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Haridwar News: तीन साल से बिना नवीनीकरण के चल रहा था अस्पताल, पंजीकरण निरस्त
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हरिद्वार। ज्वालापुर स्थित धीरवाली में लोकप्रिय अस्पताल तीन साल से रजिस्ट्रेशन का नवीनीकरण कराए बिना अवैध रूप से संचालित किया जा रहा था। अस्पताल में एलोपैथिक डॉक्टर तक नहीं थे और अस्पताल संचालक खुद आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं। इसका खुलासा सीएमओ से की गई शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग की जांच में हुआ है। एलोपैथिक के पंजीकरण को निरस्त कर दिया है। चेतावनी दी है कि अगर अस्पताल चलता हुआ मिला तो कार्रवाई होगी। आयुर्वेदिक में भी नवीनीकरण कराए बिना उपचार न करने की हिदायत दी है। साथ ही 104,100 रुपये का विलंब शुल्क लगाया है। आरटीआई कार्यकर्ता खन्नानगर निवासी सचिन चौधरी ने दिसंबर 2023 में शिकायत दर्ज कराई थी। साथ ही अस्पताल के संबंध में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से आरटीआई में दस्तावेज मांगे थे। इसके बाद तथ्यों के साथ सीएमओ से शिकायत की थी। बताया था कि धीरवाली पर चंदन मेमोरियल क्लीनिक एंड लोकप्रिय अस्पताल अवैध तरीके से चलाया जा रहा है। सीएमओ की ओर से जांच कमेटी बनाते हुए पूरे मामले की जांच कराई गई। शुक्रवार को जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट जारी की।रिपोर्ट में बताया गया है कि अस्पताल का एलोपैथिक चिकित्सा के लिए कराया गया पंजीकरण तीन जनवरी 2022 को खत्म हो गया था। इसके बाद से अवैध तरीके से अस्पताल का संचालन करते हुए उपचार किया जा रहा था। जिस चिकित्सक के नाम से रजिस्ट्रेशन था वह भी उसी दिन से कार्यरत नहीं है। इसके बाद एलोपैथिक के पंजीकरण को जिला रजिस्ट्रीकरण प्राधिकरण ने निरस्त कर दिया। आयुर्वेदिक का 29 सितंबर 2020 पंजीकरण खत्म हो गया था। आयुर्वेदिक पद्धति से भी उपचार करने पर रोक लगा दी है।
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प्रदूषण बोर्ड के निरीक्षण में भी मिली तमाम खामियां
- आरटीआई कार्यकर्ता सचिन चौधरी की शिकायत के बाद राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अस्पताल का निरीक्षण किया था। निरीक्षण में सामने आया था कि बोर्ड से कोई एनओसी नहीं ली है। बायोवेस्ट कैमिकल को भी अलग-अलग नहीं किया जा रहा था। बोर्ड ने जल अधिनियम व वायु अधिनियम एवं जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन के तहत सहमति व बायो मेडिकल मैनेजनेट नियम के लिए आवेदन करने के लिए हिदायत दी। इसके बाद भी आवेदन न करने पर नोटिस जारी किया था। इस संबंध में रिपोर्ट सीएमओ को भेजी।
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अस्पताल चलाया तो 50 हजार रुपये लगेगा जुर्माना
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अशोक तोमर ने बताया कि अस्पताल में एलोपैथिक और आयुर्वेदिक के लिए जो पंजीकरण कराया गया था, उसका दोबारा नवीनीकरण ही नहीं कराया गया। निरीक्षण के दौरान सामने आया कि अस्पताल में एलोपैथ से उपचार करने के लिए कोई चिकित्सक ही नहीं है। इसलिए पंजीकरण निरस्त कर दिया है। आयुर्वेद से भी उपचार करने पर रोक लगाई गई है। अगर अस्पताल चलता या उपचार होता पाया गया तो 50 हजार का जुर्माना लगाया जाएगा।
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प्रदूषण बोर्ड के निरीक्षण में भी मिली तमाम खामियां
- आरटीआई कार्यकर्ता सचिन चौधरी की शिकायत के बाद राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अस्पताल का निरीक्षण किया था। निरीक्षण में सामने आया था कि बोर्ड से कोई एनओसी नहीं ली है। बायोवेस्ट कैमिकल को भी अलग-अलग नहीं किया जा रहा था। बोर्ड ने जल अधिनियम व वायु अधिनियम एवं जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन के तहत सहमति व बायो मेडिकल मैनेजनेट नियम के लिए आवेदन करने के लिए हिदायत दी। इसके बाद भी आवेदन न करने पर नोटिस जारी किया था। इस संबंध में रिपोर्ट सीएमओ को भेजी।
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अस्पताल चलाया तो 50 हजार रुपये लगेगा जुर्माना
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अशोक तोमर ने बताया कि अस्पताल में एलोपैथिक और आयुर्वेदिक के लिए जो पंजीकरण कराया गया था, उसका दोबारा नवीनीकरण ही नहीं कराया गया। निरीक्षण के दौरान सामने आया कि अस्पताल में एलोपैथ से उपचार करने के लिए कोई चिकित्सक ही नहीं है। इसलिए पंजीकरण निरस्त कर दिया है। आयुर्वेद से भी उपचार करने पर रोक लगाई गई है। अगर अस्पताल चलता या उपचार होता पाया गया तो 50 हजार का जुर्माना लगाया जाएगा।