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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Haridwar News ›   The administration was accused of double standards imposed on teachers

शिक्षकों ने प्रशासन पर लगाया दोहरे मानदंड का आरोप

Fri, 04 Dec 2015 12:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार Updated Fri, 04 Dec 2015 12:12 AM IST
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हरिद्वार। शिक्षकों ने प्रशासन पर दोहरे मानदंड अपनाए जाने का आरोप लगाया। शिक्षकों का कहना है कि जिले में जनसंख्या डाटा एकत्र करने को लेकर कोई आदेश जारी नहीं करने से भ्रम बना हुआ हैं जबकि दूसरे जिलों में स्कूल समय में डाटा तैयार करने के लिए कहा गया है। शिक्षकों ने प्रशासन से इस संबंध में कोई एक स्पष्ट आदेश पारित करने की मांग रखी।
जिला प्रशासन की ओर से स्कूलों में पिछले महीने पत्र भेजकर 16 दिसंबर तक सहायक अध्यापकों को राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर का डाटा तैयार करने के लिए प्रगणंक के रुप में ड्यूटी पर लगाया गया है। शिक्षक इस बात को लेकर भ्रम में हैं कि वह किस समय जनसंख्या प्रगणंक के रुप में काम करें और किस समय स्कूल जाएं। इस संबंध में कोई कार्यक्रम तय नहीं किया गया। जबकि ऊधम सिंह नगर के मुख्य शिक्षा अधिकारी की ओर से 28 नवबंर को जिले के सभी प्रधानाचार्यों और प्रधानाध्याकों के नाम एक आदेश पारित किया गया। वहां के जिलाधिकारी के हवाले से दिए गए इस आदेश में कहा कि गया प्रगणंक के रुप में ड्यूटी पर लगाए गए सहायक अध्यापक जनसंख्या रजिस्टर की महत्ता और समयबद्ध कार्यक्रम को देखते हुए 17 दिसंबर तक पूरे समय केवल जनंसंख्या रजिस्टर का काम करेंगे। यहां इस तरह का कोई आदेश नहीं है।

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अपनी ढपली अपना राग-
माध्यमिक शिक्षक संघ के जिला महामंत्री राजेश सैनी के अनुसार कई शिक्षकों की इस तरह की शिकायत है कि उनके प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्य समय कार्यक्रम निर्धारित नहीं होने के चलते स्कूल समय में उन्हें जनसंख्या डाटा के लिए कहीं नहीं जाने देते। जबकि कुछ सहायक अध्यापक आधा समय स्कूल में दे रहे हैं और आधा समय जनसंख्या के काम में लगा रहे हैं। जबकि कुछ शिक्षक स्कूलों में बिल्कुल नहीं आ रहे। ऐसे शिक्षकों का कहना है कि जब वह स्कूल में पढ़ाने जाएंगे तो इस काम को किस समय पूरा करेंगे।
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यहां भी ऐसे आदेश की मांग-
राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अशोक चौहान, जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष सुखबीर सिंह, माध्यमिक शिक्षक संघ के महामंत्री राजेश सैनी और राजकीय शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष हरेंद्र सैनी ने यहां भी ऐसे ही आदेश जारी किए जाने की मांग की। ताकि शिक्षक किसी भ्रम की स्थिति में न रहे और समय से काम पूरा हो सके। इस संबंध में राजेश सैनी की ओर से मुख्य शिक्षा अधिकारी को एक सप्ताह पहले पत्र भी लिखा गया।


शिक्षकों ने दिया सुझाव-
शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों ने शासन प्रशासन को सुझाव देते हुए कहा कि ऐसे कामों में शिक्षकों की ड्यूटी लगाने से बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह से प्रभावित होती है। ऐसे कामों में पढ़े लिखे बेरोजगार युवाओं को लगाकर मानदेय उन्हें दिया जाए तो बेहतर होगा। इससे न तो बच्चों की पढ़ाई का नुकसान होगा और बेरोजगार युवाओं को कुछ काम और पैसा भी मिलेगा।

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