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खुद तो जाती है सड़कें, बनती नहीं
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Sun, 11 Sep 2016 10:31 PM IST
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The roads themselves are, not paired
- फोटो : amarujala
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शहर की मुख्य सड़क पर वर्षों से चल रहे खुदाई के काम से शहरवासी आजिज आ चुके हैं। शहर की मुख्य सड़क वर्ष 2009 से लगातार खेदी जा रही है। इससे उड़ रही धूल से लोग खासे परेशान हैं। स्थानीय स्तर से लेकर शासन स्तर पर विभागों के बीच समन्वय के लिए गठित समिति भी इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा सकी।
उत्तरी हरिद्वार में दूधाधारी चौक भूपतवाला से पुल जटवाड़ा ज्वालापुर तक के 11.5 किमी मुख्य सड़क मार्ग पर वर्ष 2009 से विभिन्न विभागों, एजेंसियों की ओर से विकास कार्यों के नाम पर खुदाई का काम अब तक नहीं थमा है। बार-बार खुदाई और रोड कटिंग से जहां करोड़ों रुपये ठिकाने लगाए जा रहे हैं, वहीं लोग भी परेशान हैं। ऐसा कार्यदायी एजेंसियों के बीच समन्वय नहीं होने से हो रहा है। सड़क खोदकर छोड़ने से कई लोग हाथ-पैर तुड़वा चुके हैं। एक महिला ने सड़क पर बने गड्ढे में बाइक गिरने से चोटिल होने पर पीडब्ल्यूडी के खिलाफ जिला उपभोक्ता फोरम में केस भी कर रखा है।
ऐसी हुई सड़कों की खुदाई
वर्ष 2009 में जल निगम ने जेएनएनयूआरएम योजना में पानी की नई पाइप लाइन डालने के लिए मुख्य सड़क की खुदाई शुरू की थी। इसके साथ ही पीडब्ल्यूडी ने कुंभ 2010 की योजना में दूधाधारी चौक भूपतवाला से पुल जटवाड़ा ज्वालापुर तक 11.5 किमी सड़क के चौड़ीकरण, सुदृढ़ीकरण एवं फुटपाथ की योजना में खुदाई का काम किया। वन निगम ने सड़क चौड़ीकरण में आ रहे सैकड़ों पेड़ों को काटने के लिए सड़क खोदी और ऊर्जा निगम ने विद्युत पोल तथा ट्रांसफार्मर शिफ्ट करने के लिए सड़क खोदी। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने भी सीवर लाइन डालने के लिए सड़क को खोदी। बाद में परेशान लोगों के आंदोलित होने के बाद ही मरम्मत कराई गई। मरम्मत होने के साथ-साथ ही पहले बीएसएनएल और फिर रिलायंस ने ओएफसी लाइन डालने के लिए सड़क खोदी। जनविरोध पर सड़क ठीक करने के बजाए पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जेल भेज दिया। जिस पर बाद में उन्हें कोर्ट से जमानत करानी पड़ी।
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अब गैस लाइन के लिए खोद रहे सड़क
अर्द्धकुंभ के बाद गेल ने घर-घर पाइप लाइन से गैस पहुंचाने के लिए मुख्य सड़क को दोनों ओर से खोदना शुरू कर रखा है। खुदाई से पानी की लाइनें भी टूट रही हैं और जगह-जगह गड्ढे हो रहे हैं और लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। गेल को गैस पाइप लाइन डालने के बाद रोड कटिंग की मरम्मत भी स्वयं करानी हैं। अभी दिसंबर तक तो उन्हें पाइप लाइन डालने के लिए सड़क खोदने का ही काम करना है। पीडब्ल्यूडी के पास अभी रोड कटिंग की एनओसी देने के लिए कई विभागों व एजेंसियों के आवेदन पड़े हैं।
पीडब्ल्यूडी से मांगे 20 लाख रुपये
मुख्य सड़क का स्वामित्व पीडब्ल्यूडी के पास है। ऐसे में रोड कटिंग के लिए पीडब्ल्यूडी से पहले अनुमति लेनी होती है। इससे उल्ट जल संस्थान की अनुरक्षण शाखा (गंगा) ने पीडब्ल्यूडी को भेजे पत्र में कहा गया कि सड़क बनाने से उनके सीवर के ढक्कन दब गए हैं या नीचे हो गए हैं। उन्होंने लेबल पर लाने में 20 लाख रुपये खर्च होंगे, जिसकी भरपाई पीडब्ल्यूडी करे। यह नए ढंग की समस्या पीडब्ल्यूडी के सामने आ खड़ी हुई है।
हम ही बेेगाने हो गए हैं
पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता आरपी नैथानी का कहना कि हम तो अपने ही घर में बेगाने जैसी स्थिति में हैं। भविष्य में सड़क का नवीनीकरण करने से पहले अब पीडब्ल्यूडी को कई विभागों व एजेंसी से अनुमति लेनी पड़ेगी। कारण कि शहर की मुख्य सड़क के अंदर इतनी लाइनें हो गई हैं कि उसको छेड़ना मुश्किल हो जाएगा। सड़क हमारी है परंतु हमें ही अनुमति लेकर काम करना पड़ेगा।
उत्तरी हरिद्वार में दूधाधारी चौक भूपतवाला से पुल जटवाड़ा ज्वालापुर तक के 11.5 किमी मुख्य सड़क मार्ग पर वर्ष 2009 से विभिन्न विभागों, एजेंसियों की ओर से विकास कार्यों के नाम पर खुदाई का काम अब तक नहीं थमा है। बार-बार खुदाई और रोड कटिंग से जहां करोड़ों रुपये ठिकाने लगाए जा रहे हैं, वहीं लोग भी परेशान हैं। ऐसा कार्यदायी एजेंसियों के बीच समन्वय नहीं होने से हो रहा है। सड़क खोदकर छोड़ने से कई लोग हाथ-पैर तुड़वा चुके हैं। एक महिला ने सड़क पर बने गड्ढे में बाइक गिरने से चोटिल होने पर पीडब्ल्यूडी के खिलाफ जिला उपभोक्ता फोरम में केस भी कर रखा है।
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ऐसी हुई सड़कों की खुदाई
वर्ष 2009 में जल निगम ने जेएनएनयूआरएम योजना में पानी की नई पाइप लाइन डालने के लिए मुख्य सड़क की खुदाई शुरू की थी। इसके साथ ही पीडब्ल्यूडी ने कुंभ 2010 की योजना में दूधाधारी चौक भूपतवाला से पुल जटवाड़ा ज्वालापुर तक 11.5 किमी सड़क के चौड़ीकरण, सुदृढ़ीकरण एवं फुटपाथ की योजना में खुदाई का काम किया। वन निगम ने सड़क चौड़ीकरण में आ रहे सैकड़ों पेड़ों को काटने के लिए सड़क खोदी और ऊर्जा निगम ने विद्युत पोल तथा ट्रांसफार्मर शिफ्ट करने के लिए सड़क खोदी। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने भी सीवर लाइन डालने के लिए सड़क को खोदी। बाद में परेशान लोगों के आंदोलित होने के बाद ही मरम्मत कराई गई। मरम्मत होने के साथ-साथ ही पहले बीएसएनएल और फिर रिलायंस ने ओएफसी लाइन डालने के लिए सड़क खोदी। जनविरोध पर सड़क ठीक करने के बजाए पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जेल भेज दिया। जिस पर बाद में उन्हें कोर्ट से जमानत करानी पड़ी।
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अब गैस लाइन के लिए खोद रहे सड़क
अर्द्धकुंभ के बाद गेल ने घर-घर पाइप लाइन से गैस पहुंचाने के लिए मुख्य सड़क को दोनों ओर से खोदना शुरू कर रखा है। खुदाई से पानी की लाइनें भी टूट रही हैं और जगह-जगह गड्ढे हो रहे हैं और लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। गेल को गैस पाइप लाइन डालने के बाद रोड कटिंग की मरम्मत भी स्वयं करानी हैं। अभी दिसंबर तक तो उन्हें पाइप लाइन डालने के लिए सड़क खोदने का ही काम करना है। पीडब्ल्यूडी के पास अभी रोड कटिंग की एनओसी देने के लिए कई विभागों व एजेंसियों के आवेदन पड़े हैं।
पीडब्ल्यूडी से मांगे 20 लाख रुपये
मुख्य सड़क का स्वामित्व पीडब्ल्यूडी के पास है। ऐसे में रोड कटिंग के लिए पीडब्ल्यूडी से पहले अनुमति लेनी होती है। इससे उल्ट जल संस्थान की अनुरक्षण शाखा (गंगा) ने पीडब्ल्यूडी को भेजे पत्र में कहा गया कि सड़क बनाने से उनके सीवर के ढक्कन दब गए हैं या नीचे हो गए हैं। उन्होंने लेबल पर लाने में 20 लाख रुपये खर्च होंगे, जिसकी भरपाई पीडब्ल्यूडी करे। यह नए ढंग की समस्या पीडब्ल्यूडी के सामने आ खड़ी हुई है।
हम ही बेेगाने हो गए हैं
पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता आरपी नैथानी का कहना कि हम तो अपने ही घर में बेगाने जैसी स्थिति में हैं। भविष्य में सड़क का नवीनीकरण करने से पहले अब पीडब्ल्यूडी को कई विभागों व एजेंसी से अनुमति लेनी पड़ेगी। कारण कि शहर की मुख्य सड़क के अंदर इतनी लाइनें हो गई हैं कि उसको छेड़ना मुश्किल हो जाएगा। सड़क हमारी है परंतु हमें ही अनुमति लेकर काम करना पड़ेगा।