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Haridwar News: हरिद्वार जिले में नहीं हैं कैंसर की जांच और इलाज की सुविधा
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Iकीमोथेरेपी के लिए एम्स ऋषिकेश, हिमालयन हॉस्पिटल व देहरादून या दिल्ली जाने की मजबूरीI
जिले में कैंसर के इलाज और जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। सरकारी के अलावा निजी अस्पतालों में भी यह सुविधा नहीं होने के कारण कैंसर के प्राथमिक लक्षण की जांच के लिए भी मरीजों को दूसरे शहरों की दौड़ लगानी पड़ती है। कीमोथेरेपी व अन्य उपचार के लिए भी मरीज एम्स ऋषिकेश, हिमालयन हॉस्पिटल, देहरादून या दिल्ली के अस्पतालों पर ही निर्भर हैं।
जिला मुख्यालय में मेला, महिला और जिला अस्पताल हैं। यहां पर डॉ. तरनजीत सिंह कैंसर रोग विशेषज्ञ के रूप में तैनात हैं, जो ओपीडी में मरीजों को देखते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए गंगा प्रेम हॉस्पिटल से अनुबंध किया हुआ है। लेकिन यहां भी जांच की व्यवस्था नहीं होने के चलते मरीजों को पूरी सुविधा नहीं मिल पा रही है।
वहीं आयुर्वेद विश्वविद्यालय के भी दो परिसर जिला मुख्यालय में हैं। इनमें ऋषिकुल और गुरुकुल आयुर्वेदिक कॉलेज में भी इस चिकित्सा पद्धति से कैंसर के इलाज की सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी है। जिले में करीब दो दर्जन से अधिक निजी अस्पताल हैं, लेकिन यहां भी कैंसर की जांच और इलाज की सुविधा नहीं है।
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मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. मनीष दत्त ने बताया कि जिले में कहीं भी कैंसर के इलाज की सुविधा नहीं है। हालांकि पीएमएस डॉ. सीपी त्रिपाठी कुछ स्टाफ के साथ रोगियों को परामर्श दे रहे हैं। कुछ स्टाफ को प्रशिक्षण के लिए भेजा गया है। सुविधाएं विकसित हो सकें, इसके लिए शासन स्तर पर प्रस्ताव जल्द भेजा जाएगा। कम से कम कीमोथेरेपी और एनकोलॉजिस्ट की सुविधा स्थानीय स्तर पर मिले इसके लिए शासन स्तर पर पत्र व्यवहार किया गया है।
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जिले में कैंसर के इलाज और जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। सरकारी के अलावा निजी अस्पतालों में भी यह सुविधा नहीं होने के कारण कैंसर के प्राथमिक लक्षण की जांच के लिए भी मरीजों को दूसरे शहरों की दौड़ लगानी पड़ती है। कीमोथेरेपी व अन्य उपचार के लिए भी मरीज एम्स ऋषिकेश, हिमालयन हॉस्पिटल, देहरादून या दिल्ली के अस्पतालों पर ही निर्भर हैं।
जिला मुख्यालय में मेला, महिला और जिला अस्पताल हैं। यहां पर डॉ. तरनजीत सिंह कैंसर रोग विशेषज्ञ के रूप में तैनात हैं, जो ओपीडी में मरीजों को देखते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए गंगा प्रेम हॉस्पिटल से अनुबंध किया हुआ है। लेकिन यहां भी जांच की व्यवस्था नहीं होने के चलते मरीजों को पूरी सुविधा नहीं मिल पा रही है।
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वहीं आयुर्वेद विश्वविद्यालय के भी दो परिसर जिला मुख्यालय में हैं। इनमें ऋषिकुल और गुरुकुल आयुर्वेदिक कॉलेज में भी इस चिकित्सा पद्धति से कैंसर के इलाज की सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी है। जिले में करीब दो दर्जन से अधिक निजी अस्पताल हैं, लेकिन यहां भी कैंसर की जांच और इलाज की सुविधा नहीं है।
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मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. मनीष दत्त ने बताया कि जिले में कहीं भी कैंसर के इलाज की सुविधा नहीं है। हालांकि पीएमएस डॉ. सीपी त्रिपाठी कुछ स्टाफ के साथ रोगियों को परामर्श दे रहे हैं। कुछ स्टाफ को प्रशिक्षण के लिए भेजा गया है। सुविधाएं विकसित हो सकें, इसके लिए शासन स्तर पर प्रस्ताव जल्द भेजा जाएगा। कम से कम कीमोथेरेपी और एनकोलॉजिस्ट की सुविधा स्थानीय स्तर पर मिले इसके लिए शासन स्तर पर पत्र व्यवहार किया गया है।