधीक्षक डा. एचके सिंह हैं। उनके सहयोग में दो संविदा के डाक्टर है, लेकिन इन दोनों डाक्टरों से जिला अस्पताल में इमरजेंसी में ड्यूटी ली जा रही है। अधीक्षक डा. एचके सिंह का कहना है कि डा. मनोज द्विवेदी को रिलीव करने से पूर्व स्वास्थ्य महानिदेशक को स्थिति से अवगत कराया है।