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सफलता में सकारात्मक सोच की महत्वपूर्ण भूमिका: राजेंद्र डोभाल
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हरिद्वार। यू-कॉस्ट के डायरेक्टर जनरल डॉ. राजेंद्र डोभाल ने कहा कि जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल करने के लिए सोच महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सकारात्मक सोच के माध्यम से हम समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सृजनात्मक कार्य कर समाज और राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह कर सकते हैं।
गुरुकुल कांगड़ी विवि के 119वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. राजेंद्र डोभाल ने कहा कि जिन सिद्धांतों और विचारों को ध्यान में रखकर स्वामी श्रद्धानंद महाराज ने इस विवि की स्थापना की थी, उन्हीं उद्देश्यों को लेकर यह विवि निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि 1929 के बाद देश में कोई नई खोज नहीं हुई है, जिससे दुनिया में कोई बदलाव आ सके।
प्रो. विष्णुदत्त राकेश ने कहा स्वामी श्रद्धानंद महाराज के बारे में बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विवि के कुलपति प्रो. रूपकिशोर शास्त्री ने की। कार्यक्रम में प्रो. एमआर वर्मा, कुलसचिव प्रो. दिनेश चंद्र भट्ट आदि ने भी विचार रखे।
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कार्यक्रम ये रहे मौजूद
प्रो. राकेश शर्मा, प्रो. प्रभात कुमार, प्रो. श्रवण कुमार शर्मा, प्रो. देवेन्द्र गुप्ता, प्रो. सोमदेव शतांशु, प्रो. ब्रह्मदेव, प्रो. दिनेश चन्द्र शास्त्री, प्रो. अंबुज शर्मा, प्रो. सोहनपाल सिंह आर्य, प्रो. वीके सिंह, प्रो. ईश्वर भारद्वाज, प्रो. एलपी पुरोहित, प्रो. एसके श्रीवास्तव, प्रो. डीएस मलिक, प्रो. आरकेएस डागर, प्रो. सत्यदेव निगमालंकार आदि मौजूद रहे।
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गुरुकुल कांगड़ी विवि के 119वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. राजेंद्र डोभाल ने कहा कि जिन सिद्धांतों और विचारों को ध्यान में रखकर स्वामी श्रद्धानंद महाराज ने इस विवि की स्थापना की थी, उन्हीं उद्देश्यों को लेकर यह विवि निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि 1929 के बाद देश में कोई नई खोज नहीं हुई है, जिससे दुनिया में कोई बदलाव आ सके।
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प्रो. विष्णुदत्त राकेश ने कहा स्वामी श्रद्धानंद महाराज के बारे में बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विवि के कुलपति प्रो. रूपकिशोर शास्त्री ने की। कार्यक्रम में प्रो. एमआर वर्मा, कुलसचिव प्रो. दिनेश चंद्र भट्ट आदि ने भी विचार रखे।
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कार्यक्रम ये रहे मौजूद
प्रो. राकेश शर्मा, प्रो. प्रभात कुमार, प्रो. श्रवण कुमार शर्मा, प्रो. देवेन्द्र गुप्ता, प्रो. सोमदेव शतांशु, प्रो. ब्रह्मदेव, प्रो. दिनेश चन्द्र शास्त्री, प्रो. अंबुज शर्मा, प्रो. सोहनपाल सिंह आर्य, प्रो. वीके सिंह, प्रो. ईश्वर भारद्वाज, प्रो. एलपी पुरोहित, प्रो. एसके श्रीवास्तव, प्रो. डीएस मलिक, प्रो. आरकेएस डागर, प्रो. सत्यदेव निगमालंकार आदि मौजूद रहे।