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चौथे हाथी को भी किया रेडियो कॉलर
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श्यामपुर रेंज में वन टीम ने चौथे हाथी को लगाया रेडियो कॉलर ।
- फोटो : HARIDWAR
वन विभाग की टीम ने चौथे हाथी को रेडियो कॉलर कर किया है। श्यामपुर रेंज में हाथी को रेडियो कॉलर करने की आपरेशन को पूरा किया। अधिकारियों का कहना है कि उनके प्रभाग से चार हाथियों को ही रेडियो कॉलर लगाया जाना था।
कुंभ के मद्देनजर आबादी क्षेत्र में आने वाले हाथियों को रोकने के लिए रेडियो कॉलर किया जाना है। ऐसे दस हाथी राजाजी टाइगर रिजर्व और वन विभाग की ओर से चिह्नित किए गए हैं। सबसे पहले दो महीने पहले वन विभाग की ओर से श्यामपुर रेंज की दांसोवाली बीट में एक हाथी को रेडियो कॉलर किया गया था, लेकिन इसकी पथरी के बिशनपुर गांव के जंगलों में करंट लगने से मौत हो गई थी। बीते सप्ताह बृहस्पतिवार को एक हाथी को फिर से दांसोवाली बीट में रेडियो कॉलर कर लिया गया था। इसके बाद शनिवार को श्यामपुर रेंज के ही गुरुकुल टापू पर रेडियो कॉलर किया गया।
रविवार को फिर से एक हाथी को इसी रेंज की अंजनी बीट क्षेत्र में कटारपुर से लौटते समय सुबह साढ़े दस बजे बेहोश किया गया। लगभग 45 वर्षीय हाथी को रेडियो कॉलर कर छोड़ दिया गया।
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डीएफओ नीरज शर्मा ने बताया कि चार हाथी को रेडियो कॉलर कर लिया गया है। फिलहाल इतने ही हाथियों को वन विभाग की ओर से रेडियो कॉलर किया जाना था। अन्य हाथियों को राजाजी टाइगर रिजर्व की ओर से रेडियो कॉलर किया जाना है। रेडियो कॉलर किए गए हाथियों की निगरानी करने का काम शुरू कर दिया गया है।
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कुंभ के मद्देनजर आबादी क्षेत्र में आने वाले हाथियों को रोकने के लिए रेडियो कॉलर किया जाना है। ऐसे दस हाथी राजाजी टाइगर रिजर्व और वन विभाग की ओर से चिह्नित किए गए हैं। सबसे पहले दो महीने पहले वन विभाग की ओर से श्यामपुर रेंज की दांसोवाली बीट में एक हाथी को रेडियो कॉलर किया गया था, लेकिन इसकी पथरी के बिशनपुर गांव के जंगलों में करंट लगने से मौत हो गई थी। बीते सप्ताह बृहस्पतिवार को एक हाथी को फिर से दांसोवाली बीट में रेडियो कॉलर कर लिया गया था। इसके बाद शनिवार को श्यामपुर रेंज के ही गुरुकुल टापू पर रेडियो कॉलर किया गया।
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रविवार को फिर से एक हाथी को इसी रेंज की अंजनी बीट क्षेत्र में कटारपुर से लौटते समय सुबह साढ़े दस बजे बेहोश किया गया। लगभग 45 वर्षीय हाथी को रेडियो कॉलर कर छोड़ दिया गया।
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डीएफओ नीरज शर्मा ने बताया कि चार हाथी को रेडियो कॉलर कर लिया गया है। फिलहाल इतने ही हाथियों को वन विभाग की ओर से रेडियो कॉलर किया जाना था। अन्य हाथियों को राजाजी टाइगर रिजर्व की ओर से रेडियो कॉलर किया जाना है। रेडियो कॉलर किए गए हाथियों की निगरानी करने का काम शुरू कर दिया गया है।