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डेंगू मरीजों के लिए नहीं होगी प्लेटलेट्स की कमी
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हरिद्वार। प्लेटलेट्स की कमी से जूझने वाले डेंगू, ल्यूकेमिया, एप्लास्टिक एनीमिया आदि रोगों के मरीजों के लिए एफेरेसिस मशीन वरदान साबित होगी। जिले के सरकारी ब्लड बैंक में यह मशीन लग गई है। इस मशीन के लगने से मरीज को प्लेटलेट्स के लिए कई रक्तदाताओं को नहीं तलाशना पड़ेगा। एक ही रक्तदाता के खून से प्लेटलेट्स निकाल कर मशीन बाकी रक्तदाता के शरीर में लौटा देगी। निजी ब्लड बैंकों में प्लेटलेट्स निकलवाने के लिए 15 हजार रुपये लगते हैं, जबकि सरकारी अस्पताल में उपचार कराने वालों के लिए अब यह सुविधा निशुल्क होगी। वहीं निजी अस्पताल में इलाज कराने वालों को सात हजार रुपये जमा करने होंगे।
डेंगू के सीजन में अब डेंगू मरीजों को प्लेटलेट्स की कमी नहीं होगी। जिले के सरकारी ब्लड बैंक में एफेरेसिस मशीन लग गई है। इससे हरिद्वार समेत आसपास के जिलों केे मरीजों को भी लाभ मिलेगा। मेला अस्पताल के सीएमएस डॉ. राजेश गुप्ता ने बताया कि अस्पताल के रक्त कोष में एफेरेसिस मशीन लगाई गई है। मशीन का निरीक्षण केंद्रीय औषधि विभाग के अधिकारी संदीप कुमार व जिला औषधि निरीक्षक अनीता भारती कर चुकी हैं। इस मशीन से अब एक यूनिट रक्तदान पर भी 10 गुना अधिक प्लेटलेट्स तैयार हो जाएंगे। इस सुविधा से डेंगू मरीजों के परिजनों को इधर-उधर नहीं भटकना पड़ेगा। ब्लड बैंक के प्रभारी महावीर चौहान ने बताया कि एफेरेसिस मशीन एक दानदाता के रक्त से प्लेटलेट्स या प्लाज्मा अलग करने और बाकी रक्त रक्तदाता के शरीर में वापस लौटाने में लगभग एक घंटे का समय लेती है। साधारण रक्तदान में एक यूनिट रक्त से मात्र पांच हजार प्लेटलेट्स और 160 मिलीलीटर प्लाज्मा निकलता था। इस मशीन के जरिए एक यूनिट रक्त से 30 हजार प्लेट्लेट्स और 450 मिलीलीटर प्लाज्मा लिया जा सकेगा।
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क्या है एफेरेसिस मशीन
एफेरेसिस मशीन के जरिए किसी रक्तदाता के रक्त से सिर्फ जरूरी अवयव ही निकाले जाते हैं। बाकी रक्त रक्तदाता के शरीर में लौटा दिया जाता है। इस मशीन की बाजार में कीमत 25 लाख रुपये के करीब है, जबकि सीएमएस राजेश गुप्ता के प्रयासों के बाद इसे जेम पोर्टल के माध्यम से 15 लाख रुपये के खरीदा गया है।
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पहले डोनर की होगी पूरी जांच
रक्तकोष प्रभारी डॉ. महावीर चौहान ने बताया कि डोनर के रक्त से प्लेटलेट्स निकालने से पूर्व उसकी संपूर्ण जांचें कराई जाएंगी। इसमें सीबीसी, प्लेटलेट्स काउंट, जीबीपी, वजन, वेट और हाइट आदि का परीक्षण किया जाएगा। सभी जांचें उपयुक्त होने पर प्लेटलेट्स डोनेट किए जाते हैं। मेला अस्पताल के पास स्थित ब्लड बैंक में ब्लड एफेरेसिस मशीन लगाई जा चुकी है। इसको चलाने के लिए औषधि विभाग में लाइसेंस के लिए आवेदन किया गया है।
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डेंगू के सीजन में अब डेंगू मरीजों को प्लेटलेट्स की कमी नहीं होगी। जिले के सरकारी ब्लड बैंक में एफेरेसिस मशीन लग गई है। इससे हरिद्वार समेत आसपास के जिलों केे मरीजों को भी लाभ मिलेगा। मेला अस्पताल के सीएमएस डॉ. राजेश गुप्ता ने बताया कि अस्पताल के रक्त कोष में एफेरेसिस मशीन लगाई गई है। मशीन का निरीक्षण केंद्रीय औषधि विभाग के अधिकारी संदीप कुमार व जिला औषधि निरीक्षक अनीता भारती कर चुकी हैं। इस मशीन से अब एक यूनिट रक्तदान पर भी 10 गुना अधिक प्लेटलेट्स तैयार हो जाएंगे। इस सुविधा से डेंगू मरीजों के परिजनों को इधर-उधर नहीं भटकना पड़ेगा। ब्लड बैंक के प्रभारी महावीर चौहान ने बताया कि एफेरेसिस मशीन एक दानदाता के रक्त से प्लेटलेट्स या प्लाज्मा अलग करने और बाकी रक्त रक्तदाता के शरीर में वापस लौटाने में लगभग एक घंटे का समय लेती है। साधारण रक्तदान में एक यूनिट रक्त से मात्र पांच हजार प्लेटलेट्स और 160 मिलीलीटर प्लाज्मा निकलता था। इस मशीन के जरिए एक यूनिट रक्त से 30 हजार प्लेट्लेट्स और 450 मिलीलीटर प्लाज्मा लिया जा सकेगा।
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क्या है एफेरेसिस मशीन
एफेरेसिस मशीन के जरिए किसी रक्तदाता के रक्त से सिर्फ जरूरी अवयव ही निकाले जाते हैं। बाकी रक्त रक्तदाता के शरीर में लौटा दिया जाता है। इस मशीन की बाजार में कीमत 25 लाख रुपये के करीब है, जबकि सीएमएस राजेश गुप्ता के प्रयासों के बाद इसे जेम पोर्टल के माध्यम से 15 लाख रुपये के खरीदा गया है।
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पहले डोनर की होगी पूरी जांच
रक्तकोष प्रभारी डॉ. महावीर चौहान ने बताया कि डोनर के रक्त से प्लेटलेट्स निकालने से पूर्व उसकी संपूर्ण जांचें कराई जाएंगी। इसमें सीबीसी, प्लेटलेट्स काउंट, जीबीपी, वजन, वेट और हाइट आदि का परीक्षण किया जाएगा। सभी जांचें उपयुक्त होने पर प्लेटलेट्स डोनेट किए जाते हैं। मेला अस्पताल के पास स्थित ब्लड बैंक में ब्लड एफेरेसिस मशीन लगाई जा चुकी है। इसको चलाने के लिए औषधि विभाग में लाइसेंस के लिए आवेदन किया गया है।