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जिम्मेदार ही कर रहे गंगा को मैली
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Sat, 03 Dec 2016 10:46 PM IST
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गंगा की स्वच्छता को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश के निशाने पर हरिद्वार के कई उद्योग, होटल, धर्मशालाएं और औद्योगिक इकाईयां भी आ गई हैं। हाईकोर्ट ने जिस सूची के आधार पर यह फैसला सुनाया है उसमें योग गुरु बाबा रामदेव के पतंजलि ग्रुप की दो इकाईयों और निजी क्षेत्र के हीरो मोटो कॉर्प जैसी इकाईयां भी शामिल हैं। प्रशासन का दावा है कि हाईकोर्ट का आदेश मिलने के बाद ही कार्रवाई की जाएगी।
गंगा की स्वच्छता के लिए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने गंगा एक्शन प्लान की शुरूआत हरिद्वार से की थी। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई का गठन कराया था। गंगा सफाई के नाम पर तब से अरबों रुपया खर्च हो चुका है। लेकिन गंगा स्वच्छ एवं निर्मल नहीं हो सकी है। गंगा स्वच्छता के लिए एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) भी पिछलेे दो सालों से सक्रिय है। इसके बाद भी सिस्टम पटरी पर आता दिखाई नहीं दे रहा है। अब हाईकोर्ट के नए आदेश से कुछ उम्मीद दिखायी दे रही है।
उत्तरी हरिद्वार स्थित हरिपुर कलां, सप्तसरोवर क्षेत्र में कई आश्रमों में सीवरेज सिस्टम विकसित नहीं हो सका। ऐसे में अधिकतर संस्थाओं का सीवरेज गंगा में ही प्रभावित होता है। चंडीघाट के नीचे बसी अवैध बस्तियां सीधे ही गंगा को मैली कर रहे हैं। यहां स्थित दिव्य प्रेम मिशन में गंगा की रक्षा के लिए अनेक योजनाएं देश के जिम्मेेदार मंत्री और अन्य जनप्रतिनिधि बनाते रहते हैं। लेकिन यहां काफी सीवरेज सिस्टम भी सीधे गंगा में ही गिर रहा है। जिस सूची पर हाईकोर्ट का निर्णय आया है उसमें बाबा रामदेव की पतंजलि ग्रुप की दो इकाईयां पतंजलि आयुर्वेदिक लिमिटेड संख्या तीन पदार्था लक्सर, पदार्था में स्थित पतंजलि हर्बल फूड पार्क का नाम भी शामिल है।
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इसके अलावा नील मेटल प्रोडक्टस सिडकुल, हीरो मोर्ट कॉर्प सिडकुल सहित कई कंपनियों के नाम भी शामिल किए गए हैं। इन सभी को वर्ष 2015 में प्रदूषण संबंधी मानकों का पालन नहीं करने पर क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। हालांकि स्वयं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी दावे कर रहे हैं कि इनमें से कई कंपनियों में से नोटिस जारी करने के बाद अपने यहां सुधारात्मक कदम उठाए हैं। बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डा. अंकुर कंसल ने बताया कि इन इकाईयों को पूर्व में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। उसके बाद कार्रवाई भी की गई । हाईकोर्ट का विधिवत निर्णय मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कागजों में नाले टैप, धरातल पर गंगा मैली
अधिवक्ता ललित मिगलानी की जिस जनहित याचिका पर नैनीताल हाईकोर्ट ने आदेश जारी किया है उन पर सुनवाई के दौरान शासन की ओर से दायर किए हलफनामे में गंगा में गिर रहे कई नालों को पूरी तरह से टैप किया गया बताया है। लेकिन मौके पर हकीकत कुछ और है। लोकनाथ घाट के नालों को पूरी तरह से टेप होना बताया गया है। यह सच है कि इन नाले को पूरी तरह से टेप किया गया था। नियमित रुप से सफाई न होने, क्षमता से अधिक गंदगी का दवाब होने के चलते यह नाला गंगा में बहता रहता है। इसी प्रकार भीमगोड़ा, नाइसोता, रेलवे का नाला, कुशाघाट, मायापुर, बेलदेई, देवपुरा, आवास विकास आदि का नाले की भी स्थिति यही है। यह सभी नाले गंगा को प्रदूषित कर रहे हैं।
