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फिर बाहर आया दवा घोटाले का जिन्न
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Fri, 12 May 2017 10:06 PM IST
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केंद्रीय वित्त पोषित राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) में उत्तराखंड में हुए 600 करोड़ रुपये के दवा घोटाले का जिन्न एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। गर्भवती महिलाओं के पोषण के लिए मुफ्त दी जाने वाली दवाइयों को उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग ने बांटने के बजाय उन्हें एक्सपायर होने दिया और फिर ड्रगवेयर हाउस रुड़की से निकलवाकर नाले में फिंकवा दिया था।
वर्ष 2013 में इस घोटाले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने के आदेश हो गए थे, लेकिन सीबीआई जांच को दबाकर बैठी हुई है। अब केंद्रीय सूचना आयोग के आदेश के बाद सीबीआई देहरादून के अधीक्षक को इस घोटाले की जांच की प्रगति के बारे में बतना होगा। केंद्रीय सूचना आयुक्त मंजुला पाराशर ने सीबीआई मुख्यालय नई दिल्ली का भी स्पष्टीकरण तलब किया है। 31 मार्च के इस आदेश के अनुपालन में सीबीआई मुख्यालय दिल्ली ने 21 अप्रैल को सीबीआई अधीक्षक देहरादून को निर्देशित किया है कि सुभाषघाट हरिद्वार निवासी रमेश चंद्र शर्मा को उनके 2 फरवरी 2015 के आवेदन के सापेक्ष तीन वर्ष से लंबित दवा घोटाले की सीबीआई जांच प्रक्रिया के बारे में प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध करा दी जाए। गौरतलब है कि रमेश चंद्र शर्मा की द्वितीय अपील का निस्तारण करते हुए उत्तराखंड सूचना आयुक्त अनिल कुमार शर्मा ने सूबे के स्वास्थ्य महानिदेशक की ओर से घोटाले की जांच कराने में असमर्थता जताने पर दिसंबर 2013 में घोटाले की सीबीआई से जांच कराने की संस्तुति की थी। जिस पर तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 11 अप्रैल 2014 को सीबीआई से जांच कराने का आदेश पारित कर दिया था। इसके बाद गृह विभाग ने जांच के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया था। सीबीआई मुख्यालय नई दिल्ली ने प्रकरण दर्ज कर जांच के लिए उत्तराखंड सीबीआई प्रमुख को भेज दिया था, परंतु सीबीआई तीन साल से जांच को दबाकर बैठी है।
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वर्ष 2013 में इस घोटाले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने के आदेश हो गए थे, लेकिन सीबीआई जांच को दबाकर बैठी हुई है। अब केंद्रीय सूचना आयोग के आदेश के बाद सीबीआई देहरादून के अधीक्षक को इस घोटाले की जांच की प्रगति के बारे में बतना होगा। केंद्रीय सूचना आयुक्त मंजुला पाराशर ने सीबीआई मुख्यालय नई दिल्ली का भी स्पष्टीकरण तलब किया है। 31 मार्च के इस आदेश के अनुपालन में सीबीआई मुख्यालय दिल्ली ने 21 अप्रैल को सीबीआई अधीक्षक देहरादून को निर्देशित किया है कि सुभाषघाट हरिद्वार निवासी रमेश चंद्र शर्मा को उनके 2 फरवरी 2015 के आवेदन के सापेक्ष तीन वर्ष से लंबित दवा घोटाले की सीबीआई जांच प्रक्रिया के बारे में प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध करा दी जाए। गौरतलब है कि रमेश चंद्र शर्मा की द्वितीय अपील का निस्तारण करते हुए उत्तराखंड सूचना आयुक्त अनिल कुमार शर्मा ने सूबे के स्वास्थ्य महानिदेशक की ओर से घोटाले की जांच कराने में असमर्थता जताने पर दिसंबर 2013 में घोटाले की सीबीआई से जांच कराने की संस्तुति की थी। जिस पर तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 11 अप्रैल 2014 को सीबीआई से जांच कराने का आदेश पारित कर दिया था। इसके बाद गृह विभाग ने जांच के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया था। सीबीआई मुख्यालय नई दिल्ली ने प्रकरण दर्ज कर जांच के लिए उत्तराखंड सीबीआई प्रमुख को भेज दिया था, परंतु सीबीआई तीन साल से जांच को दबाकर बैठी है।
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