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दस पापों का विनाशक गंगा दशहरा आज
ब्यूरो/अमर उजाला हरिद्वार
Updated Mon, 13 Jun 2016 11:38 PM IST
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गंगा
- फोटो : अमर उजाला
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हरिद्वार। तीन कायिक, चार वाचिक और तीन मानसिक इन दस पापों का विनाश करने वाले गंगा दशहरा स्नान आज है। इस दिन गंगा में दस गोते लगाकर पितृ तर्पण करने से जीवन की अनेक बाधाएं दूर हो जाती हैं। मुख्य रूप से गंगा के धरती पर आगमन का यह पर्व हरिद्वार आदि मैदानी तीर्थों पर मनाया जाता है।
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शास्त्रों में कायिक, वाचिक और मानसिक पापों के निवारण के लिए गंगा के मैदानों में आने का दिन गंगा दशहरा नियत किया गया है। इस दिन गंगा आदि पवित्र नदियों और तालाबों में स्नान कर दस गोते लगाने का महत्व है। मनुष्य अपने जीवन में अनेक पाप करता है। ऐसे दस पापों को क्षमा करने का अवसर दस प्रकार के योग से युक्त गंगा दशहरा देता है। मुख्य रूप से यह पर्व स्नान का पर्व है। स्नानोपरांत पितृ तर्पण करने से पितरों का मोक्ष हो जाता है।
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गंगा में जलाएं दीपक
हरिद्वार। दस विधि पापों के शमन के लिए गंगा तट पर दीपक जलाकर बहा देना चाहिए। गंगा पूजा में दस प्रकार की वस्तुएं जरूरी है। प्रत्येक वस्तु यदि दस की संख्या में हो तो और भी अधिक लाभ होगा। ऐसा करने से दस पाप निश्चित रुप से नष्ट हो जाते हैं।
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गंगा अवतरण की कथा सुने
हरिद्वार। गंगा दशहरे के दिन गंगा की कथा सुननी चाहिए। गंगा पूजा के बाद घी में भीगे हुए दस मुठ्ठी काले तिल गंगा जल में छोड़ने चाहिए। गुड़ और सत्तू से बनाए गए दस लड्डू गंध और पुष्प के साथ गंगा में छोड़ें। ऐसा करने से अनेक प्रकार के अव्यक्त पापों का भी नाश हो जाता है।
कब शुरू होगा स्नान
हरिद्वार। दस योगों में से छह योग होने के कारण 14 जून को गंगा दशहरा स्नान सवेरे प्रारंभ हो जाएगा। इस दिन दशमी तिथि संपूर्ण है। हस्त नक्षत्र में गंगा स्नान पूरे दिन चलेगा।