शहर की व्यवस्था नमामि गंगे योजनाकारों का मुंह चिढ़ा रहे हैं। नालों के अलावा सरकारी स्तर पर घोषित शहर का 20 एमएलडी सीवर गंगा में जा रहा है। गैर सरकारी अनुमान के मुताबिक इससे कहीं अधिक मात्रा में सीवर गंगा नदी में बहाया जा रहा है। गंगा में गिर रहे सीवर के शोधन के लिए जगजीतपुर में बनने वाला सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) निविदा के बाद लांच हुई केंद्र की नमामि गंगे योजना ने जहां के तहां अटका कर छुड़वा दिया है। निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई (गंगा) के इंजीनियर और कर्मचारी एक साल से खाली बैठे हैं। सात जुलाई को नमामि गंगे योजना का शुभारंभ कर दिया गया था। इसके बाद कोई नया काम तो अभी तक शुरू नहीं हुआ। इसके विपरीत जो काम चल भी रहे थे उन्हें रोक दिया गया। नालों की गंदगी गंगा में जाने से रोकने के लिए घाटों के किनारे से एक ड्रेनेज (नाला) बनाने की डीपीआर भी तैयार कर केंद्र को भेजी जा चुकी है। केंद्र के योजनाकारों ने राज्य सरकार के विभाग से काम कराने के लिए बजाए केंद्र से अनुबंधित एजेंसी से नमामि गंगे का काम कराने का निर्णय कर ड्रेेनेज की योजना को भी जहां के तहां अटका दिया है। गंगा पर घाट व श्मशान घाट बनाने की योजना भी शुरू नहीं हो पाई है। औद्योगिक क्षेत्र के निकलने वाले केमिकल और अनेक बस्तियों की गंदगी को बहाने वाली ललतारौ जिसे काली नदी कहा जाता है सहित शहर के नौ बड़े गंदे नाले गंगा में निरंतर बह रहे हैं।
बोले अधिकारी
अभी माननीय हाईकोर्ट के न्यायालय की आदेश की प्रति प्राप्त नहीं हुई है। प्रति प्राप्त होने पर अध्ययन करके संबंधित विभागों से समुचित कार्रवाई कराई जाएगी।
हरबंस सिंह चुघ, जिलाधिकारी हरिद्वार
होटल और धर्मशाला प्रबंधकों में हड़कंप
हाईकोर्ट की ओर से प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का अनुपालन नहीं पर होटल और धर्मशालाओं को बंद करने के आदेश के बाद दिनभर होटल और धर्मशाला के प्रबंधकों में हड़कंप मचा रहा। दिनभर एक दूसरे को फोन कर मामले की जानकारी लेते रहे। होटल एसोसिएशन के प्रवक्ता आशुतोष शर्मा का कहना है कि जो भी आदेश मिलेगा उसके अनुरूप व्यवस्था की जाएगी। सभी आदेशों का अनुपालन करने के लिए होटल स्वामी तैयार हैं।
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गंगा की स्वच्छता के लिए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने गंगा एक्शन प्लान की शुरूआत हरिद्वार से की थी। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई का गठन कराया था। गंगा सफाई के नाम पर तब से अरबों रुपया खर्च हो चुका है। लेकिन गंगा स्वच्छ एवं निर्मल नहीं हो सकी है। गंगा स्वच्छता के लिए एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) भी पिछलेे दो सालों से सक्रिय है। इसके बाद भी सिस्टम पटरी पर आता दिखाई नहीं दे रहा है। अब हाईकोर्ट के नए आदेश से कुछ उम्मीद दिखायी दे रही है।
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उत्तरी हरिद्वार स्थित हरिपुर कलां, सप्तसरोवर क्षेत्र में कई आश्रमों में सीवरेज सिस्टम विकसित नहीं हो सका। ऐसे में अधिकतर संस्थाओं का सीवरेज गंगा में ही प्रभावित होता है। चंडीघाट के नीचे बसी अवैध बस्तियां सीधे ही गंगा को मैली कर रहे हैं। यहां स्थित दिव्य प्रेम मिशन में गंगा की रक्षा के लिए अनेक योजनाएं देश के जिम्मेेदार मंत्री और अन्य जनप्रतिनिधि बनाते रहते हैं। लेकिन यहां काफी सीवरेज सिस्टम भी सीधे गंगा में ही गिर रहा है। जिस सूची पर हाईकोर्ट का निर्णय आया है उसमें बाबा रामदेव की पतंजलि ग्रुप की दो इकाईयां पतंजलि आयुर्वेदिक लिमिटेड संख्या तीन पदार्था लक्सर, पदार्था में स्थित पतंजलि हर्बल फूड पार्क का नाम भी शामिल है।
