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सत्ता बदलते ही शुरू हुई तबादलों की आहट
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Tue, 14 Mar 2017 10:07 PM IST
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सूबे में सत्ता बदलते ही महकमों में तबादलों की आहट शुरू हो गई है। हालांकि अभी सरकार के नए मुखिया का चयन भी नहीं हो पाया है, पर हरिद्वार से मोह रखने वाले अफसरों ने कुर्सी बचाने की जोड़तोड़ शुरू कर दी है। इसके बावजूद जनपद में कई सालों से जमे अफसरों की कुर्सियां हिलनी तय हैं। खासकर पुलिस प्रशासन सहित शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विभागों में फेरबदल की प्रबल संभावनाएं हैं।
राजकाज अपने तरीके से चलाने के लिए हर सरकार अपने पसंदीदा अफसरों को प्राथमिकता देती है। फिलहाल जिले में कई बड़े अफसर पिछली सरकार के चहेते रहे हैं। इनमें कुछ विपक्षी दल भाजपा की आंखों में लगातार खटकते रहे। चुनाव के बीच में जिलाधिकारी और एसएसपी की विदाई में भाजपा की ओर से लग रहे ऐसे आरोप भी बड़ा कारण रहे। अब परिणाम भाजपा के पक्ष में आने से उनमें खलबली मच गई। बहरहाल नई सरकार में अफसरों की अदला बदली तय है। इसे भांपते हुए विभागों में हलचल शुरू हो गई है। निचले कर्मचारी साहब की विदाई को लेकर कानाफूसी करते नहीं थक रहे हैं।
खासतौर पर पुलिस प्रशासन, शिक्षा, चिकित्सा, स्वास्थ्य जैसे बड़े महकमों में फेरबदल की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। अफसर भी नई सरकार में कुर्सी का गणित फिट बैठाने के लिए जुगत लगाने में जुट गए हैं। वहीं अपने पसंद के अफसरों को कुर्सियों पर बैठाने के लिए भाजपाइयों के अरमान भी उमड़कर बाहर आने लगे हैं।
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सुनने को तैयार नहीं थे मंत्री
जिले में तैनात कुछ अफसरों की अपने विभागों के मंत्रियों से गजब की टयूनिंग रही। एक विभाग के मंत्री तो हरिद्वार में तैनात अफसर को हटाने की बात सुनने के लिए भी तैयार नहीं होते थे। हालात ये रहे कि मंत्री ने वरिष्ठता का पैमाना भी उठाकर एक तरफ रख दिया और सीनियर अफसर जिले में होने के बावजूद जूनियर को मुखिया बना दिया। खास अफसर की मंत्री के परिवार से नजदीकी विभाग में चर्चा का विषय रही। ऐसे अफसर की विदाई अब लगभग तय मानी जा रही है।
राजकाज अपने तरीके से चलाने के लिए हर सरकार अपने पसंदीदा अफसरों को प्राथमिकता देती है। फिलहाल जिले में कई बड़े अफसर पिछली सरकार के चहेते रहे हैं। इनमें कुछ विपक्षी दल भाजपा की आंखों में लगातार खटकते रहे। चुनाव के बीच में जिलाधिकारी और एसएसपी की विदाई में भाजपा की ओर से लग रहे ऐसे आरोप भी बड़ा कारण रहे। अब परिणाम भाजपा के पक्ष में आने से उनमें खलबली मच गई। बहरहाल नई सरकार में अफसरों की अदला बदली तय है। इसे भांपते हुए विभागों में हलचल शुरू हो गई है। निचले कर्मचारी साहब की विदाई को लेकर कानाफूसी करते नहीं थक रहे हैं।
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खासतौर पर पुलिस प्रशासन, शिक्षा, चिकित्सा, स्वास्थ्य जैसे बड़े महकमों में फेरबदल की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। अफसर भी नई सरकार में कुर्सी का गणित फिट बैठाने के लिए जुगत लगाने में जुट गए हैं। वहीं अपने पसंद के अफसरों को कुर्सियों पर बैठाने के लिए भाजपाइयों के अरमान भी उमड़कर बाहर आने लगे हैं।
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सुनने को तैयार नहीं थे मंत्री
जिले में तैनात कुछ अफसरों की अपने विभागों के मंत्रियों से गजब की टयूनिंग रही। एक विभाग के मंत्री तो हरिद्वार में तैनात अफसर को हटाने की बात सुनने के लिए भी तैयार नहीं होते थे। हालात ये रहे कि मंत्री ने वरिष्ठता का पैमाना भी उठाकर एक तरफ रख दिया और सीनियर अफसर जिले में होने के बावजूद जूनियर को मुखिया बना दिया। खास अफसर की मंत्री के परिवार से नजदीकी विभाग में चर्चा का विषय रही। ऐसे अफसर की विदाई अब लगभग तय मानी जा रही है।