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माघ शुक्ल पक्ष से प्रारंभ हो जाएंगे गुप्त नवरात्र
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Tue, 24 Jan 2017 09:56 PM IST
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मौनी अमावस्या का स्नान होते ही माघ शुक्ल पक्ष में नौ दिनों के गुप्त नवरात्र पड़ रहे हैं। शुक्ल प्रतिपदा से मां भगवती की गुप्त आराधना शुरू हो जाएगी। वर्ष में चार बार नवरात्र पड़ते हैं, जिनमें से आषाढ़ और माघ के नवरात्रों की गणना गुप्त नवरात्रों में की जाती है। इन नवरात्रों में अनेक साधक निर्जन क्षेत्रों में जाकर व्रत और साधना करते हैं।
गुप्त नवरात्रों में गंगा स्नान का व्यापक महत्व बताया गया है। ज्योतिषाचार्य डा. प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार माघ शुक्ल पक्ष नवरात्र की आराधना वस्तुत: मौनी अमावस्या की रात से प्रारंभ हो जाती है। जिस प्रकार अश्विन मास में पड़ने वाले तथा चैत्र शुक्ल पक्ष में आने वाले नवरात्र आम समाज के लिए हैं, वहीं गुप्त नवरात्र तंत्र साधकों के लिए विशेष महत्व रखते हैं। गुप्त नवरात्रों में तृतीय नवरात्र को गौरी, पंचमी को सरस्वती, अष्टमी को काली और सप्तमी को माता कुमारी की पूजा की जाती है। सप्तमी को ही पुत्र सप्तमी भी कहा गया है। पुत्र सप्तमी आरोग्य प्रदान करती है। इस दिन भगवती के साथ-साथ सूर्यदेव की आराधना भी भानु रुप में की जाती है। मान्यता है कि अमावस्या के दिन से अष्टमी तक यदि मौन रहकर भगवती उपासना की जाए तो साधक के सप्त चक्रों का सोधन हो जाता है। ऐसे साधकों को कुंडलिनी जागृत करने में सफलता मिलती है।
डा. प्रतीक मिश्रपुरी ने बताया कि गुप्त नवरात्रों की आराधना और पूजा किसी पंडित नहीं करायी जाती। यह पूजा मनुष्य को स्वयं करनी पड़ती है। नवरात्र में अष्टदिनी विद्योपासना भी की जाती है। इस विपासना करने वालों असाध्य रोगों से मुक्ति पा सकते हैं। गुप्त नवरात्र की आराधना अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति दिलाती है।
गुप्त नवरात्रों में गंगा स्नान का व्यापक महत्व बताया गया है। ज्योतिषाचार्य डा. प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार माघ शुक्ल पक्ष नवरात्र की आराधना वस्तुत: मौनी अमावस्या की रात से प्रारंभ हो जाती है। जिस प्रकार अश्विन मास में पड़ने वाले तथा चैत्र शुक्ल पक्ष में आने वाले नवरात्र आम समाज के लिए हैं, वहीं गुप्त नवरात्र तंत्र साधकों के लिए विशेष महत्व रखते हैं। गुप्त नवरात्रों में तृतीय नवरात्र को गौरी, पंचमी को सरस्वती, अष्टमी को काली और सप्तमी को माता कुमारी की पूजा की जाती है। सप्तमी को ही पुत्र सप्तमी भी कहा गया है। पुत्र सप्तमी आरोग्य प्रदान करती है। इस दिन भगवती के साथ-साथ सूर्यदेव की आराधना भी भानु रुप में की जाती है। मान्यता है कि अमावस्या के दिन से अष्टमी तक यदि मौन रहकर भगवती उपासना की जाए तो साधक के सप्त चक्रों का सोधन हो जाता है। ऐसे साधकों को कुंडलिनी जागृत करने में सफलता मिलती है।
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डा. प्रतीक मिश्रपुरी ने बताया कि गुप्त नवरात्रों की आराधना और पूजा किसी पंडित नहीं करायी जाती। यह पूजा मनुष्य को स्वयं करनी पड़ती है। नवरात्र में अष्टदिनी विद्योपासना भी की जाती है। इस विपासना करने वालों असाध्य रोगों से मुक्ति पा सकते हैं। गुप्त नवरात्र की आराधना अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति दिलाती है।
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