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इसके अलावा नील मेटल प्रोडक्टस सिडकुल, हीरो मोर्ट कॉर्प सिडकुल सहित कई कंपनियों के नाम भी शामिल किए गए हैं। इन सभी को वर्ष 2015 में प्रदूषण संबंधी मानकों का पालन नहीं करने पर क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। हालांकि स्वयं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी दावे कर रहे हैं कि इनमें से कई कंपनियों में से नोटिस जारी करने के बाद अपने यहां सुधारात्मक कदम उठाए हैं। बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डा. अंकुर कंसल ने बताया कि इन इकाईयों को पूर्व में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। उसके बाद कार्रवाई भी की गई । हाईकोर्ट का विधिवत निर्णय मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कागजों में नाले टैप, धरातल पर गंगा मैली
अधिवक्ता ललित मिगलानी की जिस जनहित याचिका पर नैनीताल हाईकोर्ट ने आदेश जारी किया है उन पर सुनवाई के दौरान शासन की ओर से दायर किए हलफनामे में गंगा में गिर रहे कई नालों को पूरी तरह से टैप किया गया बताया है। लेकिन मौके पर हकीकत कुछ और है। लोकनाथ घाट के नालों को पूरी तरह से टेप होना बताया गया है। यह सच है कि इन नाले को पूरी तरह से टेप किया गया था। नियमित रुप से सफाई न होने, क्षमता से अधिक गंदगी का दवाब होने के चलते यह नाला गंगा में बहता रहता है। इसी प्रकार भीमगोड़ा, नाइसोता, रेलवे का नाला, कुशाघाट, मायापुर, बेलदेई, देवपुरा, आवास विकास आदि का नाले की भी स्थिति यही है। यह सभी नाले गंगा को प्रदूषित कर रहे हैं।
शहर की व्यवस्था नमामि गंगे योजनाकारों का मुंह चिढ़ा रहे हैं। नालों के अलावा सरकारी स्तर पर घोषित शहर का 20 एमएलडी सीवर गंगा में जा रहा है। गैर सरकारी अनुमान के मुताबिक इससे कहीं अधिक मात्रा में सीवर गंगा नदी में बहाया जा रहा है। गंगा में गिर रहे सीवर के शोधन के लिए जगजीतपुर में बनने वाला सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) निविदा के बाद लांच हुई केंद्र की नमामि गंगे योजना ने जहां के तहां अटका कर छुड़वा दिया है। निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई (गंगा) के इंजीनियर और कर्मचारी एक साल से खाली बैठे हैं। सात जुलाई को नमामि गंगे योजना का शुभारंभ कर दिया गया था। इसके बाद कोई नया काम तो अभी तक शुरू नहीं हुआ। इसके विपरीत जो काम चल भी रहे थे उन्हें रोक दिया गया। नालों की गंदगी गंगा में जाने से रोकने के लिए घाटों के किनारे से एक ड्रेनेज (नाला) बनाने की डीपीआर भी तैयार कर केंद्र को भेजी जा चुकी है। केंद्र के योजनाकारों ने राज्य सरकार के विभाग से काम कराने के लिए बजाए केंद्र से अनुबंधित एजेंसी से नमामि गंगे का काम कराने का निर्णय कर ड्रेेनेज की योजना को भी जहां के तहां अटका दिया है। गंगा पर घाट व श्मशान घाट बनाने की योजना भी शुरू नहीं हो पाई है। औद्योगिक क्षेत्र के निकलने वाले केमिकल और अनेक बस्तियों की गंदगी को बहाने वाली ललतारौ जिसे काली नदी कहा जाता है सहित शहर के नौ बड़े गंदे नाले गंगा में निरंतर बह रहे हैं।
बोले अधिकारी
अभी माननीय हाईकोर्ट के न्यायालय की आदेश की प्रति प्राप्त नहीं हुई है। प्रति प्राप्त होने पर अध्ययन करके संबंधित विभागों से समुचित कार्रवाई कराई जाएगी।
हरबंस सिंह चुघ, जिलाधिकारी हरिद्वार
होटल और धर्मशाला प्रबंधकों में हड़कंप
हाईकोर्ट की ओर से प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का अनुपालन नहीं पर होटल और धर्मशालाओं को बंद करने के आदेश के बाद दिनभर होटल और धर्मशाला के प्रबंधकों में हड़कंप मचा रहा। दिनभर एक दूसरे को फोन कर मामले की जानकारी लेते रहे। होटल एसोसिएशन के प्रवक्ता आशुतोष शर्मा का कहना है कि जो भी आदेश मिलेगा उसके अनुरूप व्यवस्था की जाएगी। सभी आदेशों का अनुपालन करने के लिए होटल स्वामी तैयार हैं।